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यूपी में खत्म हुआ यूपी बोर्ड से पढ़ने का क्रेज?

Thu, 03 Sep 2015 04:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 03 Sep 2015 04:35 PM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए नौंवी और 11वीं में पंजीकरण पर बीते साल हुई सख्ती का असर इस साल नजर आ रहा है। बीते साल राजधानी में सबसे ज्यादा पंजीकरण करने वाले कॉलेजों में इस साल पंजीकरण काफी कम हो गया है।

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बीते साल नन्हें सिंह स्मारक और महेश सिंह सरस्वती इंटर कॉलेजों में एक-एक कक्षा में पंजीकरण की संख्या जहां हजार के पार पहुंच गई थी। इस साल यह संख्या छह सौ के आसपास सिमट गई है।
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यूपी बोर्ड में हर साल मान्यता प्राप्त सेल्फ फाइनेंस स्कूल में स्टूडेंट्स न होने के बावजूद बाहरी बच्चों के परीक्षा फॉर्म भरवाए जाते हैं। बाद में शिफ्टिंग सूची में खेल करके मनचाहा सेंटर बनवाकर नकल का खेल खेला जाता है।
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बीते साल राजधानी के नन्हें सिंह स्मारक इंटर कॉलेज ने पंजीकरण के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। यहां तक कि एक कक्षा में एक हजार से ज्यादा दाखिले कर डाले। इसी तरह चंद्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज, जावेद अली इंटर कॉलेज, महेश सिंह सरस्वती, कुंसर आसिफ अली और एसपी सिंह इंटर कॉलेजों पर फर्जी पंजीकरण के आरोप लगे थे।

फर्जी पंजीकरण रद्द होता तो पड़ता और भी असर

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जिला अधिकारी द्वारा जांच में नन्हें सिंह स्मारक, चंद्रशेखर आजाद और सेंट फ्लोरेंस इंटर कॉलेजों में फर्जी पंजीकरण की पुष्टि भी हुई थी। बाकी कॉलेजों में पंजीकरण के मुकाबले छात्र संख्या काफी कम मिली थी।

इस वजह से नन्हेंसिंह स्मारक, शेखर आजाद इंटर कॉलेज, सेंट फ्लोरेंस नाइटेंगल इंटर कॉलेजों को बोर्ड परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया। इसका असर इस साल पंजीकरण पर दिख रहा है। इन कॉलेजों में पंजीकरण की संख्या में काफी अंतर आया है।

इससे साफ है कि इन कॉलेजों में पंजीकरण को लेकर काफी घपलेबाजी है और जब भी सख्ती की जाती परीक्षा देने वालों की संख्या में अपने आप ही कमी होने लगती है।

बीते साल बोर्ड परीक्षा के दौरान साफ तौर कई विद्यालयों में फर्जी पंजीकरण की पुष्टि हुई थी। इस वजह से उन्हें बोर्ड परीक्षा केंद्र की सूची से भी हटाया गया था। बोर्ड ने भी इन स्कूलों का निरीक्षण कराया था।

पंजीकरण फर्जी पाए जाने पर उसे रद्द करने का प्रावधान है। इसके बावजूद कॉलेजों में पंजीकरण रद्द नहीं किया गया। इस वजह से कार्रवाई का असर इन कॉलेजों पर अपेक्षाकृत काफी कम हुआ है।

बोर्ड के निर्देश के बाद अगर फर्जी पंजीकरण कैंसिल हो जाता तो शायद यह संख्या और भी कम होती।

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