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एचपीयू से निष्कासित छात्रों का भविष्य अधर में

Thu, 27 Nov 2014 12:33 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 12:33 PM IST
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Students expelled from himachal pradesh university.

विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली। सितंबर माह में कॉलेज में हुए बवाल के दौरान सात छात्रों को निष्कासित कर दिया था। इनमें से पांच छात्र अभी भी जेल में हैं।

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एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने विवि से निष्कासित किए छात्रों को पीजी की वीरवार से शुरू हो रही परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग कुलपति से की है।
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इकाई का आरोप है कि छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति न दे कर प्रशासन छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार को छीन रहा है। छात्रों ने बाकायदा चार दिन पूर्व ही विवि प्रशासन से परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी है, बावजूद इसके अभी तक इस पर फैसला नहीं लिया है।

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साल बर्बाद हो जाएगा छात्रों का

Students expelled from himachal pradesh university.

अनुमति न देकर प्रशासन छात्रों का परीक्षा देने का मौका छीन रहा है और उनका कर रहा है। इकाई अध्यक्ष राहुल चौहान ने कहा कि एक ओर इग्नू जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुक्त विश्वविद्यालय कैदियों को शिक्षित करने के लिए जेलों तक में परीक्षा केंद्र और स्टडी सेंटर स्थापित कर रहा है, वहीं दूसरी और एचपीयू विवि से निष्कासित छात्रों से उनका यह अधिकार छीन रहा है। इससे जाहिर है कि विवि प्रशासन उच्च शिक्षा के प्रचार-प्रसार और युवाओं को शिक्षित करने के लिए कितना संवेदनशील है।

उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन छात्रों पर झूठे आरोप लगाकर पहले उन्हें निष्कासित करता है, उसके बाद उनसे परीक्षा देने का मौका भी छीन रहा। उन्होंने कहा किप्रशासन अपने गलत फैसलों के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने की मंशा से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। राहुल चौहान और सचिव विपिन शर्मा ने कहा कि यदि जल्द इन छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी तो आंदोलन किया जाएगा।

उधर विवि के जनसंपर्क अधिकारी डा. रणवीर वर्मा ने कहा कि डीएस के माध्यम से मामला आया है। इस पर कुलपति ही फैसला देंगे। छात्रों ने एग्जाम देने को लेकर विवि प्रशासन से अनुमति मांग रखी है। अनुमति मिलते ही छात्रों को अवगत करवा दिया जाएगा।

कुलसचिव के बचाव में उतरे विवि के कुलपति

Students expelled from himachal pradesh university.

विश्वविद्यालय के कुलसचिव पर एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान आईआईएचएस में पूर्व में कार्यरत शोध अधिकारी कुलदीप सिंह के आरोपों को कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह कुलसचिव की छवि खराब करने की कोशिश है। इस षड्यंत्र को रचने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश विश्वविद्यालय के निलंबित शोध अधिकारी कुलदीप सिंह द्वारा बालूगंज थाना में एट्रोसिटी एक्ट के तहत कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाना निंदनीय है। यह उनकी ईमानदार छवि को बदनाम करने की साजिश है। उनके ऊपर लगाए जातिसूचक शब्दों के प्रयोग के आरोप आधारहीन है। उन्होंने कहा कि उक्त (एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान) के शोध अधिकारी कुलदीप सिंह को सितंबर, 2014 में कुलपति की गाड़ी को टक्कर मारने के आरोप में 22 नवंबर को कुलपति के निर्देशानुसार ही निलंबित किया है।

कुलसचिव पर लगे सभी आरोप निराधार हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इस विषय  पर गहनता से विचार एवं पूर्ण छानबीन करने के बाद कुलसचिव की छवि और उनकी प्रतिष्ठता को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। कहा कि यह सभी षड्यंत्र कुलसचिव की कर्मठता, प्रतिष्ठता तथा ईमानदार छवि को बदनाम करने की कोशिश है।

कुलसचिव को भी मिले पक्ष रखने का मौका: प्रो. रघुविंद्र

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प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा पर आईआईएचएस के पूर्व शोध अधिकारी के लगाए गए आरोपों के मामले पर एचपीयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. रघुविंद्र सिंह और सचिव प्रो. अमरजीत सिंह ने जांच बिठाने की मांग की है। इन शिक्षक नेताओं ने कहा कि विवि प्रशासन अपने स्तर पर इस पूरे मामले पर जांच बिठाए और कुलसचिव को अपना पक्ष रखने का मौका दे। उन्होंने प्रशासन से विवि में उठे इस मामले को अपने स्तर पर सुलझाने की मांग भी की है।

एसएसपी भजनदेव नेगी करेंगे मामले की जांच
प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा पर आईआईएचएस के शोध अधिकारी की शिकायत पद पुलिस में दर्ज मामले की जांच एएसपी को सौंपी दी है। एसएसपी शिमला भजन देव नेगी अब शोध अधिकारी के शिकायत में लगाए गए तमाम आरोपों के आधार पर जांच करेंगे। मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार से इसकी जांच भी शुरू कर दी है।

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