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जानिए, क्या हुआ जब गुरुजी पढ़ाने लगे अभद्रता का पाठ!

Sat, 21 Sep 2013 01:57 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ Updated Sat, 21 Sep 2013 01:57 AM IST
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teacher demoted for inappropriate behaviour

लखनऊ विश्वविद्यालय में एप्लाइड इकोनॉमिक्स विभाग के अध्यक्ष पद से प्रो. नर सिंह को शुक्रवार को हटा दिया गया।

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उन पर पीएचडी कोर्स वर्क की क्लास में विदेशों के किस्से सुनाने, बीच में छात्रों के बोलने पर अपशब्द कहने और अश्लील बातें करने के आरोप थे।

ये आरोप खुद छात्रों ने लगाए थे। विभाग में कुछ शिक्षकों ने भी व्यवस्था दुरुस्त न होने की शिकायत की थी।

कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने जांच कमेटी की रिपोर्ट पर यह कार्रवाई की है। अब प्रो. राजीव महेश्वरी को नया विभागाध्यक्ष बनाया गया है। उधर, प्रो. नर सिंह ने आनन-फानन में हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

उनका कहना है कि उन्हें बिना चार्जशीट दिए पद से जबर्दस्ती हटा दिया गया और नए विभागाध्यक्ष ने उनसे चार्ज लिए बिना ही कुर्सी संभाल ली।

मामले की शिकायत अप्रैल 2012 में पीएचडी कोर्स वर्क की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने तत्कालीन कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्रा से की थी। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए प्रो. एके सेनगुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी।
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मगर बाद में किन्हीं कारणों से प्रो. ए चटर्जी को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। मामले की जांच में करीब डेढ़ साल लगे। लविवि प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक है और वे इस बारे में ज्यादा नहीं बोल सकते।
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इधर, कुलपति के सख्त रुख से शिक्षकों में खलबली मची हुई है। प्रो. नरसिंह के पहले भी कुलपति डॉ. निमसे ने एंथ्रोपोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एपी सिंह को बिना छुट्टी लिए नोटिस जारी किया था।


दोबारा टेस्ट कराने को कहा तो की शिकायत
प्रो. नर सिंह ने अपना कार्यभार एक जुलाई 2011 को संभाला था। विभागाध्यक्ष पद तीन साल तक का होता है। अभी करीब नौ महीने का उनका कार्यकाल बाकी था। छात्रों की लिखित शिकायत के जवाब में उनका कहना है कि पीएचडी कोर्स वर्क के टेस्ट में नकल हुई थी।

उन्होंने इस टेस्ट पर सवाल उठाते हुए दोबारा टेस्ट कराने की घोषणा की। इसके बाद ही उनके खिलाफ शिकायत की गई।

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