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ऑर्ट्स के दाखिलों में गिरावट, साइंस और कॉमर्स में सीटें फुल

Thu, 06 Aug 2015 08:00 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 06 Aug 2015 08:00 PM IST
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The decline in enrollment of Arts, Science and Commerce Seats Full.

कॉलेजों में कॉमर्स और साइंस के आगे आर्ट्स की चमक फीकी पड़ने लगी है। आर्ट्स विषयों के प्रति छात्रों का रुझान घट रहा है। इसी का नतीजा है कि साइंस और कॉमर्स में हाई कटऑफ के बाद भी दो मेरिट में ही सीटें फुल हो गई थी।

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लेकिन आर्ट्स के जनरल और ऑनर्स विषयों के लिए अब तक कॉलेजों में आवेदन के लिए पोर्टल खुले हुए हैं। बीते सालों में आर्ट्स के एक-दो विषयों को छोड़ दें तो अधिकतर में सीटें खाली रह जाती हैं।
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कॉलेजों में बीए इतिहास, राजनीतिशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, हिन्दी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में भी छात्र नहीं मिल रहे हैं जबकि तीसरी कटऑफ  अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है।
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शिक्षाविदें की मानें तो इसके पीछे छात्रों की मानसिकता है, जो स्कूली स्तर पर अभिभावकों द्वारा तैयार कर दी जाती है।

आर्ट्स की अहमियत नहीं समझते छात्र!

The decline in enrollment of Arts, Science and Commerce Seats Full.

सेक्टर-9 स्थित राजकीय स्नातकोत्तर कॉलेज की प्रिंसिपल सुषमा चौधरी कहती हैं कि दसवीं के बाद ही छात्रों में इंजीनियरिंग और मेडिकल की ओर रुख कर दिया जाता है।

इसकी वजह से आर्ट्स विषयों की अहमियत ही नहीं समझ आती। प्राइवेट कंपनियों की वजह से कॉमर्स में क्रेज बढ़ा है। शिक्षाविदों की मानें तो आम राय यही है कि आर्ट्स में वही लोग दाखिला लेते हैं जो पढ़ाई में कमजोर होते हैं और उनके लिए नौकरी के बहुत कम विकल्प मौजूद होते हैं।

गुड़गांव में आईटी कंपनियां जिस तरह इंजीनियरों की थोक के भाव भर्ती करती हैं उसके ठीक विपरीत मानविकी के स्नातक के लिए सिर्फ सरकारी विभागों या शिक्षा के क्षेत्र में ही नौकरियां उपलब्ध रहती हैं।

इन सब धारणओं चलते भी आर्ट्स में रुचि नहीं रहती। शिक्षाविद् राजन मित्तल कहते हैं ऑर्ट्स की शिक्षा के न फलफूल पाने का एक और कारण है इसकी शिक्षा का स्तर।

शिक्षक पाठ्यपुस्तक से सीधे पढ़ाते थे और लेक्चर के बाद पाठ के अंत में दिए प्रश्नों के उत्तर लिखवा देते है। एक साधारण इंजीनियर के लिए एक साधारण समाजशास्त्री या राजनीति शास्त्र के छात्र से बेहतर नौकरी के अवसर मौजूद रहते हैं।

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