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एक मार्क्सशीट नहीं चली तो दूसरी ले आया
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 21 Jun 2014 04:36 AM IST
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नेशनल पीजी कॉलेज में शुक्रवार को हुई बीकॉम की प्रवेश परीक्षा में एक फ्रॉड सामने आया। एक छात्र ने 2014 में ही सीबीएसई और यूपी बोर्ड दोनों से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।
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वर्ष 2013 में किसी व्यक्ति ने उससे 3,000 रुपये लेकर यूपी बोर्ड में इंटरमीडिएट की मार्क्सशीट दिलवा दी, जबकि वह इसी वर्ष सीबीएसई से पढ़ाई कर रहा था।
कॉलेज के सामने मामला आने पर कॉलेज प्रशासन ने पुलिस बुलाने की बात कही तो छात्र रोने लगा, इस पर उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
मऊ से परीक्षा में शामिल होने पहुंचे विनोद (बदला हुआ नाम) का जब एप्लीकेशन फॉर्म केंद्र पर चेक किया गया तो उसमें इंटरमीडिएट के अंक सीबीएसई से मात्र 46.40 फीसदी थे।
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इस पर प्रवेश समन्वयक डॉ. राकेश जैन ने विनोद से कहा कि इतने कम अंक पर यहां प्रवेश नहीं हो सकता।
यह सुनते ही विनोद ने जवाब दिया कि उसके पास इससे अधिक अंक की मार्क्सशीट भी है।
जिसे सुनकर डॉ. राकेश सहित वहां मौजूद अन्य शिक्षक सन्न रह गए। उन्होंने तुरंत छात्र को दूसरी मार्क्सशीट लाने को कहा। विनोद 15 मिनट के अंदर एक अन्य अंकपत्र लाया।
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जिसमें उसने यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट की परीक्षा 55.8 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की।
इसमें चौंकाने वाली बात ये रही कि दोनों ही बोर्ड से इंटरमीडिएट की परीक्षा 2014 में ही पास की गई थी।
इसके बाद विनोद को तुरंत प्रिंसिपल डॉ. एसपी सिंह के पास ले जाया गया।
जब डॉ. एसपी सिंह ने उससे सख्ती से पूछा कि एक ही सत्र में अलग-अलग बोर्ड की दो मार्क्सशीट कहां से आई तो उसने पूरी कहानी बतानी शुरू की।
विनोद ने बताया कि उसने 2012 में मऊ के सीबीएसई से संचालित एक विद्यालय में 11वीं कक्षा में प्रवेश लिया था लेकिन उसके अंक सही नहीं आ रहे थे।
नवंबर, 2013 में विनोद के एक दोस्त ने उसको बताया कि वह एक ऐसे व्यक्ति को जानता है, जो 3000 रुपये में उसको यूपी बोर्ड से अच्छे अंकों से 12वीं पास करा देगा।
विनोद ने उसकी बात मानकर पैसा दिया और उसका न सिर्फ सीधे 12वीं में प्रवेश हुआ बल्कि परीक्षा देकर उत्तीर्ण भी
हुआ।
पूरा प्रकरण जानने के बाद जब डॉ. एसपी सिंह ने पुलिस बुलाने की बात कही तो विनोद रोने लगा।
अंत में उसकी दोनों मार्क्सशीट की फोटोकॉपी लेकर उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।