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इस कॉलेज में टीचर्स नहीं, सीनियर्स का चलता है फरमान!

Thu, 04 Sep 2014 01:41 PM IST
Updated Thu, 04 Sep 2014 01:41 PM IST
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ragging in GB Pant Polytechnic.

‘सर मेरा नाम रोहित कुमार है। पिता का नाम देवेश कुमार है। मैं बैचलर ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष का छात्र हूं।

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मैं ग्राम व पोस्ट सिखना इलाहाबाद का निवासी हूं।’ जीबी पंत पॉलीटेक्निक में प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स से जब साधारण तौर पर उसका नाम पूछा गया तो एक सांस में उसने अपना पूरा बायोडाटा बता दिया।

साथ ही वह यह बताना नहीं भूला कि परिचय देने में उसे सात सेकंड का समय लगा। जीबी पंत पॉलीटेक्निक में सीनियर स्टूडेंट्स फर्स्ट ईयर के छात्रों के साथ कुछ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं लेकिन अब तक रैगिंग की कोई लिखित शिकायत नहीं आने के कारण इस पर कार्रवाई नहीं हुई है।

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ये हालात! कैसे रुकेगी रैगिंग

ragging in GB Pant Polytechnic.

फर्स्ट ईयर के एक छात्र ने बताया कि हॉस्टल में आने के बाद सीनियर्स ने उन्हें कई फरमान सुनाए। सुबह छह बजे उठना, अपने सीनियर को प्रणाम करना, कमरे पर पहुंचने पर सीनियर्स का अभिवादन करना, पानी पिलाना।

हॉस्टल में चल रही इस रैगिंग पर वार्डन भी ध्यान नहीं देते। संस्थान के अंदर भी रैगिं संबंधी किसी प्रकार की सूचना नहीं दिखाई दी।

रैगिंग रोकने के लिए टोल फ्री नंबर या रैगिंग कमेटी सेल के सदस्यों के नंबर भी संस्थान में नहीं लगाए गए हैं। वहीं, गेट पर भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।

गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाना तो दूर एक चौकीदार तक नहीं तैनात किया गया है। संस्थान में एंटी रैगिंग समिति की स्थापना तो जरूर कर दी गई लेकिन स्टूडेंट्स को इसके बारे में कोई जानकारी तक नहीं है।

जूनियर्स से करते ऐसी मनमानी

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सुबह छह बजे उठना, अपने सीनियर को प्रणाम करना, कमरे पर सीनियर्स के पहुंचने पर उनका अभिवादन करना, उन्हें पानी पिलाना, सात सेेेकंड के अंदर परिचयर देना, केवल पैंट और शर्ट पहनना, तीसरी बटन पर निगाह, सीनियर्स का चेहरा न देखना, जब भी मिलें उन्हें प्रणाम करना।

जीबी पंत पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य केके श्रीवास्तव कहते हैं कि किसी भी छात्र ने कभी ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं की, अगर ऐसा होता तो कार्रवाई जरूर की जाती। संस्थान में एंटी रैगिंग कमेटी का गठन कर दिया गया है।

समिति के सदस्यों के मोबाइल नंबर के फ्लैक्स तैयार करवाकर लगाए जा रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे के प्रावधान के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। अब इस संबंध में समाज कल्याण विभाग को लिखा जाएगा।

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