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पीयू सिंडीकेट चुनाव में अब तक का सबसे बड़ा उल्टफेर

Tue, 16 Dec 2014 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 16 Dec 2014 09:16 AM IST
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Punjab University Chandigarh Syndicate Election

पंजाब यूनिवर्सिटी में सोमवार को हुए सिंडीकेट चुनाव में जीके चतरथ गुट का परचम लहराया। सिंडीकेट की कुल 15 सीटों में से चतरथ गुट ने 10 सीटों पर बाजी मारी। इस जीत में डीएवी, बीजेपी और यूनिवर्सिटी गुट की भी हिस्सेदारी रही। चुनाव परिणामों में चतरथ गुट को चार, बीजेपी को एक, यूनिवर्सिटी गुट को तीन और डीएवी गुट को दो सीटें मिलीं। वहीं, अशोक गोयल गुट अकेले दम पर पांच सीट जीतने में कामयाब रहा।

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पिछले साल चतरथ गुट को आठ और अशोक गोयल गुट को 7 सीटें मिली थीं।  सिंडीकेट चुनाव में आर्ट्स, कंबाइंड और साइंस तीन फैकल्टी के लिए ही मतदान हुआ। आर्ट्स फैकल्टी की सभी तीनों सीटों पर चतरथ गुट के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इनमें डा. दिनेश कुमार, डा. प्रवीण कौर चावला और डा. संजीव कुमार अरोड़ा शामिल हैं। साइंस फैकल्टी में डा. इकबाल सिंह संधू, जरनैल सिंह और प्रो. नवदीप गोयल ने जीत हासिल की।
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वहीं, कंबाइंड फैकल्टी में डा. गुरदीप सिंह शर्मा, प्रो. कर्मजीत सिंह और प्रो. रौनकी राम ने बाजी मारी। लैंग्वेज और मेडिकल साइंस फैकल्टी में सदस्यों को निर्विरोध चुन लिया गया। सिंडीकेट में इस बार भी दो महिलाओं प्रो. राजेश गिल और डा. प्रवीण कौर चावला को भी प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।
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15 से 5 पर पहुंचा गोयल ग्रुप
पीयू सिंडीकेट में अशोक गोयल गुट का दबदबा दो साल से कम हो रहा है। 2013 में गोयल ग्रुप ने सिंडीकेट की सभी 15 सीटों पर कब्जा किया था, जबकि 2014 में यह संख्या घटकर 7 और 2015 में 5 रह गई। वहीं, चतरथ गुट फिर से सिंडीकेट में दबदबा बना रहा है। 2012 में चतरथ ग्रुप ने 13 सीटें जीती। 2011 में 12 सीटें और 2010 में सभी 15 सीटों पर जीत हासिल की थी।

सबसे बड़ा उलटफेर

सिंडीकेट चुनाव में सबसे रोमांचक मुकाबला कंबाइंड फैकल्टी में हुआ। पहली बार डीयूआई प्रो. एके भंडारी को गोयल गुट से चुनावी मैदान में उतारा गया। कंबाइंड फैकल्टी की तीन सीटों के लिए हुए चुनाव में छह प्रत्याशी मैदान में थे। प्रो. भंडारी 33 वोट लेकर पांचवें स्थान पर रहे। सिंडीकेट चुनाव का यह सबसे बड़ा उलटफेर रहा। गोयल ग्रुप ने बाद में मेडिकल साइंस फैकल्टी की दो सीटों में से एक पर प्रो. भंडारी को उतारा और वह सर्वसम्मति से चुन लिए गए।

कई दिग्गज नहीं पहुंचे वोट डालने
सिंडीकेट चुनाव में इस साल कई दिग्गज वोट डालने नहीं पहुंचे। पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल, सीनेट सदस्य पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सहित कई हस्तियों ने वोट नहीं डाला। वोटिंग करने वालों में पंजाब के मोगा स्थित निहाल सिंह से विधायक महेश इंद्र सिंह, पंजाब और यूटी के डीपीआई (कालेज), विधायक कुलजीत सिंह नागरा और डीएवी मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन पूनम सूरी वोट डालने जरूर पहुंचे थे।    
 
अन्य फैक्ट्स
- साइंस फैकल्टी से चुनाव लड़ने वाले यूआईएलएस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर अजय रंगा सिर्फ एक वोट से हार गए।
-अशोक गोयल ग्रुप से वोटिंग के बाद चुनाव जीतने वालों में सिर्फ प्रो. कर्मजीत सिंह रहे।
- कंबाइंड फैकल्टी से डीयूआई के प्रो. एके भंडारी के हारने के बाद अशोक गोयल ग्रुप ने मेडिकल साइंस फैकल्टी से एक तय उम्मीदावर को हटाकर प्रो. भंडारी को सीट दी।

कोट्स.........
मैं पिछले 48 वर्षों से सिंडीकेट से जुड़ा हूं। हमेशा लोगों के हितों के लिए काम किया है। लोगों के विश्वास ने ही जीत दिलाई है। डीएवी, बीजेपी और पीयू ग्रुप ने भी चुनाव में साथ दिया। पीयू की बेहतरी के लिए सभी मिलकर काम करेंगे।

- जीके चतरथ ,सीनियर सीनेटर

हमने हमेशा सच का रास्ता पकड़ा है और उसे ही फॉलो करूंगा। हमारे ग्रुप को अकेले दम पर पांच सीटें मिली हैं, जबकि विरोधी गुट ने कई अन्य ग्रुप को मिलाकर जीत हासिल की है। हमने सिर्फ जीत के लिए किसी के साथ कोई समझौता करना ठीक नहीं समझा। पीयू के सबसे सीनियर प्रोफेसर को वोट नहीं मिलना शिक्षकों की सोच को साबित करता है।
- अशोक गोयल

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