पीयू में भारत-पाक बंटवारे की यादें होंगी ताजा

सुमित सिंह श्यौराण Updated Mon, 25 Nov 2013 10:51 AM IST
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देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी में 4 दिसंबर को भारत-पाकिस्तान बंटवारे की यादें फिर से ताजा होंगी।
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आजादी से पहले लाहौर स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी और उसके बाद सोलन और फिर चंडीगढ़ के सफर के हिस्सेदार रहे रिटायर्ड कर्मचारियों को पीयू में पहली बार सम्मानित किया जाएगा।
पीयू नॉन टीचिंग एसोसिएशन रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए खास समारोह आयोजित कर रहा है। पीयू ओल्ड कन्वोकेशन ग्राउंड में सुबह 10:00 से दोहपर 1:00 बजे तक यह कार्यक्रम होगा।
पीयू नॉन टीचिंग एसोसिएशन की ओर से सभी को कार्यक्रम में आने के लिए चिट्ठी भेजी जा रही है। कार्यक्रम में पीयू कुलपति प्रो. अरुण ग्रोवर, रजिस्ट्रार प्रो. एके भंडारी, कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डा. परविंदर सिंह विशेष तौर पर उपस्थित होंगे।  

98 साल के मलूक सिंह करेंगे शिरकत:
तीस जुलाई 1945 को पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर में दफ्तरी पद पर नियुक्त होने वाले 98 साल के मलूक सिंह कार्यक्रम में सबसे उम्रदराज पीयू रिटायर्ड कर्मचारी होंगे।

पीयू कैंपस में रहने वाले मलूक सिंह की बंटवारे से जुड़ीं यादें अब भी ताजा हैं। अमर उजाला से बातचीत में मलूक सिंह ने बताया कि 1947 बंटवारे के बाद लाहौर यूनिवर्सिटी के आखिरी दिन रजिस्ट्रार मदन गोपाल सिंह पर कातिलाना हमला कर दिया गया। वह मलूक सिंह के सुरक्षा दस्ते में शामिल थे।

घटना के बाद जख्मी सिंह को अस्पताल में लेकर गए, लेकिन वहां डॉक्टरों की अनदेखी के कारण रजिस्ट्रार नहीं बच सके। लाहौर से सोलन होते हुए चंडीगढ़ पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंचे मलूक सिंह 1979 में रिटायर्ड हुए।

आठवीं पास मलूक सिंह उर्दू के अच्छे जानकार हैं। आज भी वे बिना चश्मे के अखबार पढ़ लेते हैं। कांगड़ा में जन्मे मलूक के बेटे जगमोहन कंग पीयू में ही सुपरिंटेंडेंट (कंप्यूटर यूनिट) हैं और बेटी सुरेंद्र पिछले महीने ही असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद से रिटायर हुई है। नौवीं में पढ़ने वाली पोती अदिति को मलूक सिंह अब भी पाकिस्तान में बिताए दिनों की बातें बताते हैं।

हमले के बाद खाली हाथ लौटे भारत: आरडी शर्मा
89 वर्षीय आरीडी शर्मा ने भी पीयू लाहौर में क्लर्क की नौकरी की और फिर चंडीगढ़ पहुंचे। चार दिसंबर को नॉन टीचिंग के कार्यक्रम में सेक्टर-44 स्थित मकान नंबर 3537 निवासी आरडी शर्मा भी विशेष अतिथि होंगे।

क्लर्क की नौकरी से शुरू कर असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद से रिटायर हुए शर्मा के साथ भी बंटवारे की यादें जुड़ी हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि पीयू लाहौर में सभी हिंदुओं को भारत लौटने के आदेश कर दिए थे।

आखिरी दिन कैंपस में ऐसा कत्लेआम हुआ कि वह अपनी मनपसंद घड़ी और अन्य सामान को यूनिवर्सिटी में छोड़, जान बचाकर अमृतसर पहुंचे। उन्होंने बताया कि कई महीनों तक बिना सामान के ही सोलन में यूनिवर्सिटी कैंपस में रहे।

पैसे जुटाने के लिए परीक्षा आयोजित की गई। पुलिस छावनी में रहकर कर्मचारियों ने दिन काटे। उन्होंने बताया कि बंटवारे के समय 150 के करीब कर्मचारी पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे।

वर्ष 1948 में पाकिस्तान ने हॉकी मैच देखने के लिए एक दिन का सभी को वीजा दिया था। उन्होंने इस मौके का लाभ उठाकर पाकिस्तान स्थित पीयू कैंपस में पहुंचकर पुराने दोस्तों से यादें सांझा कीं। इस उम्र में भी समाजसेवा से जुड़े शर्मा को कनाडा सरकार ने स्टेट अवार्ड से नवाजा है।

गिद्दे और भंगड़े से होगा स्वागत
चार दिसंबर को होने वाले कार्यक्रम में पहुंचने वाले मेहमानों के मनोरंजन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सभी रिटायर्ड कर्मचारियों को ट्राफी और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

लाहौर में पीयू को ज्वाइन करने वाले कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों को अपने अनुभव सांझा करने का मौका भी दिया जाएगा। नॉन टीचिंग एसोसिएशन ने मेहमानों के लिए खास लंच की व्यवस्था भी की है।

दूरदराज से आने वालों के रहने की व्यवस्था भी की जा सकती है। कार्यक्रम के संयोजक दीपक कौशिक ने बताया कि उस दिन नॉन टीचिंग स्टाफ भंगड़े और गिद्दे से लोगों का मनोरंजन करेगा।

इन इवेंट की जिम्मेदारी कुलदीप कौर, मधु और पम्मी को सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि 750 रिटायर्ड कर्मचारियों को कार्यक्रम की चिट्ठी भेजी जा चुकी है। इस संबंध में किसी तरह की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 8146700440 पर संपर्क किया जा सकता है।
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