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जो मेस में करते हैं कमाल, उनके कमरे खस्ताहाल
सुमित सिंह श्यौराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 08 May 2014 12:32 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल की मेस में 15 से 20 सालों से काम कर रहे मेस वर्कर को रात गुजराने के लिए आराम की छत तक नसीब नहीं हो पा रही। कई कर्मचारियों को मेस में ही चद्दर बिछाकर सोना पड़ता है, तो कुछ को हॉस्टल के कमरों में सिर छुपाने के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है।
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हॉस्टल का जो कमरा एक छात्र के लिए बना है उसमें 6 से 7 मैस वर्कर जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर हैं, लेकिन पीयू प्रशासन हॉस्टल मेस वर्कर की इस परेशानी को दूर करने के लिए कुछ नहीं कर रहा।
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4 हॉस्टल में काम शुरू, लेकिन सिरे नहीं चढ़ा
करीब चार साल पहले पीयू प्रशासन ने ब्वॉयज हॉस्टल नंबर 1,3,4 और 5 में मेस वर्कर के लिए कुछ कमरे बनाने का प्रपोजल तैयार किया था। 4 हॉस्टल में काम तो शुरू हुआ, लेकिन आज तक सिरे नहीं चढ़ पा रहा। कांट्रेक्टर कई बार निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ कर भाग जाता है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक हॉस्टल मेें बन रहे सरवेंट क्वार्टर का खर्च लगातार बढ़ते हुए 70 से 75 लाख तक पहुंच चुका है। मेस वर्कर के लिए बनी कई बिल्ंिडग खंडहर हो चुकी हैं।
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3-4 कमरों में गुजर रही जिंदगी
पीयू ब्वॉयज हॉस्टल में 150 से 200 मेस वर्कर काम कर रहे हैं। मेस वर्कर का कहना है कि हॉस्टल में उन्हें सोने के लिए कमरा मिलना तो दूर सामान रखने की जगह भी नहीं मिल पाती। हॉस्टल में 40-45 साल पहले 3-4 वर्कर रुम बने हैं। हर मेस में 20-25 वर्कर इन कमरों में जिंदगी गुजार रहे हैं। नए मेस क्वार्टर दो मंजिला होंगे। इसमें 6 बड़े हॉल कमरों में 36 लोग रह सकेंगे। मेस वर्कर को पीयू प्रशासन साल में सिर्फ एक ट्रेक सूट देता है। जबकि उन्हें इंश्योरेंस और मेडिकल हेल्थ की कोई सुविधा नहीं मिल पाती।
हॉस्टल के पीछे गंदगी के ढेर
पीयू हॉस्टल में सफाई की हालत खस्ता है। कई हॉस्टल के पास से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। हॉस्टल नंबर 4 और 5 की मेस के साथ लगे कुड़ेदान से बदबू उठती है। हॉस्टल नंबर 4 मेस के पीछे रखे कूड़ेदान को कई दिनों से खाली नहीं किया गया है। इन हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट का कहना है कि हॉस्टल में सफाई की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
43 साल से पीयू मेस में वर्कर अशोक लामा
हॉस्टल नंबर 5 की मेस में काम करने वाले 62 वर्षीय अशोक लामा स्टूडेंट और मेस वर्कर में फिल्म अभिनेता डैनी के नाम से मशहूर हैं। इन्हें पीयू के सबसे पुराने मेस वर्कर होने पर गर्व है। अशोक ने बताया कि वह 43 सालों से हॉस्टल नंबर 5 की मेस में काम कर रहे हैं।
दाजर्लिंग निवासी लामा बताते हैं कि उनके दो बेटे और पत्नी चाय के बागानों में काम करते हैं। वह साल में एक बार अपने घर जाते हैं। उन्होंने बताया कि इतने सालों में उन्होंने कई ऐसे स्टूडेंट को खाना खिलाया जो आज बड़े अधिकारी और नेता हैं, लेकिन इतने सालों बाद भी उन्हें हॉस्टल मेस में बने काफी जर्जर कमरे में जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। उन्होंने कहा नए क्वार्टर बनने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा।
कोट्स
बजट की कमी के कारण बीच में कई बार काम रोकना पड़ा, लेकिन अब बजट पास हो चुका है। कोशिश हैं कि हॉस्टल नंबर 3 और 5 के मेस क्वार्टर को जून तक पूरा कर लेंगे।
आरके राय (एक्सईएन पंजाब यूनिवर्सिटी)