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स्कूलों में चल रही मनमानी की पाठशाला
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 14 Oct 2013 09:03 AM IST
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नए सत्र के एडमिशन शुरू होते ही देहरादून के स्कूलों ने अपनी दुकानें खोल दी हैं।
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स्कूलों ने वसूली अभियान शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की तमाम हिदायतों के बावजूद स्कूल मानने को तैयार नहीं हैं।
फिर से अभियान की शुरुआत
स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की परेशानियों को सामने लाने के लिए हम एक बार फिर इस अभियान की शुरुआत कर रहे हैं।
पिछले साल भी स्कूलों ने अपनी जेब भरने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए थे और शिक्षा विभाग सख्ती के दावे के अलावा कुछ नहीं कर पाया था।
इस बार शिक्षा का अधिकारी अधिनियम की नियमावली में संशोधन होने से मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद जगी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इन नियमों का पालन करा पाएगा?
स्कूल का दबाव
एक अभिभावक ने बताया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल ने इस साल शर्ट, बेल्ट और सॉक्स के लिए 1050 रुपए वसूलने शुरू कर दिए हैं। एक अन्य अभिभावक ने भी इस तरह की शिकायत की।
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स्कूल प्राचार्य बीके सिंह ने कहा कि हम कोई वसूली नहीं कर रहे हैं। जो अभिभावक स्कूल से खरीदना नहीं चाहते हैं, वह कहीं से भी ले सकते हैं। बस ड्रेस उसी कलर की होनी चाहिए।
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आरटीई के बावजूद वसूलते हैं फीस
गुरु रोड स्थित गणेशी शिक्षा सदन से एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा पहली कक्षा में पढ़ता है। बच्चे का दाखिला गत वर्ष आरटीई के तहत कराया था।
बावजूद इसके स्कूल की ओर से लगातार 150 रुपए प्रतिमाह फीस वसूली जा रही है। वहीं, स्कूल का कहना है कि जब उनके पास शिक्षा विभाग से बजट आ जाएगा तो उनकी फीस वापस कर दी जाएगी।
ताकि कामयाब न हों मंसूबे
आरटीई में संशोधन की जानकारी को छिपाकर पब्लिक स्कूल उच्च न्यायालय से स्टे ऑर्डर ले रहे हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस बाबत स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को एक पत्र भेजा है।
अथॉरिटी के चेयरमैन उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते हैं। बाल आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने बताया कि हाल ही में दो मामले ऐसे प्रकाश में आए हैं।
पत्र में उन्होंने आरटीई की धारा 1 में जोड़ी गई उपधारा 4 व 5 का हवाला देते हुए साफ किया है कि माइनॉरिटी स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं।
25 प्रतिशत सीटों पर दाखिले की छूट
इन्हें केवल 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिले की छूट मिली हुई है। केवल मदरसा, वैदिक पाठशाला और धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों को इसमें छूट दी गई है।
ऐसे में यदि कोई मनमानी करने वाला स्कूल न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखता है कि वह माइनॉरिटी होने के नाते छूट का हकदार है तो यह गलत है।
अध्यक्ष ने लीगल अथॉरिटी से निवेदन किया है कि आरटीई के इस संशोधन से सभी न्यायाधीशों को भी परिचित कराया जाए ताकि भविष्य में कोई भी पब्लिक स्कूल इस तरह स्टे न ले सके।
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