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साइंस सिटी में देखिए रोमांच का नया सफर

Fri, 29 Nov 2013 10:34 AM IST
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
अतुल भारद्वाज/लखनऊ Updated Fri, 29 Nov 2013 10:34 AM IST
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saimax show new adventurous movie the canon from today

एक हजार फीट से ज्यादा गहरी खाई में जंप करने का अहसास ही रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है।

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साइंस सिटी के साईमैक्स शो में अब शुक्रवार से दिखाई जाने वाली साइंस फिक्शन मूवी ‘द ग्रेट केन्यॉन’, रिवर एट रिस्क में जानकारी के साथ रोमांच का भी अहसास होगा।

180 डिग्री पर अर्धगोलाकार पर्दे, 6-डी साउंट और फिश आई लेंस के प्रोजेक्शन से इसे संभव बनाने का काम किया गया है। यह मूवी पानी के अंतर्राष्ट्रीय खतरे और इसमें सभी की भागीदारी की जरूरत को भी बखूबी दिखाएगी।
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साइंस सिटी अलीगंज के साइमैक्स में शुक्रवार को द ग्रेट केन्यॉन, रिवर एट रिस्क का पहला शो दोपहर 12 बजे से रहेगा।

वाइल्ड कैलीफोर्निया मूवी के एडवेंचर का हिस्सा बनने के बाद अब इस आईमैक्स तकनीक से बनी मूवी का प्रदर्शन किया जा रहा है।

पिछले छह महीने से साइंस सिटी में इस मूवी का प्रदर्शन किया जा रहा था। द ग्रेट केन्यॉन के रोजाना चार शो होंगे। यह शो सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक चलाए जाएंगे। हर शो की क्षमता 220 दर्शकों की है।
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फिल्म का शुभारंभ केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक केबी विस्वास की मौजूदगी में किया जाएगा। साइंस सिटी के परियोजना समन्वयक ने बताया कि यह मूवी पीने के पानी के मुद्दे जागरूक करती है।

इसमें सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ अमेरिका के एरिजोना इलाके में एक नदी के खतरे में होने जानकारी भी दिखाई गई है। मूवी में दिखाया जाएगा कि कैसे इससे एक पूरी सभ्यता खतरे में पड़ गई है।

इसके साथ ही नदी की वजह से बने एक से डेढ़ किमी तक गहरी खोखली संचरना (केन्यॉन) में खुद के होने का अहसास भी मिलेगा। 40 मिनट की रोमांच और जानकारी से भरी इस मूवी को आईमैक्स कंपनी ने तैयार कराया है।

क्या है खास
फिल्म के इस प्रदर्शन के पीछे आई-मैक्स तकनीक काम करती है। विज्ञान एक बहुत सामान्य सिद्धांत इसमें काम करता है। इसके मुताबिक, हमारी आंख की एक निश्चित कोण तक देखने की सीमा होती है।

इसे पेरीफेरल व्यू कहते हैं। इसी पेरीफेरल व्यू से ज्यादा सीमा का पर्दा और प्रोजेक्टर साइमैक्स के लिए तैयार किया गया। फ्लैट स्क्रीन की जगह 20 मीटर व्यास का विशेष अर्द्ध गोलाकार पर्दा साइमैक्स ऑडिटोरियम में है।


पूरी छत को कवर करता यह पर्दा पेरीफेरल व्यू से ज्यादा होने के चलते दर्शक को फिल्म के सीन में खुद भी शामिल होने का अहसास देता है।

प्रोजेक्शन के लिए भी सामान्य लेंस की जगह ‘फिश आई लेंस’ इस्तेमाल हुआ है। लेंस का नाम फिश आई इसलिए क्योंकि मछली की आंख भी मनुष्य से ज्यादा पेरीफेरल व्यू की होती है।

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