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आपदा आई तो क्या होगा पीयू स्टाफ क्वार्टर का

Tue, 12 Nov 2013 11:45 PM IST
सुमित सिंह श्यौराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुमित सिंह श्यौराण/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 12 Nov 2013 11:45 PM IST
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PU employees houses in poor condition

पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) के आला अधिकारियों और प्रोफेसर की कोठियों को चमकाने पर पीयू का कंस्ट्रक्शन विभाग लाखों रुपये पानी की तरह बहा रहा है।

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वहीं कैंपस में सी और डी क्लास कर्मचारियों के घरों की खस्ता हालत से उनके सिर पर मौत का साया मंडरा रहा है।

विशेषज्ञों की माने को भूकंप का झटका अगर सामान्य से थोड़ा सा भी तेज हुआ तो कर्मचारियों के मकान की दीवारें रेत की तरह ढह जाएंगी।

पीयू प्रशासन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बिलकुल भी गंभीर नहीं है। कर्मचारी मकानों की रिपेयर के लिए संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
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अमर उजाला ने मंगलवार को पीयू कैंपस कर्मचारियों के मकानों का मुआयना किया। ब्लॉक ए और बी के मकानों में रहना किसी बुरे सपने से कम नहीं है।

सी क्लास एसोसिएशन प्रधान उमा शंकर का कहना है कि फरवरी में कुलपति खुद मकानों की हालत देख चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक इस पर कोई काम नहीं किया गया।

शंकर ने कहा कि 60 साल से भी पुराने मकानों को तोड़ कर फ्लैट बनाए जाने चाहिए।

साठ साल से नहीं हुई रिपेयर, 15 साल से सफेदी का इंतजार
पीयू कैंपस के गेट नंबर 2 के साथ बने ए और बी ब्लॉक के करीब 100 मकान 1955-56 में बनाए गए थे। साठ साल बीतने के बाद भी इन मकानों की एक बार भी रिपेयर नहीं हुई है।
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मकानों की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि छत के लेंटर और दीवारों में कई सेंटीमीटर का गेप आ चुका है। पीयू के ए ब्लॉक के मकान नंबर 49 (ए) में तीनों कमरों की दीवारों में दरार आ चुकी हैं।

रसोई की हालत भी काफी खस्ता हो चुकी है। इस मकान में रहने वाले सिक्योरटी गार्ड जंग बहादुर का कहना है कि मकान की नींव धस चुकी है। दीवारें अपनी जगह छोड़ चुकी है।

परिवार के लोग हर वक्त मौत के साये में जी रहे हैं। इसी ब्लॉक के मकान नंबर 48 निवासी रामपाल ने कहा कि बरसों से मकान की कोई रिपेयर नहीं हुई।

मकानों में बिजली की तारें खुली पड़ी हैं। टायलेट की हालत भी खस्ता है। ए ब्लॉक के घरों के सामने ही गंदगी के ढेर लगे रहते हैं लेकिन सफाई के लिए कोई इंतजाम नहीं है।

वीसी की कोठी पर 18 से 20 लाख
पीयू कर्मचारियों के मकानों में सफेदी और रिपेयर करने के लिए प्रशासन के पास पैसा नहीं है। दूसरी तरफ पीयू कुलपति से लेकर अन्य आला अधिकारियों की कोठियां चमक रही हैं।

जानकारी के अनुसार पिछले साल वीसी हाउस की रिपेयर पर 18 से 20 लाख रुपया खर्च किया गया। पीयू के अन्य प्रतिष्ठित पदों पर बैठे अधिकारियों की कोठियों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है।

सी और डी क्लास कर्मचारियों के मकानों में 15 सालों से सफेदी तक नहीं हुई है। कर्मचारियों का कहना है उन्हें अपने पैसे से मकानों की रिपेयर करानी पड़ती है।


लोगों की जान जा सकती है
पीयू के नॉन टीचिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट दीपक कौशिक के मुताबिक, "हमने कई बार पीयू प्रशासन का मकानों की खस्ता हालत की मेंटेनेस की तरफ ध्यान दिलाया है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 60 साल पुराने मकानों की लाइफ खत्म हो चुकी है। अगर भूकंप का हल्का भी झटका आया तो कई लोगों की जान जा सकती है। सीनेट में भी कई बार मुद्दा उठ चुका है। टीचिंग स्टॉफ क्वाटर की हालत भी खराब है।"

वहीं पंजाब यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आरके राय ने बताया, "मेरे पास मकानों में किसी तरह की दिक्कत को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसे है तो मैं कल ही इसकी जांच कराऊंगा।"

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