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सावधान, अब छात्र नहीं मार पाएंगे किताब से नकल
अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 02 Dec 2013 09:35 AM IST
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राज्य के स्कूलों में अब बोर्ड परीक्षाओं के दौरान होने वाली नकल पर एक पुस्तक से ब्रेक लगेगी। सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है।
लेकिन यह सौ फीसदी सच है। यह संभव हुआ है आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल सीरीवाल भंगेवाल जिला मुक्तसर की लेक्चरर बिमला की कोशिश से।
उन्होंने नकल पर रोक लगाने के लिए नकलां नाल ना जीवन बणदे पुस्तक लिखी है। उन्होंने पुस्तक में काफी बढ़िया तरीके से नकल को रोकने की नसीहत दी है।
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. तेजिंदर कौर धालीवाल ने पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर डिप्टी डॉयरेक्टर वातावरण एवं नकल विरोधी मुहिम की संयोजक श्रुति शुक्ला भी मौजूद रही।
बोर्ड की चेयरपर्सन ने कहा कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि लेखिका आगे भी इस तरह के विषय पर लेखन करती रहेंगी।
बिमला देवी की तरफ से किताब उन लोगों को समर्पित की गई। जो कि हमेशा नकल रोकने की कोशिश में यत्नशील रहते हैं। उन्होंने बताया कि श्रुति शुक्ला से प्रेरित होकर ही उन्होंने तीन चार दिन में पुस्तक लेखन का काम पूरा किया।
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श्रुति शुक्ला ने उम्मीद जताई कि पुस्तक से विद्यार्थियों को काफी फायदा होगा। जिक्रयोग है कि बोर्ड परीक्षाओं में हर साल छह लाख के करीब स्टूडेंट्स अपीयर होते हैं। कई स्टूडेंट्स नकल करते पकड़े भी जाते हैं।
जबकि इस पुस्तक में बताने की कोशिश की गई है कि नकल कर परीक्षा पास करने से कभी मंजिल हासिल नहीं की जा सकती है। इसके लिए मेहनत जरूरी है।
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लेकिन यह सौ फीसदी सच है। यह संभव हुआ है आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल सीरीवाल भंगेवाल जिला मुक्तसर की लेक्चरर बिमला की कोशिश से।
उन्होंने नकल पर रोक लगाने के लिए नकलां नाल ना जीवन बणदे पुस्तक लिखी है। उन्होंने पुस्तक में काफी बढ़िया तरीके से नकल को रोकने की नसीहत दी है।
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. तेजिंदर कौर धालीवाल ने पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर डिप्टी डॉयरेक्टर वातावरण एवं नकल विरोधी मुहिम की संयोजक श्रुति शुक्ला भी मौजूद रही।
बोर्ड की चेयरपर्सन ने कहा कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि लेखिका आगे भी इस तरह के विषय पर लेखन करती रहेंगी।
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बिमला देवी की तरफ से किताब उन लोगों को समर्पित की गई। जो कि हमेशा नकल रोकने की कोशिश में यत्नशील रहते हैं। उन्होंने बताया कि श्रुति शुक्ला से प्रेरित होकर ही उन्होंने तीन चार दिन में पुस्तक लेखन का काम पूरा किया।
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श्रुति शुक्ला ने उम्मीद जताई कि पुस्तक से विद्यार्थियों को काफी फायदा होगा। जिक्रयोग है कि बोर्ड परीक्षाओं में हर साल छह लाख के करीब स्टूडेंट्स अपीयर होते हैं। कई स्टूडेंट्स नकल करते पकड़े भी जाते हैं।
जबकि इस पुस्तक में बताने की कोशिश की गई है कि नकल कर परीक्षा पास करने से कभी मंजिल हासिल नहीं की जा सकती है। इसके लिए मेहनत जरूरी है।