फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   student union election in delhi university

डीयू: लाज बचाने उतरे दिग्गज कांग्रेसी

Thu, 07 Aug 2014 01:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 07 Aug 2014 01:57 PM IST
विज्ञापन
student union election in delhi university

12 सितंबर को होने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ को चुनाव जीतकर कांग्रेस माहौल बनाना चाहती है। एमसीडी, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हुई बुरी गत से पार पाने के लिए पुराने दिग्गजों को मैदान में उतारने का फैसला किया है।

विज्ञापन


डीयू छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी, एनएसयूआई, युवक कांग्रेस के नेताओं के साथ रणनीति बनाकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ऑस्कर फर्नांडिस, प्रभारी डॉ. शकील अहमद और प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने हर एक वोट पर झपट्टा मारने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


दिल्ली यूनिवर्सिटी की नई जंग 3 सितंबर से
विज्ञापन
विज्ञापन


कांग्रेस के आला नेताओं ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद उत्तराखंड के उप चुनाव में तीनों सीटें जीते जिसका भाजपा के खिलाफ संदेश गया। अब डूसू चुनाव में एनएसयूआई को जीत दिलाकर माहौल बदलने का संदेश दिया जा सकता है। चुनाव के परिणाम हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव पर असर डालेंगे।

अपने-अपने स्तर पर कॉलेज छांटकर जिम्मेदारी संभालें जो जिस कॉलेज से जुड़ा रहा है, उसमें दाखिल नए छात्र और पुराने के साथ संपर्क बनाएं। दिल्ली छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रोहित चौधरी, अमित मलिक, रागिनी नायक, अमृता धवन, अरुण हुड्डा के अलावा छात्र राजनीति में सक्रिय रहे अनिल भारद्वाज, इंद्रजीत, लक्ष्मण रावत, कमलकांत शर्मा, कपिल नागर, सीपी मित्तल समेत तमाम नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।


डीयू कुलपति पर फिर लगा आरोप


इन सभी से कहा गया है कि चाहे जिसे भी टिकट मिले जीत दिलाएं। डीयू छात्र संघ के एक पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस की विचारधारा रखने वाले शिक्षकों से भी संपर्क करके छात्रों को पक्ष में करना है।

छात्रसंघ चुनाव में 51 कॉलेज शामिल होते हैं। यही वजह है कि 1988 के बाद के सभी डूसू, एनएसयूआई व युवक कांग्रेस से जुड़े नेताओं को जिम्मेदारी देकर कांग्रेस कब्जा जमाना चाहती है। पिछले डूसू चुपाव में एनएसयूआई को सिर्फ एक सीट मिली थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed