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मूक-बधिरों की सांकेतिक भाषा पर होगा रिसर्च
डिजीटल टीम/लखनऊ
Updated Thu, 07 Nov 2013 02:47 AM IST
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उ. प्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में देश का अनूठा सांकेतिक भाषा केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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यूनाइटेड किंगडम की लंकाशायर यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइन (सांकेतिक) लैग्वेजेज एंड डेफ स्ट्डीज की मदद से यह केंद्र स्थापित होगा।
यहां मूक-बधिरों की सांकेतिक भाषा पर रिसर्च किया जाएगा और एक्सपर्ट तैयार किए जाएंगे।
यहां मूक-बधिरों की समस्याओं के निराकरण के उपाय खोजने के लिए भी रिसर्च होंगे। गुरुवार को दोनों यूनिवर्सिटी के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) साइन किया जाएगा।
इस केंद्र में ऐसे मूक-बधिर स्टूडेंट जिन्होंने किन्हीं कारणों से कक्षा-आठ के बाद पढ़ाई छोड़ दी है वह यहां पर एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स बैचलर प्रेपरेटरी प्रोग्राम फॉर डेफ स्ट्डीज में प्रवेश ले सकेंगे।
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एक वर्षीय कोर्स की पढ़ाई के बाद वह सीधे बैचलर ऑफ आर्ट्स इन एप्लाइड साइन (सांकेतिक) लैंग्वेज के डिग्री कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।
डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी ने बताया कि सांकेतिक भाषा केंद्र में फैकल्टी एक्सचेंज व सपोर्ट, साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर और मॉस्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे।
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मूक-बधिरों की समस्याओं का किस तरह निस्तारण आसानी से किया जाए, इस पर रिसर्च भी होगा। इस इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर प्रो. यूलरिक जेशॉन गुरुवार को यहां मौजूद रहेंगी।