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कॉलेज के 'नेताओं' के आगे प्रशासन ने किए आंख बंद
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून
Updated Sun, 25 Aug 2013 04:53 PM IST
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राजधानी देहरादून के पीजी कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव का मतलब किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं है। चुनावों की पोस्टरबाजी पूरे शहर में आम हो चुकी है। जिला प्रशासन की आंखों के सामने ही तमाम सरकारी संपत्तियों पर छात्र नेताओं ने अपने पोस्ट चिपका दिए हैं।
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शहर की सूरत बिगड़ रही है, बावजूद इसके प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है। दून के कॉलेजों में छात्र संघ चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। डीएवी कॉलेज का चुनावी रंग सबसे ज्यादा शहर की दीवारों पर देखने को मिल रहा है।
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सरकारी संपत्तियों पर पोस्टर न चिपकाने के नियम के बावजूद शहर की सड़कों पर पोस्टरबाजी खूब की जा रही है। हालांकि जिला प्रशासन चाहे तो कॉलेज प्राचार्य और छात्रों को इस बाबत नोटिस जारी कर कार्रवाई कर सकता है लेकिन अभी तक प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली है।
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पोस्टर बाजी पर डीएवी कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि हम केवल अपने कॉलेज परिसर की ही जिम्मेदारी ले सकते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि कॉलेज प्रशासन की सख्ती का ही असर है कि कॉलेज में कहीं भी पोस्टरबाजी नजर नहीं आ रही है लेकिन जिला प्रशासन शहर की पोस्टरबाजी पर खामोश है।
हो सकती है एफआईआर
उत्तरांचल संपत्ति निरूपण अधिनियम के तहत अगर किसी सरकारी संपत्ति पर पोस्टरबाजी की जाती है तो डीएम को पूरा अधिकार है कि वह ऐसी एजेंसी या प्रत्याशी के खिलाफ एफआईआर करा सकता है। प्रथम बार दोषी पाने पर इस अधिनियम के तहत दोषी पर दस हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। विशेष बात यह है कि यदि किसी की निजी संपत्ति पर भी पोस्टरबाजी की जाती है तो संपत्ति का मालिक भी इस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करा सकता है।
पहले उठाया कदम रहा कामयाब
दो साल पहले तक शहर में छात्र संघ चुनावों के समय छात्र नेता अपना शक्ति प्रदर्शन करने के लिए शहर की सड़कों पर बाइक रैली निकालते थे। कई प्रत्याशियों की बाइक रैली एक-एक किलोमीटर तक होती थी, इसकी वजह से पूरा शहर जाम हो जाता था। पुलिस प्रशासन ने इस पर सख्ती करनी शुरू की तो आज एक भी प्रत्याशी शहर में अपनी बाइक रैली नहीं निकालता है। शहर की पोस्टरबाजी में भी ऐसा ही कदम उठाने की आवश्यकता है।
उत्तरांचल संपत्ति निरूपण अधिनियम के तहत शासन प्रशासन को शहर की बिगड़ती सूरत पर लगाम लगाने की जरूरत है। एक कॉलेज के चुनाव से पूरे शहर में पोस्टरबाजी गलत है। जिला प्रशासन को इसके खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए छात्रों या पोस्टर लगाने वाली एजेंसी के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
-चंद्रशेखर तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सदस्य बार काउंसिल