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डीएवी छात्रसंघ चुनावः 77% छात्रों ने नहीं डाला वोट
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 14 Sep 2014 10:17 AM IST
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देहरादून के डीएवी कॉलेज का चुनावी महासंग्राम इस बार वोटरों को रिझा नहीं पाया। कॉलेज में गत वर्ष की तुलना में काफी कम पोलिंग हुई। कुल 17,674 मतदाताओं में से सिर्फ 4015 ने वोट डाला।
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होनहारों की चुनाव के प्रति बेरुखी
मतदान प्रतिशत केवल 22.71 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल 28.46 प्रतिशत मतदान हुआ था। कम वोटिंग के पीछे चुनाव पर तीन दिन की रोक और मेरिट से दाखिला पाए होनहारों की चुनाव के प्रति बेरुखी को अहम वजह बताया जा रहा है।
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अब कॉलेज में 15 सितंबर को सुबह नौ बजे मतगणना होगी। डीएवी कॉलेज में 21 प्रत्याशियों के लिए शनिवार को छात्रसंघ चुनाव हुआ। मतदान नौ बजे शुरू होना था लेकिन ड्यूटी देने वाले शिक्षकों के देरी से पहुंचने की वजह से मतदान में 45 मिनट का विलंब हुआ।
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मतदान 9:45 बजे शुरू हुआ। छात्र-छात्राओं में चुनाव के लिए उत्साह नजर नहीं आया। दोपहर करीब 12:30 बजे तक दस प्रतिशत मतदान होने से छात्र नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें आ गईं। ढाई बजे तक करीब 19 प्रतिशत मतदान हुआ। 3:45 बजे गेट बंद कर दिया गया।
मतदान के दौरान कई बार छात्रों के बीच हल्की बहस भी हुई। चुनाव में 1300 छात्राओं और 2715 छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट जीसी गुणवंत ने मतपेटियां स्ट्रांग रूम में सील कर दीं। इस दौरान कालेज प्राचार्य देवेंद्र भसीन, अन्य अधिकारी व शिक्षक मौजूद रहे।
पिछले साल बना था वोटिंग का रिकार्ड
छह साल तक सात हजार से कम वोटिंग के बाद गत वर्ष कॉलेज में 7027 वोट पड़े थे। इसे एक नए रिकॉर्ड के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन इस बार यह संख्या सिमटकर 4015 रह गई है। मतदान के दौरान डीएवी कॉलेज रोड पर स्थित बाजार सन्नाटे से छाया रहा।
चुनाव के मद्देनजर किसी भी प्रकार के हुड़दंग से बचने के लिए दुकानदारों ने दुकानें बंद रखी। जो दुकान खुली थीं, उनमें ग्राहकों की भीड़ नजर नहीं आई। दोपहर तीन बजे चुनाव समाप्त होने के बाद चार बजे से दुकानें खुलनी शुरू हुई।
सड़क बनी इलेक्शन कॉरिडोर
डीएवी कॉलेज के बाहर की सड़क को छात्र नेताओं ने इलेक्शन कॉरिडोर बना दिया था। आसपास की दुकानों से लेकर दीवारों और सड़क के ऊपर पोस्टर, झंडिया और फ्लैक्स पर जिला प्रशासन ने भी सख्त रुख दिखाया। छात्र नेताओं ने कॉलेज के गेट के सामने स्थित दुकानों पर अपने बड़े-बड़े बैनर लगा रखे थे।
राजनीति को होनहारों की ‘ना’
कालेज में इस बार मेरिट से दाखिलों का असर छात्र संघ चुनाव पर भी नजर आया। छात्र संगठन होनहारों को पोलिंग बूथ तक खींचने में नाकाम रहे। प्रचार के दौरान भी प्रथम वर्ष के छात्र संगठनों के लिए मुसीबत बने हुए थे, क्योंकि ऐसे छात्र अक्सर कोचिंग में होते थे।
डीएवी में बीए, बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष के दाखिले मेरिट से हुए। इस वजह से मेरिटोरियस छात्रों को दाखिले का मौका मिल पाया। प्रचार से लेकर मतदान के दिन तक छात्र संगठन प्रथम वर्ष के छात्रों को लुभा नहीं पाए। जिन प्रथम वर्ष वाले बूथों पर बैलेट भेजे गए थे, वहां से भारी संख्या में खाली आ गए।
छात्रा जोन में बीकॉम प्रथम वर्ष के बूथ पर पहली बार में 486 बैलेट भेजे गए थे, लेकिन यहां केवल 110 छात्राएं ही वोट डालने पहुंचीं। बीए प्रथम के लिए 319 बैलेट भेजे गए, लेकिन यहां केवल 59 छात्राओं ने मताधिकार का प्रयोग किया।
बीएससी पीसीएम, पीएमएस और ईएमएस प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए 693 बैलेट पेपर पहली बार भेजे गए, जिनमें से केवल 167 छात्राओं ने ही मताधिकार का प्रयोग किया। बीएड, एलएलबी, मास कम्यूनिकेशन की छात्राओं के लिए 604 बैलेट में से केवल 76 पर ही वोट डले।
छात्रों के लिए बीए में 380 बैलेट पेपर में से सिर्फ 119 पर वोट पड़े। बीएससी प्रथम पीसीएम में भी 178 बैलेट पेपर में से सिर्फ 56 पर वोट पड़े। एलएलबी पांचवें सेमेस्टर के छात्र सत्र विलंब से होने की वजह से अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए।
राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद तीन दिन की चुनाव पर लगी रोक भी कम मतदान की वजह रही है। हम इसका विरोध करते रहेंगे।
- आदित्य चौहान, वरिष्ठ छात्र नेता, एबीवीपी
कम मतदान की प्रमुख वजह प्रथम वर्ष में देरी से और मेरिट से एडमिशन हैं। इस वजह से प्रथम वर्ष में गत वर्ष की तुलना में करीब पांच हजार कम दाखिले हुए हैं।
- कुलदीप कुमार, वरिष्ठ छात्र नेता, एनएसयूआई
डीएवी छात्र संघ चुनाव
वर्ष-2013
कुल वोटर : 24693
कुल पड़े वोट : 7027
प्रतिशत : 28.45
वर्ष-2014
कुल वोटर : 17674
कुल पड़े वोट : 4015
प्रतिशत : 22.71