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बर्खास्त मुन्नाभाईयों को लेकर केजीएमयू सतर्क

Thu, 26 Jun 2014 04:30 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Jun 2014 04:30 AM IST
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Kgmu to be more carefull for MBBS exam

केजीएमयू से बर्खास्त एमबीबीएस छात्रों पर भी इस बार निगाह रहेगी। ये वे छात्र हैं, जिन्होंने फर्जीवाड़ा कर प्रवेश लिया था लेकिन क्रॉस चेकिंग के दौरान इनकी गड़बड़ियां पकड़ में आ गईं थीं।

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ऐसे छात्रो की संख्या 50 के आसपास बताई जा रही है। इनमें से 17 छात्र तो सिर्फ 2009 बैच के ही थे। सीपीएमटी के सुरक्षा चक्र को भेदने में जुटे किसी भी संदिग्ध को इस बार बख्शा नहीं जाएगा।
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शिक्षकों से लेकर बर्खास्त छात्रों तक को सर्विलांस पर लिया जा रहा है। इनकी जानकारी एसटीफ को भी मुहैया कराई जाएगी।

केजीएमयू सूत्रों की मानें तो 2009 और 2012 बैच के मुन्ना भाइयों की जानकारी एकत्र की जाएगी।

जिससे उनकी लोकेशन और कार्यशैली का पता लग सके। इन छात्रों ने सीपीएमटी के सुरक्षा चक्र को लगभग भेद दिया था और एमबीबीएस में प्रवेश भी पा लिया था हालांकि जांच के बाद इन्हें पकड़ लिया गया।
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2009 बैच के एक मुन्ना भाई को एक बेनाम पत्र मिलने के बाद केजीएमयू ने ढूंढ़ निकाला था। इसे भी बाद में बर्खास्त कर दिया गया था।

इनमें से बलिया के दौलतपुर निवासी भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी का बेटा कुणाल कुमार, गोरखपुर के हरपुर निवासी व ट्रेजरी में एक अधिकारी का बेटा कृष्ण प्रताप और आजमगढ़ के मिल्लत नगर निवासी शाह आलम को बर्खास्त किया गया था।

बायोमीट्रिक जांच में कुणाल कुमार, कृष्ण प्रताप और शाह आलम के फिंगर प्रिंट व फोटो नहीं मिले थे। शक होने पर कई बार उनकी जांच कराई गई।

तीनों छात्र जांच मशीन खराब होने की बात कहकर जांच अधिकारी को गुमराह कर रहे थे। कई बार की जांच में भी उनकी फोटो व फिंगर प्रिंट गलत पाए गए। इसके बाद उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया।


जहां सभी ने सॉल्वर के सहारे सीपीएमटी पास करने की बात कबूल की थी। सीपीएमटी-2012 काउंसलिंग में भी तीन मुन्ना भाई पकड़े गए।

इनमें से एक लड़की भी थी लेकिन पूछताछ के दौरान वो मौका पाकर वहां से भाग निकली थी। तीनों ने अनुसूचित जाति और जनजाति का प्रमाण पत्र फर्जी लगाया था।

एसजीपीजीआई टेलीमेडिसिन सेंटर पर काउंसलिग के दौरान गोरखपुर के शुभम नायक और गाजीपुर की श्वेता सिंह खरवार को पकड़ा गया था।

इस दौरान श्वेता सिंह खरवार मौका पाकर फरार हो गई, जबकि शुभम नायक और शक्ति कुमार को फर्जी तरीके से परीक्षा में शामिल होने की पुष्टि होने के बाद पकड़ा गया था।

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