फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   special education teacher in YOU.

स्पेशल एजूकेशन टीचर तैयार करेगा UOU

Sat, 03 Jan 2015 09:08 AM IST
नवीन सक्सेना/ अमर उजाला, हल्द्वानी
नवीन सक्सेना/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sat, 03 Jan 2015 09:08 AM IST
विज्ञापन
special education teacher in YOU.

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय इसी सत्र से बीएड (विशेष शिक्षा) पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। यह डिग्री पाठ्यक्रम दो वर्ष का होगा।

विज्ञापन


भारतीय पुनर्वास परिषद से एमओयू होने की उम्मीद
इस पाठ्यक्रम को चालू करने के लिए केंद्र सरकार की भारतीय पुनर्वास परिषद से मंजूरी लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जनवरी के दूसरे सप्ताह तक भारतीय पुनर्वास परिषद से एमओयू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन


विशेष आवश्यकता वाले मंदबुद्धि या फिर मामूली रूप से विकलांग, दृष्टिहीन आदि समस्याओं से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों के साथ नहीं पढ़ पाते। साथ ही ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग से प्रशिक्षित टीचर शिक्षा विभाग में नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मानव संसाधन मंत्रालय ने सरकारी स्कूलों में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजूकेशन टीचर रखने के निर्देश दिए है। मंत्रालय के निर्देश पर केंद्र के स्कूलों में तो स्पेशल एजूकेशन टीचर्स की तैनाती हो चुकी है, मगर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुछ नहीं हुआ।

इसका मुख्य कारण ट्रेंड स्पेशल एजूकेशन टीचर्स का न होना है। इस कमी को दूर करने के मकसद से उत्तराखंड मुक्त विवि ने बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना तैयार की है। विवि के शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक प्रो. जेके जोशी ने बताया कि पाठ्यक्रम को शुरू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

परिषद से इसी माह एमओयू होने की उम्मीद है। इस पाठ्यक्रम में 500 सीटें मिलेंगी, लेकिन इस पाठ्यक्रम को वही स्टडी सेंटर चालू कर सकेंगे जो कि इसके मानक पूर्ण करेंगे। केंद्र से मंजूरी मिलने पर जुलाई से इसे चालू करने की तैयारी है।

कैसे होगा यह कोर्स
बीएड (विशेष शिक्षा) पाठ्यक्रम दो वर्ष का होगा। इसमें परीक्षा के जरिए अभ्यर्थियों को प्रवेश दिए जाएंगे। ट्रेनिंग सेंटर नैब जैसे विद्यालयों को बनाया जाएगा।

शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के सिद्धार्थ बताते हैं कि इसमें प्रथम वर्ष मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र पढ़ाया जाएगा, साथ ही तकनीकी सत्र होगा, द्वितीय वर्ष में विकलांग यानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, मानसिक रूप से कमजोर, मूक बधिर को पढ़ाने से संबंधित विधि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रदेश में हैं ऐसे 19 हजार बच्चे
सर्वे के अनुसार उत्तराखंड में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की संख्या करीब 19 हजार है। इन्हें स्कूल की बजाय घर पर ही पढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा अनुदेशक रखे जाते हैं।


प्रत्येक सरकारी स्कूल में एक-एक स्पेशल एजूकेशन टीचर रखे जाने की उम्मीद है। इसलिए बीएड (विशेष शिक्षा) करने वाले लोगों को रोजगार भी आसानी से मिल सकेगा।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजूकेशन टीचर्स कोर्स कराने वाला उत्तराखंड मुक्त विवि पर्वतीय राज्यों का पहला राज्य होगा। विवि की कोशिश है कि इस कोर्स को जल्द शुरू करने के लिए प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार मुहैया कराया जाए।
- प्रो. सुभाष धूलिया, कुलपति, यूओयू

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed