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JNU प्रकरण के बाद देश के अन्य वामपंथी छात्र निशाने पर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:35 PM IST
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) प्रकरण के बाद से देहरादून में वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) दूसरे संगठनों के निशाने पर है।
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कुछ दिन पहले एसएफआई के दफ्तर में तोड़फोड़ के बाद बुधवार को आर्यन छात्र संगठन ने एसएफआई के एक आयोजन से संबंधित फ्लैक्स फाड़कर जला दिए। आहत एसएफआई ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए आर्यन संगठन को बिना विचारधारा का संगठन करार दिया है।
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एसएफआई की ओर से 26 फरवरी को डीएवी कॉलेज में एक आयोजन किया जाना था। महिला सशक्तीकरण पर आधारित इस आयोजन के कॉलेज में फ्लैक्स लगाए गए थे। बुधवार को आर्यन संगठन की ओर से डीएवी के छात्रसंघ महासचिव सचिन थपलियाल, पूर्व महासचिव भगवती प्रसाद ने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पहले एसएफआई के सभी फ्लैक्स उतारे, फाड़े और इसके बाद आग के हवाले कर दिए।
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आर्यन संगठन का आरोप था कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से ही एसएफआई जैसे संगठन युवाओं को उकसाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि देश विरोधी नारों का समर्थन करने वाले छात्र संगठनों को डीएवी में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एबीवीपी ने भी इसके बाद डीएवी कॉलेज प्राचार्य को ज्ञापन देते हुए चेतावनी दी कि अगर एसएफआई का कोई कार्यक्रम हुआ तो वह उग्र आंदोलन करेंगे।
दूसरी ओर, एसएफआई ने आर्यन संगठन की हरकत को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह संगठन बिना विचारधारा वाला है। एसएफआई के राज्य सचिव देवेंद्र सिंह रावल का कहना है कि एसएफआई ने ही कॉलेज परिसर में शहीद स्मारक की स्थापना की थी। दूसरे संगठन अपने फायदे के लिए औछी राजनीति कर रहे हैं।
संगठन के जिला सचिव राजेश चौहान का कहना है कि हम केवल महिला सशक्तीकरण के तहत कॉलेज में जेंडर सेंसेटाइजेशन एंगेंस्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी बनवाना चाहते हैं, जोकि अन्य संगठनों को पच नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को विरोध करना है तो लोकतांत्रिक तरीके से करें, हिंसा से नहीं।