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बच्चे हो गए स्लो लर्नर अब एनजीओ के पाठ्यक्रम से होगी पढ़ाई

Wed, 14 Oct 2015 04:07 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 14 Oct 2015 04:07 AM IST
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Sixth and eighth studies based on NGO syllabus

दिल्ली सरकार के चुने गए 54 मॉडल स्कूलों में छठी से आठवीं तक की पढ़ाई अब एनजीओ के पाठ्यक्रम से होगी। अगले 50 दिन इन स्कूलों में आठ की जगह सिर्फ छह पीरियड लगेंगे। इसके लिए गैर सरकारी संगठन ‘प्रयास’ व ‘प्रथम’ की मदद ली जा रही है।

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हाल ही में 54 स्कूलों में ‘प्रयास’ व ‘प्रथम’ के माध्यम से छठी व आठवीं कक्षा तक के बच्चों का एक टेस्ट लिया गया। इसमें एनजीओ ने पाया कि 40 फीसदी बच्चे धीमी गति से सीखते हैं। इसके लिए एनजीओ ने अपने पाठ्यक्रम से पढ़ाई कराने की बात कही है। दूसरी ओर सवाल उठने लगे हैं कि इस टेस्ट के लिए ऐसा क्या मापदंड रखा गया, जिससे बच्चे इस परीक्षा में स्लो लर्नर हो गए।
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दरअसल सरकार ने दिल्ली से 54 स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस कड़ी में इन स्कूलों में विभिन्न गतिविधियों (डांस, स्पोर्ट्स, संगीत, फोटोग्राफी) की शुरुआत हो गई है। अब इन स्कूलों के बच्चों को शैक्षणिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इस प्रयास के चलते स्कूली पाठ्यक्रम पर ही सवाल उठने लगे हैं।
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हिंदी और गणित विषयों के लिए इन दोनों एनजीओ के दिए गए पाठ्यक्रम से ही पढ़ाई कराई जाएगी। वहीं स्कूलों का कहना है कि यदि 50 दिन इन दो विषयों की पढ़ाई एनजीओ के पाठ्यक्रम से होगी तो स्कूलों में सेकेंड टर्म के एग्जाम किस पाठ्यक्रम से होंगे। बताया जा रहा है कि 15 अक्तूबर यानी कल एनजीओ एक ऐसा ही टेस्ट नौवीं कक्षा के छात्रों का भी ले रहा है।


एक स्कूल के प्रिंसिपल का नाम न छापने की शर्त पर कहना है कि एनजीओ के टेस्ट में उनके टॉपर बच्चे भी स्लो लर्नर की श्रेणी में आ गए हैं। अब यह सवाल उठने लगे हैं कि इस टेस्ट के लिए ऐसा क्या क्राइटेरिया रखा गया, जिससे बच्चे इस टेस्ट में स्लो लर्नर हो गए।

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