फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   reality of sarv shiksha abhiyan in up

स्कूल तो बढ़ते जा रहे, पर घटते जा रहे बच्चे

Fri, 02 Aug 2013 08:50 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 02 Aug 2013 08:50 AM IST
विज्ञापन
reality of sarv shiksha abhiyan in up

सर्व शिक्षा अभियान के करोड़ों रुपये का बजट और निशुल्क शिक्षा की

विज्ञापन
व्यवस्था भी सरकारी स्कूलों की किस्मत बदलने में कामयाब होती नहीं दिख रही।

तमाम कोशिशों के बाद भी इन स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। निचले वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित स्कूलों में पढ़ाने से कतरा रहे हैं।

नतीजतन परिषदीय स्कूलों में पिछले सात साल में छात्रों के एडमिशन में बहुत कमी आई है। आलम ये है कि साल-दर-साल स्कूलों की संख्या तो बढ़ रही है पर उनमें छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। पढ़ाई की खराब गुणवत्ता के कारण ये स्थिति बनी है।


आई 30 प्रतिशत की गिरावट
वर्तमान शैक्षिक सत्र में भले ही बच्चों की नामांकन संख्या दो से तीन प्रतिशत तक सुधरी हो लेकिन 2005-06 के मुकाबले इसमें 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर स्कूलों और बच्चों पर किए जाने वाले खर्चों में कई गुना इजाफा हुआ है।


शैक्षिक सत्र 2005-06 में राजधानी में 1491 परिषदीय स्कूल थे जिनमें 2,52,490 बच्चे रजिस्टर्ड थे। 2011-12 तक ये करीब 80 हजार बच्चे कम हो गए।

शैक्षिक सत्र 2012-13 तक बच्चों की संख्या करीब 1.60 लाख तक सिमट गई। हालांकि, वर्तमान सत्र में इस स्थिति के कुछ सुधरने के आसार हैं। अब तक के आंकड़ों पर भरोसा करें तो इस बार करीब दो से तीन प्रतिशत दाखिले ज्यादा हुए हैं।


पढ़ाने के अलावा हैं दर्जनों काम

परिषदीय स्कूल पहले ही शिक्षकों की भारी कमी मार झेल रहे हैं। ऊपर से सर्व शिक्षा अभियान जैसी बड़ी योजना का बोझ भी शिक्षकों के ऊपर डाल दिया गया है।

शिक्षक मिड-डे मील भी बांट रहा है, स्कूल की बिल्डिंग भी बनवा रहा है, किताबें और यूनिफॉर्म भी बंटवा रहा है। इन सबसे जो समय बचता है उसमें शिक्षक को बीएलओ, जनगणना जैसी योजनाओं में लगा दिया जाता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की साख में गिरावट लाजमी है।

- डॉ. आरपी मिश्र, प्रदेश मंत्री, माध्यमिक शिक्षक संघ

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed