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प्रदेश विश्वविद्यालय की सोमवार से शुरू हुईं पीजी की परीक्षाओं में छात्रों को रोलनंबर नहीं मिल पाए हैं। अर्थशास्त्र, राजनीतिक शास्त्र सहित कई विभागों के छात्रों को रोलनंबर न मिलने और परीक्षा केंद्र खोजने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदेश भर के स्थापित अन्य केंद्रों में भी ऐसी ही अव्यवस्था नजर आई। इस पर विवि प्रशासन ने छात्रों से रोलनंबर लेने को ली जाने वाली दो सौ रुपये फीस न लेने का फैसलालिया है।
विवि ने अपनी खामियां छुपाने के लिए छात्रों को ऑनलाइन उपलब्ध करवाई गई कट लिस्ट में नाम होने पर सीधे आईकार्ड दिखाकर परीक्षा में बैठने की छूट दी है। विवि अब तक डुप्लीकेट रोलनंबर लेने को छात्रों से दो सौ रुपये चार्ज कर रहा था। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल ने छात्रों को पेश आ रही समस्याओं को देखते हुए फीस न लेने का निर्णय लिया है और इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी है।
उन्होंने कहा कि कट लिस्ट में नाम होने पर छात्र को परीक्षा केंद्र में आईकार्ड दिखाकर परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी जाएगी। इसकी एवज में छात्रों से कोई फीस चार्ज नहीं की जाएगी।
स्ट्रे केस में बैठने पर देनी होगी फीस
परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल ने कहा कि जिन छात्रों के कट लिस्ट में नाम नहीं हैं, उन्हें परीक्षा फीस की रसीद दिखाकर स्ट्रे केस में परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए परीक्षा केंद्र में तय स्ट्रे केस की फीस अदा करने पर ही छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी।
एचपीयू में अब इस पॉलिसी से होंगे तबादले
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अब कर्मचारी एक ही विभाग से सेवानिवृत्त नहीं होगा। चतुर्थ श्रेणी से लेकर उपकुलसचिव के पद तक के अधिकारियों के लिए अलग से ट्रांसफर पॉलिसी बन गई है। इसे 29 नवंबर को हुई ईसी की बैठक में पेश किया जा चुका है। अब इस पर कर्मचारी संगठनों की राय ली जा रही है। अगली ईसी की बैठक में इसे मंजूरी मिल जाएगी।
विवि की इस इंटर डिपार्टमेंट और इंटर सेक्शन स्थानांतरण में प्रशासन की मनमानी नहीं चलेगी। कर्मचारी एक ही सीट पर सालों सेवाएं देने के लिए मजबूर नहीं होगा। पॉलिसी के तहत विवि की सबसे संवेदनशील परीक्षा विंग की शाखाओं में कर्मचारी तीन साल से अधिक सेवाएं नहीं देगा। उन्हें बराबर दूसरे विभागों में बदला जाएगा। पॉलिसी के लागू होने से विवि की तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।
विवि कर्मचारी संगठनों की मांग पर ही ईसी ने पॉलिसी बनाने को अलग से कमेटी गठित की थी। विवि में अब तक ऐसी कोई अंतर विभाग, अंतर अनुभाग और शाखा तबादला पॉलिसी नहीं थी। कुछ कर्मचारियों को एक ही साल के भीतर सीटों से बदल दिया जाता था वहीं कुछ कर्मी सालों से एक ही विभाग में लगातार सेवाएं दे रहे थे।
न्यूनतम तीन और अधिकतम पांच साल तक तैनाती
नई पॉलिसी में हर कर्मचारी के लिए न्यूनतम तीन साल और अधिकतम पांच साल तक ही एक सीट पर तैनाती की जा सकेगी। संवेदनशील सीटों और शाखाओं के लिए इसमें तबादले की समय सीमा तक तय की है।
यह थे कमेटी के सदस्य
तबादला नीति बनाने के लिए ईसी के आदेशों पर गठित कमेटी में कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा, अधिष्ठाता अध्ययन, डीआर प्रशासन, तत्कालीन ईसी सदस्य चौधरी वरयाम सिंह बैंस और कोर्ट सदस्य तेजराम शर्मा शामिल थे। कमेटी ने इस पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया है। उप कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा ने माना कि इस पॉलिसी के तैयार प्रारूप पर कर्मचारी संगठनों की रॉय लेकर इसे फिर से ईसी में अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाना है।
ये होंगे पॉलिसी के लाभ
सालों तक एक ही पद पर सेवाएं देने को मजबूर नहीं होगा कर्मचारी/अधिकारी
हर शाखा के कार्य में सुधार की उम्मीद
कर्मियों की कार्यकुशलता में सुधार
प्रशासन तबादले करने में नहीं कर पाएगा मनमानी
परीक्षा विंग जैसे विभागों में कर्मचारियों के बदले जाने से फर्जीवाड़े की संभावनाएं कम होंगी
चतुर्थ, श्रेणी से लेकर तकनीकी स्टाफ
अधिकारियों के तबादलों में आएगी एकरूपता
जहां रिश्तेदार देगा एग्जाम, वहां ड्यूटी नहीं
विवि जेसीसी के अध्यक्ष और गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डा. हितेश्वर ठाकुर ने प्रशासन को इस नीति को परीक्षा शाखाओं से लागू करने की शुरुआत करने के साथ, एग्जाम, सिक्रेसी, इवेल्यूएशन, रिवेल्यूएशन जैसी शाखाओं में कार्य कर रहे कर्मियों से अंडर टेकिंग लेने का सुझाव दिया है। इसमें यह तय करने को कहा है कि वे लिखकर दें कि उनका अपना कोई रिश्तेदार परीक्षा नहीं दे रहा जहां वे ड्यूटी पर जा रहे हैं।
यहां अब बिना गेट पास के नहीं होगी एंट्री
विवि के प्रशासनिक भवन और परीक्षा विंग ब्लॉक में सचिवालय की तर्ज पर गेट पास से प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी। बाहर से परीक्षा संबंधित पूछताछ करने और समस्या लेकर आने वाले छात्रों को स्वागत तथा पूछताछ केंद्र में ही संबंधित शाखा से हर जानकारी मिलेगी। विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इसमें कुछ समय लगेगा। परीक्षा विंग से सुरक्षा इंतजाम में सुधार करने को दिए सुझावों पर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। इसमें प्रशासनिक भवन और परीक्षा विंग भवन के मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मी की स्थाई तैनाती किए जाने की व्यवस्था होगी।
विवि प्रशासन ने फर्जी मार्कशीट मामला उजागर होने के बाद सीओई विंग से आए सुझावों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था में सुधार पर काम करना शुरू कर दिया है। प्रशासनिक भवन और परीक्षा विंग भवनों के मुख्य गेट पर अलग से गेट और सुरक्षा व्यवस्था होगी। पूछताछ केंद्र भी स्थापित होगा। केंद्र सीधा परीक्षा शाखाओं के कंप्यूटर से लोकल एरिया नेटवर्क जुड़ेगा। इसके बाद यहां आने वाले छात्रों को रिजल्ट से संबंधित तमाम जानकारी केंद्र पर ही मिल जाएगी।
इसके अलावा अगर कोई सूचना यहां नहीं मिलती है तो संबंधित व्यक्ति को पास जारी करने के बाद ही शाखा में भेजा जाएगा। केंद्र के रजिस्टर में आने वाले व्यक्ति की तमाम जानकारी दर्ज होगी। मुख्य गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है। इसका कंट्रोल सुरक्षा अधिकारी और सीओई के दफ्तर में होगा।
अमेरिका की मदद से शिमला में खुलेगा नैनो रिसर्च सेंटर
साइंस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध कार्यों को लेकर नाम कमा चुके प्रदेश विश्वविद्यालय का भौतिक विज्ञान विभाग अमेरिका का मिशिगन तकनीकी विश्वविद्यालय (एमटीयू यूएसए) के साथ मिलकर शिमला में नैनो रिसर्च सेंटर खोलेगा। एचपीयू और मिशिगन विवि मिलकर नैनो टेक्नोलॉजी क्षेत्र में शोध कार्य करेगा। दोनों विवि में टेक्नोलॉजी और छात्रों का एक दूसरे विवि में जा कर शोध कार्य करना संभव होगा।
एचपीयू ने सोमवार को मिशिगन विवि के साथ इसको लेकर एमओयू साइन कर लिया है। इसमें एचपीयू कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी और मिशिगन विवि के साइंस एंड आर्ट्स के डीन प्रो. ब्रुसी सीली ने एमओयू पर साइन किए। इस दौरान विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. टीसी भल्ला सहित सभी विभागाध्यक्ष और डीन और छात्र कमेटी रूम में मौजूद रहे। प्रो. शीली ने इस दौरान इंपलीकेशन आफ नैनो टेक्नोलॉजी पर व्याख्यान भी दिया। उन्होंने कहा कि दोनों विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इस समझौते के तहत साइंस के अलावा अन्य संकायों शोध करेंगे।
नैनो टेक्नोलॉजी के शोध सिर्फ लेबोरेटरी से बाहर लाकर इसका आम आदमी के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए। नैनो टेक्नोलॉजी मनुष्य के जीवन को और आरामदायक बना सकता है। एचपीयू के कुलपति प्रो. एडीएव वाजपेयी ने प्रो. शीली का किया तथा विभाग के प्रो. पीके आहलुवालिया के प्रयासों की सराहना की।
विदेशों में झंडे गाड़ चुके हैं एचपीयू के शोधकर्ता
एचपीयू का भूगोल विभाग दो सालों से मिशिगन विश्वविद्यालय के साथ नैनो टेक्नोलॉजी और मैटीरियल साइंस पर शोध कर रहा है। प्रो. महावीर और प्रो. एनएस नेगी तथा प्रो. पीके आहलुवालिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध कर चुके हैं। इसमें प्रो. महावीर ने मैगनेटिक नैनो पार्टिकल इन कम्यूनिकेशन एरिया विषय पर 2004 में पहला शोध बोस्टन यूएसए में पढ़ा। 2006 में यूके में उन्हें कॉमनवेल्थ फेलोशिप मिली। 2008 में वे फ्रांस की ब्रेस्ट यूनिवर्सिटी में छह माह तक गेस्ट फैकल्टी पर रहे।
प्रो. एनएस नेगी ने फेरो इलेक्ट्रिकल मैटीरियल पर शोध किया। प्रो. पीके आहलुवालिया ने नैनो टेक्नोलॉजी में ही ग्रेफिन पर थियोरिटिकल शोध किया। शोधकर्ता सुचेता शर्मा ने नैनो एंटीना बनाया। इसके लिए उन्होंने पांच माह तक फ्रांस में शोध किया। विभागाध्यक्ष प्रो. रमन शर्मा ने दोनों विश्वविद्यालय के बीच हुए इस करार को उपयोगी बताया। कहा कि इससे नैनो टेक्नोलॉजी क्षेत्र में गुणात्मक शोध होंगे। छात्र एक दूसरे के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य कर सकेंगे।