मनमानी की पाठशालाः एक अधिकार, वह भी बेकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी देहरादून के पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के मामले में शिक्षा विभाग दबाव में काम कर रहा है। स्कूलों को हर साल आरटीई का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन कोई फायदा नहीं होता।
नियमों के मुताबिक शिक्षा विभाग के पास केवल स्कूलों की मान्यता खत्म करने की संस्तुति का अधिकार है, जिसका प्रयोग विभाग एक बार भी नहीं कर पाया।
शिक्षा विभाग बेबस
पब्लिक स्कूलों की मनमानी और ऊपर तक पहुंच की वजह से शिक्षा विभाग बेबस है। आरटीई नियमावली के तहत रिटेस्ट, फेल करने या आठवीं तक एडमिशन टेस्ट लेने पर पहली चेतावनी के बाद जुर्माने का प्रावधान तो है लेकिन विभाग एक बार भी ऐसा नहीं कर पाया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल जाकर केवल एक औपचारिक नोटिस देने के साथ आठवीं तक के बच्चों को पास करवा देते हैं।
स्कूलों को जब आरटीई का हवाला दिया जाता है तो वे हर साल नियमों से अनजान होने का दिखावा करते हैं।
नियमों को दरकिनार करने वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति विभाग डीएम से कर सकता है। लेकिन, अभी तक ऐसा एक भी उदाहरण सामने नहीं आया है।
पांच दिन की पढ़ाई के 5.24 लाख रुपये
स्कूलों ने मनमानी की हदें पार कर दी हैं। इस बात को साबित करता नया मामला मसूरी इंटरनेशनल स्कूल में सामने आया है। यहां एक बच्चे ने 11वीं में दाखिला लिया।
पांच दिन बाद ही उसने स्कूल छोड़ने की सूचना प्रबंधन को दे दी। अभिभावक फीस के रूप में जमा कराए 5.24 लाख रुपये लेने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि शुल्क रिफंडेबल नहीं है। अभिभावक की शिकायत पर शिक्षा विभाग ने स्कूल को चेतावनी दी है।
अभिभावक की शिकायत पर आरटीई प्रभारी तृप्ता शर्मा बृहस्पतिवार को स्कूल पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित छात्र के एडमिशन की फाइल तलब की तो शिकायत सच पाई गई।
फीस लौटाने से इंकार
स्कूल ने इस आधार पर फीस लौटाने से इंकार कर दिया कि अभिभावकों ने खुद एक कागज पर हस्ताक्षर किए हुए हैं। हालांकि, अभिभावक ने बताया कि दाखिले के वक्त उन्हें धोखे में रखकर इस कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तृप्ता शर्मा ने स्कूल को चेतावनी जारी कर दी है। उन्हें फीस लौटाने के लिए स्कूल को तीन दिन का वक्त दिया है।
फीस में मनमाने नियम
कांवेंट आफ जीसस एंड मैरी के एक अभिभावक ने शिकायत की है कि उनसे सालाना फीस के साथ छह हजार रुपये अतिरिक्त वसूल किए गए। स्कूल ने उन्हें बताया कि स्कूल भवन के रखरखाव और विभिन्न गतिविधियों के लिए यह शुल्क लिया गया है।
उन्होंने इस संबंध में शिक्षा विभाग को भी शिकायत की है। दूसरी ओर, समरवैली स्कूल में इस बार चेक या बैंक से शुल्क जमा करने की सुविधा खत्म कर काउंटर पर कैश का प्रावधान किया गया है। अभिभावक सुबह से ही यहां लाइन में लग जाते हैं और कई घंटे बाद उनका नंबर आता है।
स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
डीएवी की छात्र नेता स्वाती नेगी ने डीएम को ज्ञापन देकर खुलेआम अभिभावकों को लूट रहे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। स्वाती नेगी ने कहा कि स्कूलों में किताबों की बिक्री कर अधिनियम का उल्लंघन है।
अभिभावक मजबूर हैं और स्कूल उनकी लाचारी का लाभ उठा रहे हैं। नियमों के तहत स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात नहीं है। शिक्षकों की योग्यता भी मानकों से कम हैं। इस अवसर पर सूरज, संदीप, कपिल, प्रियांशु, अनुज, विकास, सनी और शुभम मौजूद रहे।
एसोसिएशन ने सबूत के साथ की शिकायत
आल उत्तराखंड पैरेंट्स एसोसिएशन ने पब्लिक स्कूलों की मनमानी की शिकायत सबूतों के साथ सचिव विद्यालयी शिक्षा को की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज सिंघल ने बताया कि सेंट स्टीफेन स्कूल टर्नर रोड में छात्रों से टीसी के लिए 300 रुपये वसूल किए जा रहे हैं जो कि नियम विरुद्ध हैं।
इसके अलावा हेरीटेज स्कूल ने इस साल फिर फीस में भारी बढ़ोत्तरी कर दी है। गत वर्ष और इस वर्ष के फीस चार्ट के साथ यह शिकायत भी सचिव को भेजी गई है। एसोसिएशन ने इन शिकायतों पर संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा विभाग के हेल्पलाइन नंबर
कंट्रोल रूम : 01352789841
मुख्य शिक्षा अधिकारी : 9412119838
जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक : 9412029599
जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा : 9412141838
जिला समन्वयक आरटीई : 8171034817