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लखनऊ के कॉलेजों में 144 रुपये सालाना स्कॉलरशिप

Wed, 23 Jul 2014 04:55 AM IST
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 23 Jul 2014 04:55 AM IST
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scholoreship in lucknow colleges

किसी समय में लखनऊ विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में 100 रुपये की बरसरी स्कॉलरशिप पाना फख्र की बात होती थी। बाकायदा इसके लिए लिखित परीक्षा पास करनी होती थी।

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अब यह स्कॉलरशिप बढ़कर 144 रुपये सालाना हो चुकी है, लेकिन कमर तोड़ महंगाई के चलते आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी इसके लिए आवेदन नहीं करते।

वहीं, राज्य सरकार द्वारा छात्राओं को ट्यूशन फीस में 144 रुपये की छूट देती है, यह भी ऊंट के मुंह में जीरे के ही समान है।

एलयू में गरीब सहायता कोष से जो मदद मिलती है, उसे कोई लेने वाला है, न ही इसे लेकर विवि प्रशासन ने कोई संजीदगी दिखाई। मगर अब यूनिवर्सिटी प्रशासन इसे रिव्यू करने जा रहा है। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने प्रतिकुलपति की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित कर दी है।

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स्कॉलरशिप के लिए इंटरव्यू

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लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसके द्विवेदी कहते हैं कि वर्ष 1968-70 में बरसरी स्कॉलरशिप के लिए कड़ा मुकाबला होता था, लेकिन समय के अनुरूप न बदलने से ये बंद हो गई।

क्रिश्चियन पीजी कॉलेज में भौतिक विज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ. मौलींदु मिश्रा का कहना है कि 1979 से 1983 के बीच जब उन्होंने यहां पढ़ाई की तो विवि में फ्रीशिप पाना बड़ी बात होती थी, लेकिन अब इसके लिए कोई आवेदन नहीं करता।

आखिर 144 रुपये के लिए कौन फॉर्म भरे, अभिभावक का आय प्रमाणपत्र लगाए और फिर इंटरव्यू देकर इसे पाए। लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. मनोज दीक्षित कहते हैं कि हमारे जमाने में लोक प्रशासन विभाग में डॉ. आरएस गोपाल स्कॉलशिप मिलती थी।

इसमें लोक प्रशासन में अच्छे नंबर पाने वाले एक छात्रा व एक छात्र की फीस माफ कर दी जाती थी, लेकिन अब यह स्कॉलरशिप कहां है कोई नहीं जानता।

किसी की दिलचस्पी नहीं

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केकेसी के प्राचार्य डॉ. एसडी शर्मा कहते हैं कि उन्होंने अपने यहां फ्रीशिप के तहत करीब 63000 रुपये के चेक तैयार किए, लेकिन 144 रुपये लेने में किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।

अब यह चेक बेकार हो चुके हैं। लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार पांडेय सवाल उठाते हैं कि ऐसी आर्थिक मदद देने से क्या फायदा।

स्नातक में ट्यूशन फीस ही है जो सिर्फ 144 रुपये है, बाकी परीक्षा शुल्क, विकास शुल्क व अन्य शुल्क बहुत ज्यादा है।

ऐसे में छात्राओं को खास मदद नहीं मिल पा रही है, जबकि बीए में ही फीस कम से कम तीन से चार हजार रुपये तक है।

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अब ये मानक

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लखनऊ विश्वविद्यालय में गरीब छात्र सहायता कोष से जो स्कॉलरशिप स्टूडेंट्स को दी जाती है, उसमें स्नातक के स्टूडेंट्स को दो हजार रुपये, परास्नातक में तीन हजार रुपये व पीएचडी में चार हजार रुपये वार्षिक मदद दी जाती है।

करीब तीन वर्षों से छात्रों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। 2005 के बाद कोई कमेटी नहीं बनाई गई।

अब एलयू के डीन स्टूडेंट वेलफेयर नई कमेटी बनाकर इस सहायता को रिव्यू करने की तैयारी कर रहे हैं।

अब सहायता राशि बढ़ाई जा सकती है। कम से कम फीस के बराबर आर्थिक सहायता देने पर विचार चल रहा है।

मिलेगी फीस की पूरी रकम

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इस मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे का कहना है कि एलयू प्रशासन ने इस आर्थिक सहायता को रिव्यू करने के लिए नई कमेटी बनाई गई है। प्रतिकुलपति की अध्यक्षता में गठित हुई इस कमेटी में सभी संकायों के डीन को शामिल किया गया है।

इसके अलावा अब स्टूडेंट को आर्थिक मदद के रूप में कम से कम पूरी फीस की रकम दी जाए। इसके लिए नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

अब मेरिट के आधार पर आर्थिक सहायता देने पर विचार हो रहा है, ताकि जो स्टूडेंट गरीब छात्र सहायता कोष से जो मदद पाएं, उसे कम से कम फीस की रकम तो न देनी पड़े। अभी एलयू की फीस के अनुसार यह सहायता बहुत कम है।

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