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नया सत्र शुरू, लेकिन किताबों पर मंडरा रहा संकट
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 03 Apr 2014 11:32 AM IST
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उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के लाखों छात्रों पर फिर पाठ्य पुस्तकों का संकट मंडराने लगा है।
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सिर्फ एक लाख 39 हजार किताबें दी गईं
शिक्षा विभाग के अफसरों की सुस्ती से कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों तक शिक्षा सत्र पहुंचने के बावजूद किताबें नहीं पहुंच सकी है। राजधानी में ही 8.5 लाख किताबों की मांग के सापेक्ष सिर्फ एक लाख 39 हजार किताबें दी गई हैं।
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खास बात यह है कि किताबों में देरी का यह मामला पहली बार नहीं है। हर साल विभाग देरी करता है। आलम यह है कि निशुल्क मिलने वाली इन किताबों के लिए बच्चों को कई बार आधा सत्र बीत जाने के बाद भी इंतजार करना पड़ता है।
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इसके बावजूद विभागीय अधिकारी सबक सीखते नजर नहीं आते।
इन किताबों का इंतजार
कक्षा - किताबें
एक - हंसी-खुशी, उर्दू किरण, लर्न विद फन
दो - हंसी-खुशी, गणित वाटिका, उर्दू किरण, लर्न विद फन
तीन - हंसी-खुशी, गणित वाटिका, उर्दू किरण, बाल संस्कृतम्, हमारे आसपास
चार - हंसी खुशी, रेनबो, बाल संस्कृतम्, हमारे आसपास
पांच - हंसी-खुशी, बाल संस्कृतम्, गणित वाटिका, हमारे आसपास, उर्दू किरण, समिट
(छठी, सातवीं और आठवीं के छात्रों को विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, हमारी धरती हमारा जीवन, बुरांश, प्रेरक प्रसंग आदि किताबें निशुल्क दी जाती है)
अब तक उपलब्ध किताबें
राजधानी में मैसर्स जैम मल्टी कलर प्रिंट एंड पैक इंडिया लिमिटेड कामधेनु कांप्लेक्स जनता रोड सहारनपुर द्वारा 1,28,500 किताबें उपलब्ध कराई गई हैं।
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वही मैसर्स उत्तरांचल पेपर कन्वर्टर्स एंड पब्लिशर्स पटेलनगर दून ने 10900 किताबें दी हैं। जबकि जिले में आठ लाख 53 हजार 650 किताबों की मांग की गई है।
प्रदेश में एक से आठवीं तक लगभग दस लाख बच्चों के लिए 85 लाख पुस्तकों की जरूरत है। अब तक जितनी पुस्तकें उपलब्ध थी, वे जिलों को भेजी जा चुकी है। कुछ किताबें अभी प्रकाशित होनी हैं।
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इसी माह सभी स्कूलों में किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। अब तक किस जिले को कितनी किताबें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, यह संबंधित जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद ही बताया जा सकेगा।
- चेतन प्रसाद नौटियाल, उप निदेशक, पाठ्यपुस्तकें