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भाषा ही नहीं, विज्ञान भी है संस्कृत

Mon, 16 Sep 2013 09:36 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Mon, 16 Sep 2013 09:36 AM IST
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rashtriya sanskrit sammelan at indira gandhi pratisthan

संस्कृत सिर्फ एक भाषा ही नहीं, विज्ञान भी है। पूरा विश्व इसकी महत्ता

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स्वीकार रहा है। नासा के वैज्ञानिक संस्कृत की पांडुलिपियों का वैज्ञानिक व्याख्यान करने के लिए भारतीय विद्वानों से संपर्क कर रहे हैं।

ये बातें राज्यपाल बीएल जोशी ने रविवार को राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि संस्कृत का विकास करना है तो इसे सरल स्वरूप में प्रयोग करना होगा।


गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘आधुनिक युग में संस्कृत का महत्व’ विषय पर तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में राज्यपाल ने सवाल किया कि अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, रूस जैसे देशों के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत विभाग हैं तो हमारे देश में ऐसा क्यों नहीं किया जा सका?

संस्कृत के जरिए रोजगार

उन्होंने कहा कि विदेशों में संस्कृत के प्रति तीव्र जिज्ञासा है और यही वजह है कि पूरा विश्व संस्कृत का महत्व जानता है। उन्होंने संस्कृत के जरिए रोजगार विकसित करने की संभावनाओं पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कंप्यूटर पर संस्कृत को प्रचलित करने के लिए की-बोर्ड बनाने की आवश्यकता जताई।


समारोह की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि संस्कृत को बचाना है तो उसे आमदनी, उपयोगिता और रोजगार से जोड़ना होगा। इसके अलावा उन्होंने सम्मेलन में आए सुझावों को कार्यान्वित करने के लिए हरसंभव प्रयास का भरोसा दिलाया।


समारोह में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली के कुलपति प्रो. एपी सच्चिदानंद, कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, लखनऊ परिसर के प्राचार्य प्रो. अर्कनाथ चौधरी आदि मौजूद थे।


सम्मेलन में ये प्रस्ताव रखे गए

सभी स्कूलों में दसवीं तक संस्कृत की पढ़ाई अनिवार्य हो।

जल्द से जल्द संस्कृत आयोग का गठन हो।

जवाहर नवोदय विद्यालयों में संस्कृत अनिवार्य हो।

राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय घोषित किया जाए।

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