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गरीब छात्रों के एक करोड़ डकार गई यूपी की ये यूनिवर्सिटी

Thu, 23 Jul 2015 02:24 PM IST
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 23 Jul 2015 02:24 PM IST
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scam in luknow university poor boy fund

लखनऊ विश्वविद्यालय ने पिछले तीन-चार साल से किसी गरीब छात्र को कोई आर्थिक मदद नहीं दी। लेकिन विश्वविद्यालय ने हर साल पुअर बॉयज फंड के नाम पर छात्रों से करीब 20 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली की है।

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यानी विश्वविद्यालय पिछले करीब चार साल में छात्रों के 75 लाख से एक करोड़ रुपये तक डकार गया। जबकि डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. अनिल शुक्ला भी कहते हैं, सरकारी नियमानुसार जनरल व ओबीसी कैटेगरी में एक लाख रुपये और एससी व एसटी में 2 लाख रुपये तक की सालाना पारिवारिक आय वाले विद्यार्थियों को इस फंड से अर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है।
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इसके तहत यूजी स्तर के छात्र को 1500 रुपये, पीजी स्तर पर दो हजार रुपये और पीएचडी स्तर पर 2500 रुपये तक सहायता करने का प्रावधान है।

जब पैसे का खर्च नहीं हुआ तो गया कहां

scam in luknow university poor boy fund

लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रत्येक छात्र से 200 रुपये पुअर बॉयज फंड के नाम पर लिए जाते हैं। इस तरह हर साल लगभग 10 से 12 हजार विद्यार्थियों से पुअर बॉयज फंड में लगभग 20 लाख रुपये से अधिक आते हैं।

पर, चौंकाने वाली बात यह है कि विश्वविद्यालय अपने बजट में विद्यार्थियों की सहायता के लिए पुअर बॉयज फंड में वसूली रकम का महज 20 फीसदी ही रखता है। वित्त विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सत्र 2015-16 में विश्वविद्यालय ने पुअर बॉयज फंड के लिए महज पांच लाख रुपये बजट रखा है।

अब सवाल उठता है कि जब स्टूडेंट्स से उनकी मदद के नाम पर 20 लाख रुपये से अधिक की रकम जमा किए जा रहे हैं तो उनकी मदद के लिए महज पांच लाख रुपये का ही प्रावधान क्यों है। एक बात और, पिछले तीन से चार सालों के दरम्यान इस मद से छात्रों को मदद के नाम पर एक भी पैसा नहीं मिला।

तब इस बजट का पैसा कहां गया? सूत्रों का कहना है कि छात्रों से पुअर बॉयज फंड के नाम पर वसूली गई राशि विश्वविद्यालय अपने अन्य मदों में खर्च कर रहा है।

2015-16 के बजट में निर्धन छात्रों की सहायता केलिए 5 लाख रुपये के बजट का प्रावधान रखा गया है। पिछले 3-4 साल में इस मद से कोई पैसा खर्च नहीं हुआ। इस मद से सभी खर्च डीएसडब्ल्यू की संस्तुति से होता है।
-सुरेश चंद्र उपाध्याय, वित्त अधिकारी, लखनऊ विश्वविद्यालय

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