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33 साल से पीयू से हक मांग रहा है ये बुजुर्ग

Wed, 15 Jan 2014 09:15 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Jan 2014 09:15 AM IST
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Punjab University and A Clerk's Pension
एक तरफ देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी का तमगा पाने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी खुद को हाईटेक करने में जुटी है तो दूसरी तरफ पीयू के कर्मचारी ही अपने हकों के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं।
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पंजाब यूनिवर्सिटी के नॉन टीचिंग विभाग से 2001 में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के पद से रिटायर हुए 73 वर्षीय गोविंद राकेश 33 सालों से अपने हक के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं तीन बार कोर्ट से केस जीतने के बाद भी पीयू प्रशासन गोविंद को उनका हक नहीं दे रहा।
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आपबीती में गोबिंद ने कहा कि कुलपति तक उन्होंने अपना एरियर और पेंशन बैनिफिट देने की अपील की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 73 साल के गोबिंद अभी भी हार नहीं माने और अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखने की बात कहते हैं।
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उन्होंने बताया कि 1966 में उन्होंने पीयू में क्लर्क पद पर नियुक्ति पाई। 1980 में सीनियारिटी के आधार पर 104 क्लर्क को असिस्टेंट पद पर प्रमोट करने के आदेश जारी कर दिए। उनका नंबर 75वां होते हुए भी उन्हें प्रमोट नहीं किया गया।

दो-तीन महीने बीतने के बाद उन्हें बताया गया कि उनकी सर्विस बुक का रिकार्ड ठीक नहीं है, लेकिन गोबिंद ने कहा कि ऐसा उन्हें भी नहीं पता था। मामले को उन्होंने पूर्व कुलपति प्रो.आरसी पाल के पास लेकर गए।

कुलपति ने भी गोबिंद की प्रमोशन रोके जाने को गलत बताया और उन्हें तुरंत प्रमोट करने के आदेश दिए, लेकिन पीयू के अधिकारियों ने प्रमोशन देने की जगह कोर्ट में केस कर दिया। गोबिंद ने बताया कि तीन बार उनका मामला कोर्ट में गया।

सभी में पीयू प्रशासन की गलती बताई गई और उन्हें सभी बकाया देने के आदेश दिए गए। उन्होंने बताया कि 4 मई 2013 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जस्टिस एएन जिंदल की बैंच ने पीयू प्रशासन को उनके सभी पेंशन और एरियर बैनिफिट देने के आदेश दिए। लेकिन सात महीने बीतने के बाद भी पीयू प्रशासन अभी भी उनकी कोई बात नहीं सुन रहा।

उन्होंने बताया कि अपनी फाइल लिए हर रोज पीयू अधिकारियों के कमरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी बात कोई नहीं सुन रहा। गोबिंद कहते हैं कि पीयू अपने रिटायर्ड कर्मचारी के साथ ऐसे कर रहा है तो आम जनता के साथ कैंपस में कैसा व्यवहार किया जाता होगा।  

 
इस मामले में मैने आज ही पीयू एफडीओ से बातचीत की है। मामला कई साल पुराना है। गोबिंद की पुरानी फाइलों को ढूंढा जा रहा है, उनकी एक इंक्रीमेंट को लेकर कुछ असमंजस था। एक हफ्ते में गोबिंद को उनका पूरा बकाया दे दिया जाएगा।
प्रो.एके भंडारी (रजिस्ट्रार पंजाब यूनिवर्सिटी) 
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