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वॉल्वो से दस गुना महंगा स्कूल बस का सफर

Fri, 04 Jul 2014 10:06 AM IST
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 04 Jul 2014 10:06 AM IST
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school bus fees bring out tears

गोमती नगर स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल में प्रति स्टूडेंट स्कूल बस फीस 1,000 से 2,000 रुपये के बीच है। स्कूल से एक किमी. की परिधि में रहने वाले अभिभावक आनंद सिकरवार को स्कूल बस के लिए 1,000 रुपये मासिक भुगतान करना पड़ता है।

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25 दिनों के हिसाब से देखें तो प्रति किमी. स्कूल बस का किराया 20 रुपये पड़ता है। शहर के सबसे ज्यादा शाखाओं वाले स्कूल में लाने ले जाने की फीस के साथ ही एसएमएस फीस भी वसूली जाती है।
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बच्चे के स्कूल पहुंचने या न पहुंचने की सूरत में आने वाले एसएमएस के लिए हर महीने अभिभावकों से 150 रुपये लिए जाते हैं। यह एसएमएस उन बच्चों के अभिभावकों के पास भेजा जाता है जो स्कूल की गाड़ियों से आते-जाते हैं।
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निजी स्कूल संचालकों ने पढ़ाई के साथ ही ट्रांसपोर्टेशन का भी धंधा खोल रखा है। परिवहन निगम की ओर से लिए जा रहे किराए से तुलना की जाए तो निजी स्कूलों में ली जा रही स्कूल बस की फीस कई गुना ज्यादा है।

स्कूल बस के नाम पर साल दर साल किराए में बढ़ोतरी भी कर रहे हैं फिर भी स्कूलों का कहना है कि वे तो नो प्रोफिट, नो लॉस में हैं।

स्कूल बस के साथ ही एसएमएस फीस अलग से वसूली जा रही है। ये दो उदाहरण शहर के केवल दो स्कूलों के हैं। पूरे शहर की बात की जाए तो स्कूल बदल जाते हैं लेकिन हर दूसरा अभिभावक स्कूल बस के नाम पर हो वसूली से आजिज है।

सरकार की ओर से निजी स्कूलों पर कोई लगाम न लगने के कारण अभिभावक चुपचाप ज्यादती सहने को मजबूर हैं।
परिवहन निगम सवारी किराया प्रति किलोमीटर दूरी के हिसाब से तय करता है।

इस समय परिवहन निगम साधारण सेवा की बात की जाए तो प्रति किलोमीटर किराया महज 80 पैसे है। बात अगर वोल्वो बस सेवा की जाए तो भी प्रति किलोमीटर किराया बढ़कर 2.14 रुपये हो जाता है।

अब बात करते हैं निजी स्कूल संचालकों की ओर से स्कूल बस फीस के नाम पर हो रही वसूली की। निजी स्कूल संचालक कहने को तो स्कूल बस अभिभावकों की सुविधा के लिए चलाते हैं।

स्कूल संचालकों की मानें तो प्रति किलोमीटर लागत और बस की मेंटेनेंस फीस जोड़कर ही स्कूल बस फीस तय की जाती है पर वास्तविकता की कसौटी पर कसने में सारे दावे हवाई साबित होते हैं।

परिवहन निगम एसी बस का किराया 2.14 रुपये प्रति किलोमीटर वसूलकर फायदे में रहता है तो निजी स्कूल बस संचालक पांच से 20 रुपए प्रति किलोमीटर किराया वसूलने के बावजूद नो प्रोफिट, नो लॉस में ही रहते हैं।

शहर के एक चर्चित निजी स्कूल की बात करें तो फिर यहां रिक्शे के लिए 450 रुपये एक किलोमीटर के, एक से दो किलोमीटर के 550 रुपये, दो से चार किलोमीटर के 700 रुपये वसूले जाते हैं।

इसी तरह स्कूल बस के लिए स्कूल संचालक दो किलोमीटर के लिए 1000 रुपए, चार किलोमीटर के लिए 1,150 रुपये, सात किलोमीटर के लिए 1,300 रुपये, 10 किलोमीटर तक की दूरी की फीस 1,800 रुपये और दूरी दस से ज्यादा होने पर प्रति किलोमीटर 200 रुपये ज्यादा लेते हैं।

बच्चे अगर स्कूल के वाहन के बजाय अपने निजी वाहन से आते हैं तो उनसे वाहन स्टैंड के नाम पर भी वसूली होती है। स्कूल में तीन महीने के लिए 350 रुपये वाहन स्टैंड फीस के नाम पर वसूले जाते हैं।

दो साल में साठ फीसदी बढ़ गई स्कूल फीस
शहर के सबसे ज्यादा बच्चों वाले स्कूल ने स्कूल बस की फीस के नाम पर पिछले दो साल में 60 फीस बढ़ोतरी कर दी है। वर्ष 2012-13 में स्कूल में बस फीस 950 हुआ करती थी।

वर्ष 2013-14 में फीस बढ़कर 1,300 हो गई। इसके बाद वर्तमान सत्र में स्कूल फीस में 200 रुपये की बढ़ोतरी के साथ ही फीस 1,500 रुपये मासिक हो गई है।

सीएमएस के संस्थापक जगदीश गांधी ने बताया कि अगर बाकी स्कूलों से तुलना की जाए तो हमारे यहां की फीस बहुत कम है। स्कूल बसें नो प्रोफिट, नो लॉस के आधार पर चलाई जाती हैं। स्कूल एक चैरिटेबल ट्रस्ट है फीस में केवल लागत का भाग ही होता है कोई प्रोफिट का पार्ट नहीं होता।

वहीं गोमतीनगर की अभिभावक सुरभि सिंह ने बताया कि निजी स्कूलों की मनमानी हद से ज्यादा बढ़ गई है। स्कूल फीस के साथ ही स्कूल बस के नाम पर भी निजी स्कूल जमकर वसूली करते हैं।

सरकार निजी स्कूलों की सामान्य फीस के साथ ही स्कूल बस फीस पर भी अंकुश लगाए अन्यथा इनकी मनमानी बढ़ती चली जाएगी।

स्कूलों को नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन के अंतर्गत रखा जाता है। इस लिहाज से किसी प्रकार की फीस में प्रोफिट का भाग नहीं होता है।

बसपा सरकार के दौरान अभिभावक कल्याण संघ के प्रस्ताव पर स्कूल में परिवहन निगम की बस लगाने का आदेश दिया गया था। आदेश के बाद स्कूला से इस संबंध में सूचनाएं भी मांगी गईं पर स्कूल प्रबंधन तैयार नहीं हुए।

इसके बाद फिर से पुराने ढर्रे पर ठेके और निजी स्वामित्व की बसों से बच्चे ढोए जा रहे हैं। अभिभावक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के अनुसार स्कूलों की मंशा ठीक नहीं है।

इसीलिए वे परिवहन निगम की बसों को स्कूलों में लगाने देना चाहते। परिवहन निगम की बसें चलेंगी तो उसका रेट सरकार तय करेगी। छुट्टियों के दौरान अभिभावकों से जबरन फीस की वसूली नहीं की जाएगी।


प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के अनुसार सरकार को चाहिए कि वो निजी स्कूलों में परिवहन निगम की बसें लगवाए, ताकि अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमानी से मुक्ति मिल जाए।

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