फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   sucess secret of tricity toppers in cbse board

ट्राइसिटी के टॉपर्स से जानिए सफलता के टिप्स

Thu, 29 May 2014 09:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 29 May 2014 09:54 AM IST
विज्ञापन
sucess secret of tricity toppers in cbse board

ट्राइसिटी टॉपर निखिल श्यौराण ने बताया कि उन्होंने यह सफलता बिना किसी कोचिंग के हासिल की है। 11वीं क्लास से ही तैयारी के लिए टाइम टेबल तैयार कर लिया था। रुटीन में नौ से दस घंटे पढ़ाई कर एग्जाम की तैयारी की। निखिल ने अपने फेवरेट विषय गणित में 100 और कंप्यूटर साइंस में 99 अंक हासिल किए है।

विज्ञापन


श्यौराण का सपना कंप्यूटर इंजीनियर बनना है। अपनी सफलता का श्रेय अपने टीचर्स और अभिभावकों को देते हैं। इनके पिता बिजेंद्र सिंह एजी पंजाब में ऑडिटर हैं और मां मीना श्यौराण हाउस वाइफ। बिजेंद्र सिंह ने बताया यह बेटे की कड़ी मेहनत की नतीजा है। श्यौराण मूल रूप से हरियाणा के हिसार जिले के राखी गढ़ी गांव के  रहने वाले हैं।
विज्ञापन


देश भर के इंजीनियरिंग कालेजों में दाखिले के लिए आयोजित जेईई मेंस रिजल्ट में उन्होंने 252 अंक हासिल किए और अब एडवांस रिजल्ट में भी बेहतर रिजल्ट की उम्मीद है। केंद्रीय विद्यालय की प्रिंसिपल अमिता शर्मा ने निखिल की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। निखिल की बहन खुशबू श्यौराण एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुमेधा की पसंद लॉ

sucess secret of tricity toppers in cbse board

बिना ट्यूशन लिए भवन विद्यालय सेक्टर-27 की छात्रा सुमेधा अरोड़ा ने कॉमर्स स्टीम में सिटी में टॉप किया। सुमेधा मैराथन में भी हिस्सा ले चुकी हैं और ऑल इंडिया आईपीएस बैडमिंटन टूर्नामेंट की रनरअप रहे चुकी हैं। सुमेधा की मां डॉ. गीता अरोड़ा पेक में प्रोफेसर है और पिता संजय अरोड़ा सीए हैं।

कोट

आईआईएम दाखिला लेना चाहती हूं। लेकिन, कैरियर को लेकर अभी ज्यादा नहीं सोच रही हूं। पहली पसंद लॉ है। परीक्षा के लिए टीचर्स के बताए सेलेबस को ध्यान से पढ़ा। बिना ट्यूशन के सुमेधा ने सिर्फ पूरे साल होमवर्क अच्छे तरह से किया और रोजाना स्कूल में करवाई गई स्टडीज को ध्यान से पढ़ा। कभी परीक्षा की टेंशन नहीं ली, सिर्फ पूरी तरह से पढ़ाई पर ध्यान दिया।
-सुमेधा अरोड़ा

एमबीए लक्ष्य : ऐश्वर्या

sucess secret of tricity toppers in cbse board

ट्राइसिटी में 12वीं कॉमर्स संकाय में सयुक्त रूप से टॉपर बनी ऐश्वर्या धवन नेट बाल की नेशनल प्लेयर और एनसीसी कैडेट भी हैं। मां अनीता धवन मनीमाजरा (मॉडल टाउन) स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अंग्रेजी की लेक्चरर और पिता जसवंत धवन चाटर्ड अकाउंटेंट हैं। 10वीं क्लास में 10 सीजीपीए हासिल किए थे।

कोट

मैंने कभी ऐसे रिजल्ट की कल्पना नहीं की थी। लेकिन, हमेशा टारगेट पर फोकस रखा। मेरा लक्ष्य एमबीए करना है। रीडिंग और म्यूजिक सुनना इनकी हॉबी है। बेहतर रिजल्ट के लिए उन्होंने परीक्षा के दिनों में खुद को कूल रखा और जमकर मेहनत की, जिसका नतीजा सभी के सामने है।
-ऐश्वर्या धवन, सेक्रेड हार्ट स्कूल-26

नॉन मेडिकल को छोड़ लिया आर्ट्स और बन गई टॉपर

sucess secret of tricity toppers in cbse board

11वीं क्लास की शुरुआत में पहले मैैंने नॉन मेडिकल संकाय ले लिया, लेकिन 16 दिनों बाद ही बड़ा फैसला लेते हुए आर्ट्स में दाखिला ले लिया। आज टॉपर बनने पर खुद के फैसले पर गर्व होता है।

अच्छे कैरियर के लिए उस फील्ड में इंट्रेस्ट होना बहुत जरूरी है। यह कहना है चंडीगढ़ स्थित डीपीएस सेक्टर-40 में 12वीं क्लास में 97.6 फीसदी अंक लेकर ट्राइसिटी टॉपर बनी नेहमत गोंदारा का। नेहमत ने 10वीं में भी 10 सीजीपीए हासिल किए हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका सपना आईएएस बनना है। इनके पिता दलजीत सिंह लुधियाना में एक्साइज इंस्पेक्टर और मां जसनप्रीत कौर हाउस वाइफ हैं। खाली समय में कविताएं लिखना, बॉलीवुड फिल्में और गाने सुनना पसंद हैं।

आर्मी में न्यूरो सर्जन बनकर करूंगी देश की सेवा

sucess secret of tricity toppers in cbse board

बेटी भी पिता की तरह आर्मी में जाकर न्यूरोसर्जन डॉक्टर बनना चाहती है। केवी 3बीआरडी की छात्रा एकता मिश्रा ने 12वीं मेडिकल संकाय के रिजल्ट में 97.6 अंक लेकर ट्राइसिटी में पहला स्थान हासिल किया है।

अमर उजाला टीम से बातचीत में एकता ने बताया कि  उसका लक्ष्य एएफएमसी से एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर डॉक्टर बनना है। 10वीं में भी इन्होंने 10 सीजीपीए हासिल किया है। पढ़ाई के साथ इन्होंने स्कूल स्तर पर कई डिबेट और स्काउट एंड गाइड में राज्यस्तरीय अवार्ड हासिल किया है। सेक्टर-47 के मकान नंबर 1473 में बुधवार को बेटी एकता मिश्रा के टॉपर बनने के बाद भानू प्रकाश मिश्रा के पास बधाइयों का दौर शुरू हो गया।

मूल रुप से उत्तरप्रदेश के जोनपुर निवासी भानू प्रकाश मिश्रा एयर फोर्स में सारजेंट पद पर कार्यरत हैं। एकता ने कहा कि उसने टाइम टेबल बनाकर हर रोज 7 से 8 घंटे रुटीन में पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की है। पिता भानू प्रकाश को अपना रोल मॉडल मानती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed