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देशी-विदेशी होनहारों की प्रतिभा देखने को मिलेगी यहां
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 19 Dec 2013 11:29 AM IST
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प्राकृतिक आपदा और प्रकोप से बचाने के लिए सेक्टर-15 के हॉलमार्क पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने लीगो रोबोट्स तैयार किए हैं।
इसे तैयार करने के समय यह खास ध्यान रखा गया कि प्रॉपर्टी को कम से कम नुकसान पहुंचे, क्योंकि इस प्रोजेक्ट का नाम ही ‘नेचर्स यूरी’ है।
विद्यार्थियों का यह समूह प्रतिभा प्रदर्शन के फर्स्ट लीगो लीग (एफएलएल) नामक रोबोटिक मुकाबले में दुनिया के 70 देशों के प्रतिभागियों से मुकाबला करने की तैयारियों में जुटा है।
यह मुकाबला मैनचेस्टर स्थित इंटरनेशनल एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथ) नामक प्रोग्राम का हिस्सा है। हर साल की तरह इस प्रतियोगिता के लिए इस साल चुनौती है ‘प्रकृति का प्रकोप’।
रोबोटिक्स का इस्तेमाल करते हुए इसमें विद्यार्थियों को निर्धारित रिहायशी इलाके में 10 कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम देना होगा, जिसे पहले लीगो ब्लॉक्स का इस्तेमाल करते हुए पूरा करना है। इसकी हर गतिविधि को 2.5 मिनट में पूरा करना होगा।
प्रोजेक्ट से वाकिफ कराने को वर्कशॉप
हॉलमार्क स्कूल की टीम में अवनी राणा, रश्मि, अवि गोयल, युवराज सिंघल, प्रकाश गुप्ता, जतिन छाबड़ा, मेघना शर्मा, कार्तिकेय मेहता, पंखुड़ी गर्ग, स्नेहिल शर्मा और सारंग कलसी शामिल हैं।
सभी स्टूडेंट्स पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के हैं। इन विद्यार्थियों को ऐसे प्रोजेक्ट से वाकिफ कराने के उद्देश्य से रियल टाइम ‘रोबोटिक वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया।
स्नेहिल और पंखुड़ी ने बताया कि उसकी टीम ने एक विशेष कुदरती आपदा पर ध्यान केद्रित किया और आपदा के बीच घिरे बाशिंदों की कठिनाइयों का हल सुझाने के लिए रियल वर्ल्ड सॉल्यूशन पर काम किया।
उन्होंने असल रोबोट में प्री-प्रोग्रामिंग की चुनौतियों पर पार करने में कामयाबी हासिल की है’। वहीं, कार्तिकेय और प्रखर ने बताया कि सबसे मुश्किल काम रोबोट को काम में लगाना था।
इसके लिए उन्होंने पहले रोबोट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग के बारे में सीखा और बाद में इसकी प्री-प्रोग्रामिंग करने में वे कामयाब हुए।
इस चुनौती के तहत थ्री डी प्लेइंग फील्ड में पॉइंट्स अर्जित करने और कोर वैल्यूज द्वारा निर्देशित चिह्नित समस्या का हल तलाशने के लिए ऑटोनॉमस रोबोट की प्रोग्रामिंग शामिल थी।
कुदरती कहर में ऐसी प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं, जहां टीमों को इस बात का पता लगाना है कि जब ऐसी घोर कुदरती विपदाएं आती हैं तो लोगों के रहने, काम करने व खेलकूद वाले स्थानों पर क्या-क्या राहत एवं बचाव कार्य किए जा सकते हैं।
इनमें रोबोट्स की मदद से इवेक्यूएशन साइन की पोजिशनिंग, हवाई अड्डे पर रन-वे पर से मलबा हटाना, रन-वे पर कारगो प्लेन सुरक्षित ढंग से उतारना, ढांचों को दोबारा खड़ा करना, जरूरतमंद लोगों के बीच जरूरी रसद आदि पहुंचाना शामिल है।
- कविता वाधवा, प्राचार्य
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इसे तैयार करने के समय यह खास ध्यान रखा गया कि प्रॉपर्टी को कम से कम नुकसान पहुंचे, क्योंकि इस प्रोजेक्ट का नाम ही ‘नेचर्स यूरी’ है।
विद्यार्थियों का यह समूह प्रतिभा प्रदर्शन के फर्स्ट लीगो लीग (एफएलएल) नामक रोबोटिक मुकाबले में दुनिया के 70 देशों के प्रतिभागियों से मुकाबला करने की तैयारियों में जुटा है।
यह मुकाबला मैनचेस्टर स्थित इंटरनेशनल एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथ) नामक प्रोग्राम का हिस्सा है। हर साल की तरह इस प्रतियोगिता के लिए इस साल चुनौती है ‘प्रकृति का प्रकोप’।
रोबोटिक्स का इस्तेमाल करते हुए इसमें विद्यार्थियों को निर्धारित रिहायशी इलाके में 10 कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम देना होगा, जिसे पहले लीगो ब्लॉक्स का इस्तेमाल करते हुए पूरा करना है। इसकी हर गतिविधि को 2.5 मिनट में पूरा करना होगा।
प्रोजेक्ट से वाकिफ कराने को वर्कशॉप
हॉलमार्क स्कूल की टीम में अवनी राणा, रश्मि, अवि गोयल, युवराज सिंघल, प्रकाश गुप्ता, जतिन छाबड़ा, मेघना शर्मा, कार्तिकेय मेहता, पंखुड़ी गर्ग, स्नेहिल शर्मा और सारंग कलसी शामिल हैं।
सभी स्टूडेंट्स पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के हैं। इन विद्यार्थियों को ऐसे प्रोजेक्ट से वाकिफ कराने के उद्देश्य से रियल टाइम ‘रोबोटिक वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया।
स्नेहिल और पंखुड़ी ने बताया कि उसकी टीम ने एक विशेष कुदरती आपदा पर ध्यान केद्रित किया और आपदा के बीच घिरे बाशिंदों की कठिनाइयों का हल सुझाने के लिए रियल वर्ल्ड सॉल्यूशन पर काम किया।
उन्होंने असल रोबोट में प्री-प्रोग्रामिंग की चुनौतियों पर पार करने में कामयाबी हासिल की है’। वहीं, कार्तिकेय और प्रखर ने बताया कि सबसे मुश्किल काम रोबोट को काम में लगाना था।
इसके लिए उन्होंने पहले रोबोट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग के बारे में सीखा और बाद में इसकी प्री-प्रोग्रामिंग करने में वे कामयाब हुए।
इस चुनौती के तहत थ्री डी प्लेइंग फील्ड में पॉइंट्स अर्जित करने और कोर वैल्यूज द्वारा निर्देशित चिह्नित समस्या का हल तलाशने के लिए ऑटोनॉमस रोबोट की प्रोग्रामिंग शामिल थी।
कुदरती कहर में ऐसी प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं, जहां टीमों को इस बात का पता लगाना है कि जब ऐसी घोर कुदरती विपदाएं आती हैं तो लोगों के रहने, काम करने व खेलकूद वाले स्थानों पर क्या-क्या राहत एवं बचाव कार्य किए जा सकते हैं।
इनमें रोबोट्स की मदद से इवेक्यूएशन साइन की पोजिशनिंग, हवाई अड्डे पर रन-वे पर से मलबा हटाना, रन-वे पर कारगो प्लेन सुरक्षित ढंग से उतारना, ढांचों को दोबारा खड़ा करना, जरूरतमंद लोगों के बीच जरूरी रसद आदि पहुंचाना शामिल है।
- कविता वाधवा, प्राचार्य