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छात्र संघ चुनाव में क्यों हारी पुसू-एनएसयूआई? 5 बड़े कारण

Thu, 27 Aug 2015 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 27 Aug 2015 10:25 AM IST
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reasons behind soi victory in student council election

एनएसयूआई पिछले दो बार से काउंसिल चुनाव जीतता आ रहा था, लेकिन इस बार उसका हैट्रिक का ख्वाब पूरा नहीं हो पाया। सोई ने एनएसयूआई को चारों खाने चित कर दिया। एनएसयूआई की हार का मुख्य कारण आपसी फूट और प्रेसिडेंट पद के दावेदार हार्दिक नैन का नॉमिनेशन रद्द होना माना जा रहा है।

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- एकजुटता के साथ कैंपस में सक्रियता
- एनएसओ, इनसो और हिम्सू से अलायंस
- पंजाब में शिअद की सरकार से मिली मदद
- पुसू और एनएसयूआई से बड़े चेहरों को तोड़ना
- वरिष्ठ छात्र नेताओं के हाथों में कमान

एनएसयूआई की हार के पांच कारण

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- चुनाव घोषणा से पहले से चली आ रही आपसी फूट
- प्रेसिडेंट केदावेदार हार्दिक नैन का ऐन मौकेपर अटेंडेंस की वजह से नॉमिनेशन कैंसल होना
- प्रचार की बजाए हार्दिक मामले में खोया अधिकतर समय
- काउंसिल पर लगने वाले फंड में गड़बड़ी केआरोप
- लगातार दो बार से मिलने वाली जीत का अहंकार

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पुसू की हार के पांच कारण

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- एबीवीपी के साथ गठबंधन और उससे स्टूडेंट पार्टी के टैग पर पड़ा असर
- चुनाव की घोषणा केबाद कई छात्र नेताओं का संगठन छोड़ना
- फंड का अभाव
- अपने असली मुद्दों को चुनाव में नहीं भुना पाना
- छात्र नेता नवल को छोड़ बाकी में अनुभव की कमी

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पुसू और सोपू का वजूद खतरे में

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पीयू छात्र राजनीति में राजनीतिक दलों का सीधे तौर पर हस्तक्षेप कभी नहीं रहा। पीयू में हमेशा सोपू और पुसू छात्र संगठनों का ही दबदबा रहा है। लेकिन अब कैंपस के कई संगठन वजूद बचाने में जुटे हैं।

सोपू की हालत तो इतनी खस्ता है कि इस बार संगठन ने चुनाव ही नहीं लड़ा। दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं ने राष्ट्र स्तर की राजनीतिक पार्टियों से हाथ मिलाकर राजनीति में कॅरियर बनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

सोपू के बड़े नेता वीरेंद्र सिंह ढिल्लों और मनोज लुबाना ने 2012 में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कैंपस दौरे पर सोपू को छोड़ एनएसयूआई ज्वाइन की थी।

2013 छात्र काउंसिल चुनाव में पहली बार एनएसयूआई ने जीत हासिल की। ढिल्लों और लुबाना ने एनएसयूआई को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।

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