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कमीशन खोरी से भर रही स्कूलों की तिजोरी

Sun, 06 Apr 2014 10:02 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 06 Apr 2014 10:02 AM IST
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school want money

किताबों के बाजार में चल रहे कमीशनखोरी के खेल में पापा की जेब भले ही कट रही है, लेकिन स्कूलों की तिजोरी का वजन लगातार बढ़ रहा है।

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सामने आई चौंकाने वाली बातें
किताबों की बिक्री में दुकानदार ही नहीं प्रकाशक भी स्कूलों को मोटा कमीशन देते हैं। एक बुक सेलर से बातचीत में यह चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

नाम न छापने की शर्त पर बुक सेलर ने बताया कि सत्र शुरू होने से पहले ही बुक सेलर स्कूलों से टाईअप कर लेते हैं। इसके लिए उन्हें डेढ़ से तीन लाख रुपए दिए जाते हैं।

इसके बाद वह स्कूल, अभिभावकों को किताबों के लिए केवल उसी बुक सेलर का नाम बताता है। खेल यह होता है कि कई किताबें ऐसी रखी जाती हैं, जो सिर्फ उसी बुक सेलर के पास मिल सकती हैं। परेशान अभिभावक घर खर्च काटकर महंगी किताबें खरीदने को मजबूर होते हैं।
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पब्लिशर देते 50 फीसदी मार्जिन

बुक छापने वाली कंपनियां भी स्कूलों की खूब कमाई कराती हैं। आमतौर पर एक किताब पर 25 से 30 प्रतिशत का मार्जिन होता है, लेकिन बिक्री बढ़ाने के लिए वे 50 प्रतिशत तक मार्जिन देती है।
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इसका आधा हिस्सा भी स्कूलों को पहुंचता है। मसलन कोई किताब 100 रुपए की है तो उसमें 25 रुपए स्कूल को जाते हैं। मगर इस खेल पर सब खामोश हैं। न शिक्षा विभाग जांच को तैयार है, न सीबीएसई ध्यान दे रहा है।

एनसीईआरटी और प्राइवेट में इतना अंतर
सीबीएसई के निर्देशों के मुताबिक पब्लिक स्कूलों में एनसीईआरटी बुक्स ही चलनी चाहिए। एनसीईआरटी बुक्स की बाजार में भारी कमी है। पब्लिक स्कूल इसे बहाना बनाकर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाते हैं।

आठवीं तक की एनसीईआरटी किताब की कीमत 50 रुपए तक है, लेकिन प्राइवेट किताबें 250 से 350 रुपए में हैं। एनसीईआरटी की किताबों को आधार बनाकर ही प्राइवेट किताबें तैयार होती हैं। बावजूद सभी स्कूलों ने प्राइवेट किताबों को रेफरेंस बुक के तौर पर लगा रखा है।

गरीबों के हक पर सिफारिशों का ढेर
गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए लागू शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के गलत इस्तेमाल की कोशिशें जारी हैं।

इन दिनों आरटीई के तहत सभी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर दाखिले चल रहे हैं। इन पर गरीबों से इतर प्रभावशाली लोग भी सिफारिशें लगा रहे हैं। आरटीई के तहत शहर के तमाम नामी स्कूलों में एडमिशन हो रहे हैं।

नेताओं, मंत्रियों व अफसरों की सिफारिशी

इनमें बड़े नेताओं और मंत्रियों के अलावा कई आला अफसरों के सिफारिशी पत्र भी पहुंच रहे हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि आरटीई के तहत सिर्फ पात्र बच्चों को ही दाखिला दिया जा सकता है।

लेकिन अधिकारी और नेता विभाग पर दबाव बना रहे हैं। चहेतों को नामी स्कूल में मुफ्त शिक्षा दिलाने का मौका मिलना एक्ट के मिसयूज की वजह बन गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा मारामारी ब्राइटलैंड स्कूल की 25 प्रतिशत सीटों के लिए है। कई अन्य नामी स्कूलों में दाखिले के लिए सिफारिशों की लाइन लगी है।

रिटेस्ट की दो हजार फीस
पब्लिक स्कूलों की मनमानी चरम पर है। एक ओर जहां स्कूल ने 10वीं का रिजल्ट आने से पहले ही 11वीं के दाखिले शुरू कर दिए हैं। वहीं, 9वीं और 11वीं में फेल स्कूल ने री टेस्ट के लिए मोटी फीस तय कर दी है।

दोनों ही तरीकों से अभिभावक परेशान हो रहे हैं। मुनिकीरेती स्थित ओमकारानंद सरस्वती स्कूल से अभिभावकों ने शिकायत की कि हाईस्कूल का रिजल्ट आने से पहले ही स्कूल ने 11वीं के दाखिलों का दबाव शुरू कर दिया है।

स्कूल ने तय कर दिया है कि किस बच्चे को किस स्ट्रीम में दाखिला दिया जाएगा। अभिभावकों पर दाखिले के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जबकि सीबीएसई गत वर्ष ही आदेश कर चुका है कि रिजल्ट से पहले एडमिशन नहीं दिए जा सकते।

मनमानी की हद पार
यूनिवर्सल एकेडमी के एक अभिभावक ने बताया कि स्कूल ने उन्हें सिक्योरिटी मनी का चेक उनके बजाए उनके पांच वर्षीय बच्चे के नाम से बना दिया है। इतने छोटे बच्चे का कोई अकाउंट भी नहीं है। जब उन्होंने स्कूल से बात की तो उन्हें टरका दिया गया।

द कैंब्रिज स्कूल खुड़बुड़ा रोड कांवली में नौंवी और 11वीं के छात्रों को फेल कर दिया गया है। स्कूल ने अभिभावकों से नौंवी में रिटेस्ट को दो हजार और 11वीं में रिटेस्ट को ढाई हजार रुपए जमा करने का फरमान सुना दिया है।


अभिभावक परेशान हैं, उनका कहना है कि जब सालभर पढ़ाने के लिए फीस दी तो अब आखिर में फेल करके यह वसूली क्यों? विवेकानंद स्कूल बडोवाला में भी किताबों की दुकान सजाने की शिकायत आई है।

जबकि सांईग्रेस एकेडमी ने खुद का नाम छपी हुई कॉपियां अभिभावकों पर थोंप दी हैं। बाजार के मुकाबले यह कॉपियां काफी महंगी हैं।

हिमालय स्कूल कारगी के अभिभावकों की शिकायत हैं कि उन्हें एक बुक सेलर का एड्रेस दिया जा रहा है, कॉपी किताबों की सूची मांगने पर भी नहीं दे रहे हैं।

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