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रोजगार का जरिया बनेगी संस्कृत भाषा
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sat, 14 Sep 2013 08:46 AM IST
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एमएम पल्लम राजू ने कहा कि सरकार जल्द ही दूसरा संस्कृत आयोग गठित करेगी।
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यह आयोग संस्कृत शिक्षा को आगे बढ़ाने व उसे रोजगार से जोड़ने के लिए काम करेगा।
उन्होंने शुक्रवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘आधुनिक युग में संस्कृत का महत्व’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर यह घोषणा की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संस्कृत व भारतीय संस्कृति का बहुत ही गहरा नाता है। संस्कृत भाषा का क्षेत्र केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, यह विश्व संस्कृति से भी जुड़ा है।
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उन्होंने कहा कि हमें संस्कृत भाषा को आगे बढ़ाना ही होगा। इसलिए द्वितीय संस्कृत आयोग का गठन किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले 1965 में पहले संस्कृत आयोग का गठन किया गया था।
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समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ राजनयिक व भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष डॉ. कर्ण सिंह ने देश के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत विभाग खोलने की वकालत की। उन्होंने कहा कि संस्कृत का प्रभाव हर क्षेत्र में है।
दर्शन, ज्योतिष, चिकित्सा, आयुर्वेद, नाट्य शास्त्र, इतिहास, योग, राजनीति व कूटनीति आदि में संस्कृत का काफी काम है।
इनका लाभ हमें उठाना चाहिए। अधिकतर भारतीय भाषाओं की जननी भी संस्कृत ही है। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना हो या सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की, ये संस्कृत की ही देन हैं।
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि संस्कृत एक वर्ग व जाति की भाषा न होकर भारतीय संस्कृति की आत्मा वाली राष्ट्रवादी भाषा है। हमें चिंतन करना होगा कि यह भाषा केवल साहित्य कीधरोहर बनकर न रह जाए।
इसे रोजगार से जोड़ना होगा। तभी युवा इससे आकर्षित होंगे। ऐसी शिक्षा किस काम की, जिससे दो वक्त की रोटी भी न मिल सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन में विद्वानों के विचार मंथन से यह तय होगा कि भविष्य में संस्कृत क्या रास्ता अपनाएगी।
इससे पहले राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति डॉ. एपी सच्चिदानंद ने संस्कृत में स्वागत भाषण देकर अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में संस्थान की शोध पत्रिका ‘संस्कृत विमर्श’ के आठवें अंक का विमोचन भी किया गया। अंत में संस्कृत संस्थान लखनऊ परिसर के प्राचार्य प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कर्ण सिंह ने अटल को किया याद
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि लखनऊ से उनका काफी पुराना नाता है। 14 साल पहले वे लखनऊ से ही सांसद का चुनाव लड़ने आए थे।
उस समय वाजपेयी के खिलाफ लड़े चुनाव में हारने के बावजूद प्यार व समर्थन देने के लिए डॉ. कर्ण सिंह ने यहां की जनता को धन्यवाद दिया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि आज उनकी तबीयत काफी खराब है, हम उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करें।
रामनाथ वेदालंकार को विद्वत सम्मान
समारोह में संस्कृत के क्षेत्र में योगदान के लिए राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन के स्व. पंडित रामनाथ वेदालंकार को विद्वत सम्मान दिया गया।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एमएम पल्लम राजू ने उनके पुत्र डॉ. विनोद को पुरस्कार प्रदान किया। इसके तहत उन्हें प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र व एक लाख रुपये प्रदान किए गए।