उत्तराखंडः दम तोड़ रहा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान
उत्तराखंड में प्राइमरी ही नहीं, माध्यमिक शिक्षा की भी बुरी दशा है। केंद्र की मदद और पहल पर राज्य में चल रहे राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) अल्प समय में ही अधमरा-सा हो गया है। आधे हाईस्कूलों में पांच साल बाद भी शिक्षक नहीं आ सके हैं और पिछले साल भर के दौरान भर्ती हुए कई शिक्षक वेतन को मोहताज हैं।
271 हाईस्कूलों में से 50 फीसदी स्कूलों में शिक्षक नहीं है। बाकी में तबादले के जरिए पुराने शिक्षकों को तैनाती दी गई है। मगर नई नियुक्ति वाले शिक्षकों की जगह पुरानों का ज्यादा वहन करने से केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में प्रदेश के 2050 शिक्षक और कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नसीब नहीं हुआ है। केंद्र की मंशा के मुताबिक अगर इन स्कूलों में नए शिक्षक रखे जाते तो समय पर वेतन और 1517 युवाओं को रोजगार मिलता।
प्रदेश में 2009-10 से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान शुरू किया गया। इसके तहत प्रदेश में 271 नए हाईस्कूल खोले गए। मगर इनमें नई नियुक्ति की जगह पुराने हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों से तबादला कर शिक्षकों को तैनाती दी गई।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक यह शिक्षक नई नियुक्ति की अपेक्षा करीब दोगुना वेतन वाले हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने वेतन देने से हाथ खड़े कर लिए। केंद्र से नए शिक्षक के मानदेय के अनुरूप वेतन मंजूर हुआ। जो पूर्व में मानदेय के रूप में दिया जा चुका है। इन स्कूलों में नये शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी, लेकिन देरी के कारण पुराने स्कूलों से शिक्षकों के तबादले किए गए। रमसा के 271 स्कूलों में नई नियुक्ति होती तो 1517 सहायक अध्यापक के रूप में युवाओं को रोजगार मिलता।
करीब दो हजार शिक्षा कर्मियों का वेतन अटका
रमसा के तहत जूनियर हाईस्कूलों को उच्चीकृत कर 271 नए हाईस्कूल खुले। इनमें वर्तमान में 650 सहायक अध्यापक और 200 प्रधानाध्यापक हैं। आउटसोर्सिंग से रखे 1200 लैब और कार्यालय सहायक हैं। इन सभी का वेतन लटका है।
तो 75 फीसदी वेतन देता है केंद्र
रमसा के स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन का 75 फीसदी वेतन केंद्र और 25 फीसदी राज्य सरकार वहन करती है। नए शिक्षकों का वेतन कम और पुराने शिक्षकों का वेतन अधिक है। ऐसे में केंद्र ने अतिरिक्त वेतन देने से इनकार कर दिया।
25 करोड़ सालाना का अतिरिक्त भार
वर्तमान में रमसा के स्कूलों में तबादलों से 50 फीसदी शिक्षक लाए गए हैं। इन्हें अतिरिक्त वेतन के तौर पर सरकार को 13 करोड़ रुपये सालाना देने होंगे। 100 फीसदी शिक्षकों की तैनाती पर राज्य सरकार को हर साल करीब 25 करोड़ रुपये अतिरिक्त वहन करना पड़ेगा।
इसलिए खोले रमसा के स्कूल
राजनीतिक दबाव में कुछ विधायक और मंत्री अपने क्षेत्रों में विद्यालय खुलवाते रहे हैं, ऐसे में कुछ जगहों पर अधिक स्कूल खुल गए तो कुछ जगहों पर हाईस्कूल नहीं थे। हर पांच किलोमीटर पर हाईस्कूल खोला जा सके, इस उद्देश्य से जूनियर हाईस्कूलों को उच्चीकृत कर हाईस्कूल खोले गए। जिससे बगैर पहुंच वालों के बच्चों को हाईस्कूल मिल सके।
नए और पुराने के वेतन में ये है अंतर
नये सहायक अध्यापक का केंद्र से वेतन का मानक 29 हजार रुपये है, जबकि पुराने शिक्षक 10 से 15 हजार रुपये अधिक पा रहे हैं। प्रत्येक प्रधानाध्यापक के वेतन में 20 हजार रुपये से अधिक का अंतर है।
इसलिए रखे पुराने शिक्षक
एलटी सहायक अध्यापकों की नियुक्ति में देरी के चलते पुराने शिक्षकों को इन विद्यालयों में भेजा गया। शिक्षा विभाग अधिकारियों के मुताबिक सहायक अध्यापक एलटी के 3039 पदों पर भर्ती होनी है। वर्ष 2012-13 में इसके लिए शासन में अधियाचन भेजा गया, लेकिन भर्ती नहीं हो पाई।
इनका है कहना
केंद्र नए शिक्षक की नियुक्ति के मानक के अनुरूप 75 फीसदी हिस्सेदारी देती है। बाकी राज्य सरकार देती हैं। अतिरिक्त वेतन देने से केंद्र के इनकार के बाद राज्य सरकार ने कैबिनेट में अतिरिक्त वेतन खुद वहन करने का प्रस्ताव पास किया है। जीओ हो चुका है। बजट मिलते ही वेतन जारी हो जाएगा।
-एमएस बिष्ट, संयुक्त निदेशक रमसा