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पढ़ाई की तो फेल, RTI से हो गई पास
अमर उजाला, लक्सर
Updated Thu, 14 Aug 2014 02:10 AM IST
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सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) ने दसवीं में फेल दर्शाई गई छात्रा को पास करवा दिया तो दूसरे छात्र के नंबर बढ़वा दिए। दोनों मामले लक्सर क्षेत्र के हैं।
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खानपुर स्थित नेशनल कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा दीपिका ने वर्ष 2014 की हाईस्कूल उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा दी थी। उसका रोल नंबर 14016709 है। जून माह में जब परीक्षा का परिणाम आया तो दीपिका को गृह विज्ञान में अनुत्तीर्ण दर्शाया गया।
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गृह विज्ञान में हो गई थी फेल
गृह विज्ञान में थ्योरी में 75 में से 17 अंक उसे दिए गए थे। दीपिका को इन नंबरों पर संदेह था। इसको देखते हुए उसने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत उत्तराखंड बोर्ड से अपनी गृह विज्ञान की उत्तर पुस्तिका मांगी।
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बोर्ड ने उत्तर पुस्तिका भेजी तो पता चला कि उसमें 17 के स्थान पर 19.5 अंक थे। यानी ढाई अंक ज्यादा। नेट पर उसका रिजल्ट भी संशोधित कर अब उसे पास कर दिया गया है। हालांकि अभी संशोधित मार्कशीट नहीं आई है, लेकिन छात्रा को 11वीं में प्रवेश मिल गया है।
दूसरे छात्र का भी नंबर बढ़ा
दूसरा मामला भी इसी कॉलेज का है। छात्र विशाल शर्मा को इसी वर्ष दसवीं में अंग्रेजी में 99, गणित 96, संस्कृत में 94, विज्ञान 94, हिंदी में 66 और सामाजिक विज्ञान में 64 अंक मिले हैं।
विशाल के अनुसार, उसे सामाजिक विज्ञान में मिले अंकों पर संदेह था। इस पर उसने सामाजिक विज्ञान की उत्तर पुस्तिका को उत्तराखंड बोर्ड से सूचना के अधिकार के तहत मंगवाया। उत्तर पुस्तिका में उसके 66 अंक लिखे हैं, जबकि मार्कशीट में 64 अंक दर्शाए गए हैं।
66 अंक पर भी विशाल का कहना है कि बेहद हार्डमार्किंग की गई है। विद्यालय के प्रधानाचार्य घनश्याम गुप्ता कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत उत्तराखंड बोर्ड के सचिव से की है। अंकों में यह लापरवाही छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है।
10 रूपए में होती है आरटीआई
अगर किसी विद्यार्थी को लगता है कि उसके नंबर किसी विषय में कम हैं तो वह भी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तराखंड बोर्ड में आवेदन कर संबंधित विषय की उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति मांग सकता है।
इसके लिए दस रुपये के स्टांप पेपर पर बोर्ड में आवेदन करना होता है। यदि तय सीमा में उत्तर नहीं मिलता है तो अपीलीय अधिकारी के यहां अपील की जा सकती है।