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देखिए ये खेल, जो फर्स्ट इयर में फर्स्ट, मिड टर्म में फेल
सुमित सिंह श्यौराण
Updated Tue, 03 Dec 2013 06:36 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी के गणित विभाग से एमएससी (आनर्स) के छात्र ने विभाग के शिक्षकों पर उसे जानबूझकर फेल करने का आरोप लगाया है।
छात्र का कहना है कि पीयू प्रशासन से स्पेशल एग्जाम की अनुमति मिलने के बावजूद उसकी परीक्षा नहीं ली गई और दो पेपर में उसे फेल कर दिए।
इस मामले को लेकर छात्र सलील कुमार पिछले कई दिनों से पीयू के आला अधिकारियों के पास इंसाफ के लिए जोर लगा रहा है। छात्र का आरोप है कि प्रथम वर्ष में उसने 61.7 फीसदी अंक हासिल किए। लेकिन, मिड टर्म एग्जाम में उसे जानबूझकर फेल कर दिया गया। ऐसे में उसकी परसेंटेज 60 फीसदी से कम हो गई।
एमएससी (गणित) के छात्र सलील ने बताया कि नवंबर 2011 में बीमार होने के कारण वह हाउस टेस्ट नहीं दे सका। दिसंबर में उसने डीयूआई और विभागाध्यक्ष से उसकी दोबारा परीक्षा लेने का आवेदन किया।
14 फरवरी 2012 को उसे स्पेशल चांस के तहत पेपर देने की अनुमति दे दी गई। सलील ने बताया कि उसके तीन पेपर में से दो को देने की संबंधित प्रोफेसर ने अनुमति दे दी।
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लेकिन, प्रो.रेणू बजाज इसके लिए तैयार नहीं र्हुइं। 25 अप्रैल और 17 मई को दो पेपर पीयू प्रशासन ने ले लिए। सलील ने आरोप लगाया कि एक पेपर में उसके 19 अंक थे, लेकिन उसके डीएमसी में 9 अंक दिए गए।
जबकि, उसने पेपर में 19 अंक खुद देखे थे। उधर, एक पेपर में सभी सवाल हल करने पर भी उसे 0 अंक दिया गया। कुमार ने कहा कि उसने अपने पेपर दिखाने के लिए पीयू प्रशासन को चिट्ठी लिखी, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गया।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में उत्तर पुस्तिकाएं नष्ट करने की बात कही गई। सलील कहते हैं कि नियमों के तहत एक साल तक उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित रखी जाती हैं।
वीसी ने भी नहीं सुनी बात
सलील का आरोप है कि शिक्षकों की इस कारगुजारी के कारण वह काफी समय से मानसिक तौर पर परेशान है। शिक्षक उसके कैरियर से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सलिल ने बताया कि उसने इस मामले में पीयू कुलपति से भी मिलकर अपनी बात रखी। लेकिन, उन्होंने इस मामले में संबंधित विभाग से ही संपर्क करने को कह दिया।
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छात्र का कहना है कि पीयू प्रशासन से स्पेशल एग्जाम की अनुमति मिलने के बावजूद उसकी परीक्षा नहीं ली गई और दो पेपर में उसे फेल कर दिए।
इस मामले को लेकर छात्र सलील कुमार पिछले कई दिनों से पीयू के आला अधिकारियों के पास इंसाफ के लिए जोर लगा रहा है। छात्र का आरोप है कि प्रथम वर्ष में उसने 61.7 फीसदी अंक हासिल किए। लेकिन, मिड टर्म एग्जाम में उसे जानबूझकर फेल कर दिया गया। ऐसे में उसकी परसेंटेज 60 फीसदी से कम हो गई।
एमएससी (गणित) के छात्र सलील ने बताया कि नवंबर 2011 में बीमार होने के कारण वह हाउस टेस्ट नहीं दे सका। दिसंबर में उसने डीयूआई और विभागाध्यक्ष से उसकी दोबारा परीक्षा लेने का आवेदन किया।
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14 फरवरी 2012 को उसे स्पेशल चांस के तहत पेपर देने की अनुमति दे दी गई। सलील ने बताया कि उसके तीन पेपर में से दो को देने की संबंधित प्रोफेसर ने अनुमति दे दी।
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लेकिन, प्रो.रेणू बजाज इसके लिए तैयार नहीं र्हुइं। 25 अप्रैल और 17 मई को दो पेपर पीयू प्रशासन ने ले लिए। सलील ने आरोप लगाया कि एक पेपर में उसके 19 अंक थे, लेकिन उसके डीएमसी में 9 अंक दिए गए।
जबकि, उसने पेपर में 19 अंक खुद देखे थे। उधर, एक पेपर में सभी सवाल हल करने पर भी उसे 0 अंक दिया गया। कुमार ने कहा कि उसने अपने पेपर दिखाने के लिए पीयू प्रशासन को चिट्ठी लिखी, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गया।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में उत्तर पुस्तिकाएं नष्ट करने की बात कही गई। सलील कहते हैं कि नियमों के तहत एक साल तक उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित रखी जाती हैं।
वीसी ने भी नहीं सुनी बात
सलील का आरोप है कि शिक्षकों की इस कारगुजारी के कारण वह काफी समय से मानसिक तौर पर परेशान है। शिक्षक उसके कैरियर से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सलिल ने बताया कि उसने इस मामले में पीयू कुलपति से भी मिलकर अपनी बात रखी। लेकिन, उन्होंने इस मामले में संबंधित विभाग से ही संपर्क करने को कह दिया।