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60 फीसदी सीट रिर्जव वाला स्कूल संस्कृति, मामला कोर्ट पहुंचा
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Jan 2014 11:14 AM IST
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नौकरशाहों के बच्चों के कारण चाणक्यपुरी स्थित संस्कृति स्कूल का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। स्कूल में नौकरशाहों के बच्चों के लिए अधिकांश सीटें आरक्षित करने के मुद्दे पर न्यायमूर्ति मनमोहन ने स्कूल प्रबंधन, दिल्ली व केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और शिक्षा निदेशालय को नोटिस जारी किया है।
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अदालत ने सभी पक्षों से कहा है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। याचिकाकर्ता नवया सिंह की ओर ने स्कूल द्वारा 60 प्रतिशत सीटें सिविल सर्विस व डिफेंस अधिकारियों के लिए आरक्षित करने और सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए मात्र 10 प्रतिशत रखने के फैसले को चुनौती दी गई है।
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याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर नंदराजयोग व अखिल सच्चर ने अदालत को बताया कि संस्कृति स्कूल को 1994 से 2009 के दौरान केंद्र सरकार के अधिकांश मंत्रालयों से 25 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है।
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इसके अलावा भी फंड जारी किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्कूल को नाममात्र की राशि पर भूमि दी थी, इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने आम बच्चों को दाखिला देना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा हाल ही में खंडपीठ ने आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला देने का निर्देश दिया था।
इसके बाद स्कूल ने आम बच्चों को दाखिला न मिले, इसके लिए 18 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर 60 प्रतिशत सीटें सिविल सर्विस अधिकारियों के बच्चों के लिए आरक्षित कर दीं। कुल 140 सीटों में से मात्र 14 सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए रखी गई हैं। इसमें से भी पांच प्रतिशत लड़कियों के लिए आरक्षित की गई हैं और इस कोटे में भी सिविल सर्विस के अधिकारियों के बच्चे आवेदन कर सकते हैं।
अधिवक्ता ने बताया कि उनकी मुवक्किला ने आवेदन किया, लेकिन उसे दाखिला नहीं दिया गया। स्कूल प्रबंधन का यह रवैया संविधान के अनुच्छेद-14 व 21 के तहत उनकी मुवक्किला को प्रदान अधिकारों का हनन करता है। इसके अलावा यह दिसंबर में उपराज्यपाल द्वारा नर्सरी व प्री नर्सरी दाखिलों के लिए जारी दिशा निर्देश का भी उल्लंघन है। इसलिए स्कूल प्रबंधन द्वारा 18 दिसंबर को जारी अधिसूचना को रद्द किया जाए।