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तकनीक की किरण दे रही चेहरों पर मुस्कान

Tue, 31 Dec 2013 02:07 AM IST
शैलेष अरोड़ा/ अमर उजाला, लखनऊ
शैलेष अरोड़ा/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 31 Dec 2013 02:07 AM IST
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student giving education to slum children

कॉपी-किताब से दूर, मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों को तकनीक की किरण एक नई मुस्कान दे रही है।

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राजधानी के विभिन्न कॉलेजों, विवि में पढ़ने वाले छात्रों के ग्रुप ‘स्लम समवर्धन’ ने जब बस्तियों में जाकर लैपटॉप से पढ़ाना शुरू किया तो पढ़ाई के प्रति बच्चों में अजब सा आकर्षण दिखाई दिया।

आज हालात यह हैं कि जिन बच्चों को पढ़ाई के लिए मनाकर लाना पड़ता था, वे आज खुद ही अपने टीचर के न आने की बात सुनकर भी परेशान हो जाते हैं।

जिन्होंने कभी स्कूल की दहलीज पर कदम नहीं रखा, वो आज बहुत ही तेजी से लैपटॉप पर गिनती, वर्णमाला सीख रहे हैं।

लगभग एक महीने पहले गोमतीनगर में डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल के पास स्थित एक मलिन बस्ती में शुरू किए गए प्रयास का स्टूडेंट्स को काफी अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
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स्टूडेंट्स के ग्रुप में नेशनल पीजी कॉलेज, इग्नू, नगर निगम डिग्री कॉलेज, एमिटी यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग कॉलेज सहित कुछ अन्य संस्थानों के स्टूडेंट्स शामिल हैं।
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ई-बुक्स में पढ़ते हैं कहानियां
जो कहानियां बच्चों को प्राथमिक कक्षाओं की किताबों में पढ़ाई जाती हैं, उसी तरह की कहानियों के ई-वर्जन लैपटॉप पर डाउनलोड करके बस्ती में इन बच्चों को पढ़ाए जा रहे हैं।

इसके अलावा विभिन्न कहानियों पर बनी एनिमेशन फिल्मों का प्रयोग भी इसमें किया जाता है। अंग्रेजी और हिंदी वर्णमाला को भी किताब केसाथ ही लैपटॉप से भी सिखाया जा रहा है।

जब बच्चे एल्फाबेड की स्लाइड बदलते देखते हैं तो उनके चेहरे की खुशी देखने लायक होती है। कुछ ही दिन में ये बच्चे काफी कुछ सीख चुके हैं। बल्कि कुछ बच्चे तो कविताएं भी सुनाने लगे हैं।

नैतिक शिक्षा देने का भी प्रयास
बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए बना स्टूडेंट्स का यह ग्रुप अब उनको नैतिक शिक्षा देने का भी प्रयास कर रहा है। यह लोग बच्चों को बात करने का तरीका सिखाने के साथ ही मसाला, गुटका आदि नशे की चीजों से दूर रहने के लिए भी कहते हैं।

इसके लिए यह बच्चों में विभिन्न तरीकों से इन नशे की चीजों के प्रति डर पैदा करते हैं। अपने बच्चों को पढ़ते और अच्छी बातें सीखता देखकर उनके अभिभावक भी काफी खुश हैं।

अब तो ग्रुप के स्टूडेंट्स जैसे ही बस्ती में पढ़ाने के लिए पहुंचते हैं वहां लोग अपने बच्चों को आवाज देकर बुलाते हैं कि टीचर जी आ गए।

बच्चों का पढ़ाई में रुझान बनाए रखने और चीजों को जल्दी सीखने के लिए प्रेरित करने के लिए यह लोग बच्चों को टॉफी और खिलौने भी देते हैं।

इग्नू से एमएसडब्लू कर रही प्रियंका ने बताया कि जब हम लोग बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाने की शुरूआत करते थे तो सबसे बड़ी समस्या उनका ध्यान पढ़ाई में लगाने की थी।

हायर एजूकेशन में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स कम्प्यूटर पर पढ़ाई करना पसंद करते हैं तो जिन बच्चों ने कभी लैपटॉप नहीं देखा उनका ध्यान तो अपने आप ही लगेगा। यही सोचकर प्रयोग किया था जो सफल हो रहा है।

नेशनल पीजी कॉलेज के सर्वेश मिश्रा ने बताया कि प्रयोग के तौर पर हमने गोमतीनगर की एक बस्ती में लैपटॉप से पढ़ाना शुरू किया है लेकिन रिस्पांस अच्छा मिल रहा है।

दूसरे शहरों से आकर लखनऊ में पढ़ रहे हमारे साथ के कुछ स्टूडेंट्स छुट्टियों में अपने घर गए हुए हैं। जनवरी में उनके आने के बाद हम अन्य क्षेत्रों की बस्तियों में भी इस तरह से पढ़ाना शुरू करेंगे।

नगर निगम डिग्री कॉलेज के नितेश कुमार राय ने बताया कि बच्चों में लैपटॉप पर पढ़ाई करने का इतना क्रेज है कि उनको डांटने की नौबत नहीं आती।

अगर कोई बच्चा क्लास के टाइम लापरवाही करता दिखता है तो सिर्फ इतना कहते हैं कि हम अब वहां नहीं आएंगे। इसके बाद वह खुद ही माफी मांगकर पढ़ने लगता है और कहता है कि आप लोग रोज आना हम परेशान नहीं करेंगे।


एमएसडब्लू की कल्याणी नपे बताया कि मलिन बस्तियों में अभी बहुत खराब हालात हैं। वहां सबसे पहले तो बच्चों को पढ़ाई का महत्व बताना पड़ता है। फिर उनको पढ़ने के लिए रोकना और अच्छा करने के लिए प्रेरित करना।

इन लोगों को हम लालच देते हैं कि जो किसी चीज को जल्दी समझ कर सुनाएगा उसे चॉकलेट या खिलौना दिया जाएगा। बस इसी से वह पढ़ने लगते हैं।

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