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अनुपस्थित छात्रों की लग रही ‘क्लास’

Fri, 13 Dec 2013 11:43 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ Updated Fri, 13 Dec 2013 11:43 AM IST
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special class for absent students

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को क्लास बंक करना महंगा पड़ गया। यहां पर सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति होना अनिवार्य है।

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इसे विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी सख्ती से लागू करवा रहा है। यही कारण है कि दो दिसंबर से शुरू हुई परीक्षाओं में ऐसे स्टूडेंट परीक्षा देने से रोक दिए गए, जिनकी 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं थी।
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छात्रों ने एक मौका विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगा। फिलहाल, अब इन अनुपस्थिति छात्रों की अलग से कक्षाएं लगाई जा रही हैं, जो 20 दिसंबर तक चलेंगी।

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सैय्यद हैदर कहते हैं कि उपस्थिति पूरा किए बगैर परीक्षा में बैठना संभव नहीं है। पहले सत्र में कुल 412 स्टूडेंट में से 50 ऐसे स्टूडेंट हैं, जिन्होंने मानक के अनुसार अपनी उपस्थिति पूरी नहीं की।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 30 स्पेशल क्लासेज का शड्यूल बनाकर पढ़ाई शुरू कराई है। यहां पर बीएससी, बीकॉम, एमबीए, बीबीए, बीजेएमसी, एमजेएमसी, एमए उर्दू, एमए हिस्ट्री, एमए भूगोल, एमकॉम की फर्स्ट सेमेस्टर की कक्षाएं इस समय चल रही हैं। इन छात्रों के एग्जाम जनवरी में होंगे।

काश! एलयू भी कर पाता सख्ती
राजधानी में नए खुले उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय ने 75 प्रतिशत उपस्थिति पर जिस तरह सख्ती दिखाई और किसी भी कीमत पर स्टूडेंट को परीक्षा में बैठने नहीं दिया वह काबिले तारीफ है।

मगर लखनऊ यूनिवर्सिटी में कभी भी 70 प्रतिशत उपस्थिति का नियम सख्ती से लागू नहीं हो पाया। कक्षाएं रेग्युलर चलें इसके लिए कुलपति डॉ. एसबी निमसे और पूर्व कुलपति जी पटनायक ने शिक्षकों की उपस्थिति का ब्यौरा तक मंगवाना शुरू किया।


लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। यहां पर स्टूडेंट की उपस्थिति का रिकॉर्ड नहीं रहता। फिर परीक्षा से दो-तीन दिन पहले तक यूनिवर्सिटी में फीस जमा होती है।

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