उत्तरांखड के सबसे बड़े कॉलेज में 'ट्रिपल एक्स' की क्लास
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छात्र संख्या के लिहाज से उत्तराखंड के सबसे बड़े डीएवी पीजी कॉलेज में अब अजब अनोखे शिक्षक पढ़ा रहे हैं। ऐसे शिक्षक जिनका नाम कागजों में तो चल रहा है लेकिन कक्षा में नजर नहीं आते।
छात्र क्लास देने आते हैं और 'एक्सएक्सएक्स' टीचर्स का इंतजार करके वापस लौट जाते हैं। जबकि कॉलेज प्रशासन ने हाल ही में सभी छात्रों को क्लास देने का एसएमएस किया था।
डीएवी में इस साल प्रथम वर्ष में मेरिट से दाखिले किए गए। इन छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए कॉलेज प्रशासन ने बीते सप्ताह करीब 5500 छात्रों को एसएमएस से क्लास में आने की सूचना दी। इस पर छात्रों ने कॉलेज का रुख तो कर लिया लेकिन अब अनोखे नाम वाले शिक्षक न मिल पाने की वजह से भटक रहे हैं।
टीचर का नाम ट्रिपल एक्स
एक छात्र ने बताया कि उनकी बीएससी प्रथम वर्ष की क्लास 11 बजे से 11:45 के बीच रखी गई है लेकिन इसमें टीचर का नाम ट्रिपल एक्स रखा गया है।
फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स में करीब नौ ट्रिपल एक्स टीचर हैं। दरअसल शिक्षकों की कमी की वजह से कालेज ने अस्थाई व्यवस्था के लिए एक्स नाम रखे हैं।
क्लास शुरू होने के बाद अब तक भी कॉलेज प्रशासन यहां शिक्षकों की व्यवस्था नहीं करा पाया। टाइम टेबल में कई कक्ष ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही समय पर दो अलग-अलग विषयों की कक्षाएं लगा दी गई हैं। सवाल यह है कि ऐसे में छात्रों की 75 प्रतिशत उपस्थिति कैसे पूरी होगी।
क्या है ट्रिपल एक्स
दरअसल, डीएवी में जब टाइम टेबल बनाया गया तो इसमें शिक्षकों की कमी आड़े आई। जिन सेक्शन तक शिक्षक उपलब्ध थे, उनके तो नाम दे दिए गए और जहां नहीं मिले, वहां संबोधन के तौर पर ट्रिपल एक्स लिख दिया गया।
कॉलेज प्रशासन का तर्क यह था कि जब क्लासेज चलनी होंगी तो ट्रिपल एक्स की जगह पर संविदा वाले शिक्षकों को लाया जाएगा या नए शिक्षकों की भर्ती हुई तो यह कमी पूरी हो जाएगी। लेकिन अब तक दोनों से कोई भी काम नहीं किया जा सका है।
40 की जगह 950 छात्र
बॉटनी विभाग की लैब में वैसे तो 40 छात्र ही एक बार में प्रैक्टिकल दे सकते हैं लेकिन यहां बीएससी द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों की संख्या मिलाकर 950 से ऊपर है।
खुद विभाग के एचओडी इस बाबत प्राचार्य को पत्र लिख चुके हैं कि इतनी कम जगह पर इतनी बड़ी संख्या में प्रैक्टिकल कराना संभव नहीं है।
इसी प्रकार स्टैटिस्टिक्स विभाग में स्टैट 1 व स्टैट 2 कक्ष में वैसे तो 20 छात्रों के बैठने की ही जगह है लेकिन यहां 200 छात्र हैं। जब कभी सभी छात्र एक साथ आ जाते हैं तो पैर रखने की जगह नहीं मिलती।
कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। हमने विभागाध्यक्षों को यूजीसी नियमों के मुताबिक पीरियड लगाने को बोला है। जो टाइम टेबल मांगा गया था, उसके मुताबिक एचओडी को कहा गया था कि वह शिक्षकों की ड्यूटी लगाएं लेकिन छात्र संख्या ज्यादा होने की वजह से उन्हें इसमें दिक्कत आ रही है। जल्द ही शिक्षक न मिले तो परेशानी और बढ़ जाएगी।
- डॉ. देवेंद्र भसीन, प्राचार्य, डीएवी पीजी कॉलेज