फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   roorkee IIT take back one student.

रुड़की IIT ने निकाले छात्रों में एक को लिया वापस, जानिए क्यों?

Tue, 14 Jul 2015 08:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की Updated Tue, 14 Jul 2015 08:20 AM IST
विज्ञापन
roorkee IIT take back one student.

आईआईटी रुड़की से बाहर निकाले गए 73 छात्रों में से एक को संस्थान में वापस ले लिया गया है। बताया गया है कि पढ़ाई से अलग गतिविधियों में छात्र की अनुपस्थिति दर्ज होने के चलते उसे इसके क्रेडिट नहीं मिल पाए थे। अब संस्थान से निष्कासित छात्रों की संख्या 72 रह गई है।

विज्ञापन


संस्थान प्रशासन ने प्रथम वर्ष के दो सेमेस्टर में औसत पांच सीजीपीए से कम अंक आने के चलते 73 छात्रों को बाहर निकाल दिया गया था।

इन छात्रों को मर्सी अपील पर सुनवाई के दौरान आठ जुलाई को आईआईटी की सीनेट से भी राहत नहीं मिल पाई थी। इसके बाद 10 जुलाई को सीनेट की एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में सीनेट के फैसले को बरकरार रखा गया।
विज्ञापन


संस्थान के इस फैसले को चुनौती देने के लिए अभिभावकों ने नैनीताल हाईकोर्ट की ओर रुख किया और 11 जुलाई को रुड़की से नैनीताल रवाना हो गए थे।

आईआईटी प्रशासन का छात्र के बारे में बताने से इनकार

roorkee IIT take back one student.

सोमवार को इस मामले में आईआईटी प्रशासन ने एक छात्र को वापस ले लिया है। संस्थान के डीन एकेडमी प्रो. प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि संस्थान से बाहर किए गए छात्रों की संख्या 72 है।

उन्होंने छात्र के संबंध में जानकारी देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि जब तक वापस लिए गए छात्र को लेकर कागजी तौर पर अनुमति नहीं ली जा सकती। तब तक अधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती।

सूत्रों के अनुसार वापस लिए गए छात्र को पढ़ाई से अलग गतिविधियों में अनुपस्थिति दर्ज थी। जिसके कारण उसका सीजीपीए कम रह गया था। इस संबंध में छात्र की ओर से अपील किए जाने पर उसे वापस ले लिया गया है।

विकलांग था, मात्र .022 कम सीजीपीए, कर दिया बाहर

roorkee IIT take back one student.

बाहर निकाले गए छात्रों में एक छात्र ऐसा भी है जिसका सीजीपीए पांच अंक से मात्र .022 कम रह गया है। यानी इस छात्र को चार से पांच अंक और मिल जाते तो इसे संस्थान से बाहर होने की पीड़ा न सहनी पड़ती।

लेकिन बस इतनी ही बात नहीं है। दुखद यह है कि यह छात्र विकलांग है। छात्र का आईआईटी रुड़की में प्रवेश से एक साल पहले आईआईटी दिल्ली में सेलेक्शन होते-होते रह गया था।

झारखंड के गरीब परिवार का इस छात्र को निष्कासन का पता चला तो वह अधिकारियों से अपने मन की व्यथा व्यक्त करने पहुंचा। लेकिन, कहीं कोई राहत नहीं मिली।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed