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बीटेक के पेपर में दो बार पूछे तीन सवाल
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Mon, 23 Dec 2013 10:43 AM IST
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उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के परीक्षा विभाग की लापरवाही का नमूना रविवार को देखने को मिला। प्रश्नपत्र सेट करने में हुई भारी चूक के कारण परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों के ठंड में पसीने छूट गए।
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बीटेक (मैकेनिकल ग्रुप) के थर्ड सेमेस्टर की रविवार को थर्मोडायनिमिक्स की परीक्षा थी। प्रश्नपत्र कोड ईएमई 303 के पांचवें खंड के तीनों प्रश्न ऐसे थे, जो प्रश्नपत्र में कहीं न कहीं पूछे गए हैं।
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छात्र उलझन में पड़ गए कि वह पांचवें खंड को हल करें या नहीं। फिलहाल, कक्ष निरीक्षक भी उनकी कोई मदद नहीं कर पाए। ऐसे में परीक्षा विभाग की इस चूक का खामियाजा छात्रों को भुगतना होगा।
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रविवार को यूपीटीयू के बीटेक (मैकेनिकल ग्रुप) थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा थी। इस परीक्षा में खंड दो के सी पार्ट में दूसरा सवाल था कि वॉट आर द कॉजेज ऑफ इररिवर्सबिलिटी।
डिस्कस इररिवर्सबिलिटी इन रिफ्रेंश टू फ्री एक्सपेंशन प्रॉसेस। इसी तरह खंड तीन के सी पार्ट का पहला प्रश्न था कि डिफाइन डेड स्टेट, एवेबिलिटी एंड इररिवर्सबिलिटी।
खंड चार के सी पार्ट में पहला सवाल था स्ट्रीम इंटर ए थ्रोटेल वैल्यू एट 10 एमपीए एंड कम्स ऑउट ऑफ द वैल्यू एट 0.05 एमपीए एंड 95 डिग्री सेल्शियस फाइंड द क्वॉलिटी ऑफ स्ट्रीम इंटरनिंग द थ्रोटेल वैल्यू।
इन्हीं तीनों सवालों को प्रश्नपत्र के खंड पांच में भी पूछा गया था। अब छात्र असमंजस में पड़ गए कि प्रश्नों को हल करें या नहीं। अगर एक भी खंड छोड़ा तो नंबर कट जाएंगे और अगर दोनों खंडों को पूरा किया तो भी नंबर कटने की आशंका थी।
ऐसे में कुछ स्टूडेंट्स ने तो दोबारा इन सवालों को हल किया और कुछ ने इन्हें छोड़ दिया। स्टूडेंट्स का कहना था कि अगर इस तरह सवाल पूछे गए तो तैयारी करने के बावजूद उन्हें अच्छे नंबर कैसे मिलेंगे।
फिलहाल स्टूडेंट यूपीटीयू की इस व्यवस्था से बेहद परेशान हैं।
परीक्षा विभाग छह का काम दो के भरोसे
यूपीटीयू के दोबारा अस्तित्व में आने के बाद अब परीक्षा विभाग के जिम्मे प्रदेश भर में 850 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। ऐसे में परीक्षा विभाग में अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए लेकिन यूपीटीयू के पास तो परीक्षा नियंत्रक भी नहीं है।
अपर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विक्रम सिंह और दूसरे संयुक्त परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार हैं। जबकि परीक्षा में अधिकारियों के छह पद हैं।
इसमें एक पूर्णकालिक परीक्षा नियंत्रक, एक अपर परीक्षा नियंत्रक, दो उप परीक्षा नियंत्रक व दो संयुक्त परीक्षा नियंत्रक शामिल हैं। 2010 में इस यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अंजनी कुमार थे।
लेकिन इसके बाद से कोई परीक्षा नियंत्रक नहीं बनाया गया है। ऐसे में अब परीक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा स्टूडेंट्स को उठाना पड़ रहा है।