{"_id":"39e0a6fa280e69ceb776df6b5b278849","slug":"pu-notice-of-2-88-crore-to-student-union-leaders-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"PU: 50 छात्र नेताओं को 2.88 करोड़ का नोटिस","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
PU: 50 छात्र नेताओं को 2.88 करोड़ का नोटिस
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 17 Sep 2015 12:47 AM IST
विज्ञापन
छात्र संगठनों के चुनाव में पीयू और कालेजों में छात्र सगठनों के बीच में जमकर पोस्टरबाजी हुई है । नगर निगम ने अब छात्र सगठनों के 50 नेताओं को 2.88 करोड़ जुर्माने के नोटिस भेजे हैं।
विज्ञापन
नगर निगम की ओर से 50 डिफाल्टरों को नोटिस भेजे गए हैं। इनमे पीयू में चुनाव के बाद जीतने वाली पार्टी को भी नोेटिस शामिल है। जिसमें मतदाताओं के धन्यवाद के पोस्टर शहर में लगाए गए थे।
विज्ञापन
नगर निगम के सहायक कमिश्नर भूपेश चौधरी का कहना है कि इनमें अधिकतर छात्र संगठनों के नेता शामिल हैं, जिन्हें जुर्माने के नोटिस भेजे गए हैं। इन सभी को विज्ञापन कंट्रोल एक्ट के तहत नोटिस भेजे गए हैं। पीयू चुनाव के समय नगर निगम ने 22 छात्र नेताओं के खिलाफ पोस्टर लगाने के मामले भी दर्ज करवाए थे।
विज्ञापन
सहायक कमिश्नर भूपेश चौधरी ने कहा कि नगर निगम, सिविल डिफेंस, और चंडीगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने छात्र सगठनों के चुनाव के समय कई पोस्टर और साइन बोर्ड शहर में उतरवाए। टीमों ने पोस्टर और साइन बोर्ड शहर के अलग अलग जगह से हटाए, उनकी फोटोग्राफी भी करवाई है। विज्ञापन कंट्रोल एक्ट के तहत 51 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं जिनमें 50 छात्र नेता हैं।
पिछले चुनाव में भी भेजे थे 53 लाख 73 हजार के नोटिस
छात्र संगठनों के पिछले चुनाव में भी नगर निगम ने छह नेताओं को 53 लाख 73 हजार रुपये जुर्माने के नोटिस भेजे थे। लेकिन अभी तक जुर्माने की राशि नहीं जमा की गई है। नगर निगम ने पिछले माह छह छात्र नेताओं की प्रापर्टी जब्त करने की सिफारिश डीसी कार्यालय से की है।
10.48 करोड़ रुपये बकाया लेना है निगम ने
नगर निगम ने कुल 310 डिफाल्टरों की सूची भेजी है जिनकी प्रापर्टी सील करने की सिफारिश की गई है इनमे शहर की कई मशहूर दुकानें भी हैं । इन्होंने अपनी दुकानों के बाहर अवैध विज्ञापन बोर्ड लगाए गए हुए थे। नगर निगम की ओर से 10.48 करोड़ रुपये के जुर्माने के नोटिस भेजे गए है लेकिन नगर निगम इनमे से सिर्फ 1.26 लाख रुपये ही वसूलने में कामयाब रहा।
जुर्माना राशि न लेने के मामले में सलाहकार के निर्देश पर जांच चल रही है। आरोप है कि नगर निगम के अधिकारियों ने शहर में विज्ञापन कंट्रोल एक्ट के तहत लगे बोर्ड जुर्माना वसूलने की बजाय डिफाल्टर्स से सेटलमेंट करने पर ध्यान दिया, जबकि अधिकारियों के पास सिर्फ नोटिस भेजने का अधिकार था।