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एचपी यूनिवर्सिटी में फिर हिंसा, पुलिस के साथ हाथापाई

Sat, 26 Apr 2014 10:10 AM IST
Updated Sat, 26 Apr 2014 10:10 AM IST
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riot in hp university

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एनएसयूआई और एसएफआई कार्यकर्ताओं के बीच फिर हिंसा भड़क गई है। यहां शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई।

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परिसर में देर शाम हुई हिंसा से गुस्साए दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने पहले तो एक दूसरे के साथ बहसबाजी की। फिर मामला आगे बढ़ गया।

इसके बाद दोनों के बीच लात घूसे चलने लगे। देखते ही देखते कार्यकर्ताओं ने गाइडेंस ब्यूरों में लगाए टेबल और कुर्सियां भी उठाकर एक दूसरे पर फेंक दी। करीब आधा घंटे तक ऐसा ही मंजर जारी रहा। बाद में पुलिस मौके पर पहुंच गई।
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हिंसा फैलाने के आरोप में चार गिरफ्तार

riot in hp university

हिंसा की सूचना मिलते ही पुलिस और क्यूआरटी की टीमें मौके पर पहुंच गई है। पुलिस ने चार छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें बालूगंज थाने लाया जा रहा है।

इससे पहले पुलिस ने वीरवार शाम भी दो एसएफआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इनमें विवि एससीए के पूर्व सचिव विक्रम और विपिन शर्मा शामिल हैं।

हिंसा की इस घटन के बाद कैंपस में पुलिस तैनात कर दी गई है। छात्रों से गहन पूछताछ के बाद ही उन्हें परिसर में एंट्री दी जा रही है। डीएसपी शिव चौधरी का कहना है कि झगड़े की सूचना मिलने पर पुलिस और विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों ने बीच बचाव कर स्थिति में काबू किया। फिलहाल यहां पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

गाइडेंस ब्यूरों से शुरू हुआ था विवाद

riot in hp university

एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष सुरेश कुमार और सचिव होशियार सिंह ने आरोप लगाया कि एनएसयूआई के कार्यकर्ता और बाहरी तत्वों ने एसएफआई के गाइडेंस ब्यूरो के पास पहुंचकर फार्म भर रही छात्रा पर कमेंट किए थे। जब विरोध किया तो एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने एसएफआई कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट शुरू कर दी।

वहीं, एनएसयूआई विवि इकाई अध्यक्ष हुकम सिंह ने कहा कि एसएफआई ने सुनियोजित तरीके से गुंडागर्दी कर हमला किया। इसमें एनएसयूआई के कार्यकर्ता बलविंद्र सिंह, विनोद, कुलभूषण नेगी, भूपेंद्र सिंह, जोगेंद्र सहित सात कार्यकर्ताओं को गंभीर चोटें आई हैं।

एसएफआई सरेआम परिसर में गुंडागर्दी कर रही है। पुलिस और प्रशासन के समक्ष मामला उठाने के बावजूद एसएफआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है।

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