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...तो अच्छे टीचर जी बन गए विलेन!

Wed, 12 Feb 2014 09:33 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 12 Feb 2014 09:33 AM IST
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student feedback get adverse result

डॉ. राममनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में टीचर्स के फीडबैक बैक फॉर्म भरवाए गए तो उसमें स्टूडेंट्स की गड़बड़ी उजागर हुई। यहां पर स्टूडेंट्स ने अच्छी छवि और रेग्युलर क्लास लेने वाले टीचर्स को कम नंबर दे दिए।

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जब फीडबैक फॉर्म की पड़ताल की गई तो पाया गया कि यह शिक्षक सख्ती करते थे इसलिए स्टूडेंट्स ने ऐसा किया। वहीं, औसत शिक्षकों को ज्यादा नंबर दे दिए। ऐसे में फीडबैक सिस्टम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय के आर्ट्स कॉलेज में छात्रा ललिता धीमान को प्रोफेसर नीता कुमार ने फीडबैक फॉर्म में कम नंबर देने पर हड़काया। छात्रा का आरोप है कि उसे टीचर ने कम नंबर देने पर फेल करने की धमकी दी।
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फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्राचार्य पी राजीव नयन ने आरोपी शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी कर दी है। अब इस मामले की जांच करवायी जा रही है।

एलयू के कुलपति डॉ. एसबी निमसे के सामने यह मामला रखा जाएगा। इसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। क्लास रूम में एक टीचर की परफॉर्मेंस कैसी है, इसके बारे में स्टूडेंट्स क्या सोचते हैं।

ये राय लेने के लिए फीडबैक सिस्टम शुरू किया गया लेकिन ये दो उदाहरण बताने के लिए काफी हैं कि किस तरह से छात्रों और शिक्षकों की अदूरदर्शिता के चलते एक अच्छी योजना दम तोड़ रही है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने टीचर्स के प्रमोशन में 10 नंबर फीडबैक के भी शामिल किए हैं। स्टूडेंट्स से फीडबैक फॉर्म भरवाकर उन्हें वेबसाइट पर ऑनलाइन भी करना है।

फिलहाल, पहले ही स्टेप पर इस व्यवस्था को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। फीडबैक फॉर्म में स्टूडेंट्स का नाम गोपनीय रखा जाए। इस पर लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह संभव नहीं है।

क्योंकि  नाम न होने पर कोई भी विभागाध्यक्ष अपने स्तर पर मनगढंत रिपोर्ट भी लिखवा सकता है। अगर नाम होगा तो सबूत रहेगा कि इस छात्र या छात्रा ने कम नंबर दिए और उसे बुलाकर पूछा भी जा सकता है।

वहीं, इस पूरे मामले पर एलयू के बीए द्वितीय वर्ष के छात्र अंकुर कुमार कहते हैं कि फीडबैक फॉर्म हमसे भरवाया जाए, तो हमें कोई नुकसान न हो, इसकी भी व्यवस्था होनी चाहिए।


बीएससी की छात्रा दीपिका सिंह कहती हैं कि नाम गोपनीय रखा जाए तो अच्छा होगा। एलयू एक अलग सेल बनाकर हमसे फॉर्म भरवाए तो अच्छा रहेगा।

वहीं, डिग्री कॉलेजों में शिक्षक समस्याएं गिनाते हैं, उनका कहना है कि न तो मूलभूत सुविधाएं हैं और न ही शिक्षक हैं।

कॉलेजों में 51 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं और स्नातक में कुल सीटों के मुकाबले हर बार 33 प्रतिशत बढ़ोतरी कर दाखिले लिए जाते हैं। ऐसे में भला फीडबैक किस तरह लिया जा सकता है।

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