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कॉलेजों की लापरवाही से यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों के भविष्य पर संकट

Mon, 08 Feb 2016 02:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 08 Feb 2016 02:20 PM IST
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software traced mistake in up board student form

यूपी बोर्ड में दो परीक्षा फॉर्म भरने वाले राजधानी के सवा सौ कॉलेजों के 600 से ज्यादा परीक्षार्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। सॉफ्टवेयर में पकड़े जाने के बाद इलाहाबाद कार्यालय ने सभी कॉलेजों के नाम नोटिस जारी कर दिया है।

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मगर कोई जवाब नहीं आया है। कॉलेजों की लापरवाही की वजह से स्टूडेंट्स के भविष्य पर बन आई है। हालत यह है कि स्टूडेंट्स को जानकारी तक नहीं है और उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
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फर्जी परीक्षार्थियों पर रोक लगाने के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देने से पहले नौवीं और 11वीं में बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना पड़ता है। नकल माफिया हावी न हो इसके लिए बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में दाखिलों पर रोक लगा रखी है।
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मतलब स्टूडेंट्स को बोर्ड परीक्षा फॉर्म वहीं से भरना होगा जहां से उसने नौवीं या 11वीं की परीक्षा पास की हो। अभिभावक के ट्रांसफर या विशेष परिस्थितियों में कुल सीट के 10 फीसदी तक स्टूडेंट्स को दूसरे कॉलेज में हाईस्कूल या इंटर में दाखिले की छूट है।

राजधानी में हाईस्कूल में 81 और इंटरमीडिएट में 116 कॉलेज ऐसे हैं जिनमें पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ने दो परीक्षा फॉर्म भरे हैं। इसमें सरकारी और वित्तविहीन दोनों कॉलेजों के नाम हैं।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र के अनुसार शिक्षा माफिया स्टूडेंट्स को नकल कराने का झांसा देकर 10वीं और 12वीं का परीक्षा फॉर्म भरवा देते हैं। दूसरी ओर मूल कॉलेज में भी उनका फॉर्म भरा जा चुका होता है। इस वजह से ऐसी स्थिति पैदा होती है।

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