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अफसर बन नाम रोशन करेगी ये बिटिया
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Oct 2013 01:21 PM IST
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पंचकूला के सेक्टर-8 में रहने वाली डा. शिल्पी पत्तन ने हरियाणा सिविल सर्विसेज (एचसीएस) में दूसरा स्थान हासिल कर पिता की ख्वाहिश पूरी कर दी।
हरियाणा सरकार में बड़े पद से रिटायर्ड पिता मेवा सिंह पत्तन के बाद अब उनकी बेटी डा. शिल्पी भी अफसर बनकर लोगों की सेवा करेंगी। शिल्पी के एक भाई भी एचसीएस अधिकारी हैं।
चंडीगढ़ के सेक्रेड हार्ट स्कूल से 1998 में 10वीं और वर्ष 2000 में 12 वीं की पढ़ाई के बाद शिल्पी ने बीडीएस का कोर्स किया था। इसके बाद वह 2009 में संघ लोक सेवा आयोग की साक्षात्कार में भी शामिल हुईं।
शिल्पी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंने ठान ली थी कि बढ़िया रैंक लाकर एचसीएस अधिकारी बनना है और इसे उन्होंने पूरा किया। उन्होंने मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के साथ एचसीएच उत्तीर्ण किया है।
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पिता को बताया प्रेरणास्रोत
डा. शिल्पी ने इस सफलता के लिए पिता को प्रेरणास्रोत बताया और मेहनत, अनुशासन और दृढ़ निश्चय को सफलता का मूल मंत्र बताया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए रोजाना कम से कम छह घंटे की पढ़ाई जरूरी है। उन्होंने सामान्य अध्ययन के लिए अखबारों के अलावा न्यूज चैनल और किताबों की भी मदद ली।
रुचि और रिचा को भी सफलता
151 पदों के लिए आए परिणाम में 30 का चयन एग्जीक्यूटिव कैडर के लिए हुआ। इनमें पंचकूला की सेक्टर-12 की रुचि सिंह और सेक्टर-20 की रिचा भी शामिल हैं।
इनकी रैंकिंग 20 के अंदर हैं। पहले दिन हरियाणा सचिवालय में ट्रेेनिंग ज्वाइन करने के बाद सभी सफल महिलाओं को बधाई देने का सिलसिला जारी रहा।
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हरियाणा सरकार में बड़े पद से रिटायर्ड पिता मेवा सिंह पत्तन के बाद अब उनकी बेटी डा. शिल्पी भी अफसर बनकर लोगों की सेवा करेंगी। शिल्पी के एक भाई भी एचसीएस अधिकारी हैं।
चंडीगढ़ के सेक्रेड हार्ट स्कूल से 1998 में 10वीं और वर्ष 2000 में 12 वीं की पढ़ाई के बाद शिल्पी ने बीडीएस का कोर्स किया था। इसके बाद वह 2009 में संघ लोक सेवा आयोग की साक्षात्कार में भी शामिल हुईं।
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शिल्पी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंने ठान ली थी कि बढ़िया रैंक लाकर एचसीएस अधिकारी बनना है और इसे उन्होंने पूरा किया। उन्होंने मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के साथ एचसीएच उत्तीर्ण किया है।
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पिता को बताया प्रेरणास्रोत
डा. शिल्पी ने इस सफलता के लिए पिता को प्रेरणास्रोत बताया और मेहनत, अनुशासन और दृढ़ निश्चय को सफलता का मूल मंत्र बताया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए रोजाना कम से कम छह घंटे की पढ़ाई जरूरी है। उन्होंने सामान्य अध्ययन के लिए अखबारों के अलावा न्यूज चैनल और किताबों की भी मदद ली।
रुचि और रिचा को भी सफलता
151 पदों के लिए आए परिणाम में 30 का चयन एग्जीक्यूटिव कैडर के लिए हुआ। इनमें पंचकूला की सेक्टर-12 की रुचि सिंह और सेक्टर-20 की रिचा भी शामिल हैं।
इनकी रैंकिंग 20 के अंदर हैं। पहले दिन हरियाणा सचिवालय में ट्रेेनिंग ज्वाइन करने के बाद सभी सफल महिलाओं को बधाई देने का सिलसिला जारी रहा।