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पीयू से पीएचडी करने के इच्छुक ये जरूर पढ़ें
सुमित सिंह श्यौराण
Updated Tue, 21 Jan 2014 12:52 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी ने पीएचडी में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ओर भी मुश्किल कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि नए नियमों से रिसर्च क्वालिटी बेहतर होगी।
पीएचडी में अब सिर्फ शोध में पूरी दिलचस्पी रखने वाले युवाओं को ही मौका मिल सकेगा। पीयू में यूजीसी-सीएसआईआर या डीएसटी जैसी प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप पाने वाले अभ्यार्थियों के लिए भी एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी के सामने इंटरव्यू और इंट्रेक्शन प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है।
यूजीसी ने 2009 से पीएचडी दाखिले के नियमों में बड़े स्तर पर बदलाव किया था। एंट्रेंस क्लीयर करने के बाद 6 महीने का कोर्स वर्क और फिर रिसर्च मैथर्डलॉजी के तीन पेपर क्लीयर करने जरूरी कर दिए हैं।
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इसलिए किए बदलाव
पंजाब यूनिवर्सिटी ने अब दुनिया की टॉप 200 यूनिवर्सिटी में शामिल होने के लिए ‘मिशन टॉप रैंकिंग’ शुरू कर दिया है। अगले तीन सालों में पीयू का फोकस क्वालिटी रिसर्च कर अधिक से अधिक अंक जुटाना होगा।
बीते 2 अक्तूबर 2013 को टाइम्स हायर एजूकेशन और फिर दिसंबर में ब्रिक्स की ओर से जारी रैंकिंग में बेशक पंजाब यूनिवर्सिटी देश की नंबर वन और दुनिया की टॉप 225-250 (ग्रुप) में शामिल की गई है। लेकिन रैंकिंग के लिए अपनाए गए स्केल में पीयू रिसर्च (शोध) में फिसड्डी रहा।
रैंकिंग में पीयू के कमजोर पक्ष में सुधार के लिए कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने डीयूआई, डीन रिसर्च और कुछ विभागाध्यक्षों की अगुवाई में हाईपॉवर कमेटी गठित की है।
इस कमेटी से जुड़े सदस्यों ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में भी पीयू में क्वालिटी रिसर्च को लेकर अपने सुझाव दिए हैं। पीएचडी दाखिले के लिए नियमों को कड़ा करना इसी का एक हिस्सा है।
पीयू स्टूडेंट संभालेंगे काउंसिलिंग का जिम्मा
पीयू कैंपस में पिछले साल भर में दो आत्महत्या और कुछ अन्य घटनाओं के बाद पीयू प्रशासन ने काउंसिलिंग सेल को दुरस्त करने का फैसला किया है।
पीयू के विभागों और हॉस्टल में विद्यार्थियों की काउंसिलिंग का जिम्मा अब पीयू विद्यार्थियों को ही देने की तैयारी है। पीयू कुलपति की ओर से डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. नंदिता की अगुवाई में इस मामले में कदम उठाने को कहा गया है।
कमेटी ने पीयू के ग्रिवेंस सेल में काउंसिलिंग के लिए पीयू के ही साइकोलॉजी और एमएड (गाइडेंस एंड काउंसिलिंग) विद्यार्थियों को जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा।
पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए काउंसिलिंग सेल का काम कोर्स के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का हिस्सा होगा। ये विद्यार्थी दाखिले और परीक्षा के दिनों में विभाग और हॉस्टल में जाकर विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनेंगे।
वेटिंग लिस्ट होगी कम
पंजाब यूनिवर्सिटी में इस समय करीब 2 हजार से अधिक विद्यार्थी पीएचडी या एमफिल में शोध कर रहे हैं। पीयू हर साल अपने स्तर पर पीएचडी में दाखिले के लिए एंट्रेंस टेस्ट लेती है।
साथ ही यूजीसी नेट और जेआरएफ क्लीयर छात्रों की संख्या भी काफी होती है। जानकारी अनुसार पीयू में पीएचडी रजिस्ट्रेशन के लिए 300 से अधिक विद्यार्थियों की वेटिंग लिस्ट चल रही है।
पीयू द्वारा एफिलिएटेड कालेजों में रिसर्च सेंटर और कालेज शिक्षकों को पीएचडी गाइड बनने की अनुमति देने से पीएचडी वेटिंग लिस्ट में कमी आने की उम्मीद है।
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पीएचडी में अब सिर्फ शोध में पूरी दिलचस्पी रखने वाले युवाओं को ही मौका मिल सकेगा। पीयू में यूजीसी-सीएसआईआर या डीएसटी जैसी प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप पाने वाले अभ्यार्थियों के लिए भी एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी के सामने इंटरव्यू और इंट्रेक्शन प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है।
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यूजीसी ने 2009 से पीएचडी दाखिले के नियमों में बड़े स्तर पर बदलाव किया था। एंट्रेंस क्लीयर करने के बाद 6 महीने का कोर्स वर्क और फिर रिसर्च मैथर्डलॉजी के तीन पेपर क्लीयर करने जरूरी कर दिए हैं।
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इसलिए किए बदलाव
पंजाब यूनिवर्सिटी ने अब दुनिया की टॉप 200 यूनिवर्सिटी में शामिल होने के लिए ‘मिशन टॉप रैंकिंग’ शुरू कर दिया है। अगले तीन सालों में पीयू का फोकस क्वालिटी रिसर्च कर अधिक से अधिक अंक जुटाना होगा।
बीते 2 अक्तूबर 2013 को टाइम्स हायर एजूकेशन और फिर दिसंबर में ब्रिक्स की ओर से जारी रैंकिंग में बेशक पंजाब यूनिवर्सिटी देश की नंबर वन और दुनिया की टॉप 225-250 (ग्रुप) में शामिल की गई है। लेकिन रैंकिंग के लिए अपनाए गए स्केल में पीयू रिसर्च (शोध) में फिसड्डी रहा।
रैंकिंग में पीयू के कमजोर पक्ष में सुधार के लिए कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने डीयूआई, डीन रिसर्च और कुछ विभागाध्यक्षों की अगुवाई में हाईपॉवर कमेटी गठित की है।
इस कमेटी से जुड़े सदस्यों ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में भी पीयू में क्वालिटी रिसर्च को लेकर अपने सुझाव दिए हैं। पीएचडी दाखिले के लिए नियमों को कड़ा करना इसी का एक हिस्सा है।
पीयू स्टूडेंट संभालेंगे काउंसिलिंग का जिम्मा
पीयू कैंपस में पिछले साल भर में दो आत्महत्या और कुछ अन्य घटनाओं के बाद पीयू प्रशासन ने काउंसिलिंग सेल को दुरस्त करने का फैसला किया है।
पीयू के विभागों और हॉस्टल में विद्यार्थियों की काउंसिलिंग का जिम्मा अब पीयू विद्यार्थियों को ही देने की तैयारी है। पीयू कुलपति की ओर से डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. नंदिता की अगुवाई में इस मामले में कदम उठाने को कहा गया है।
कमेटी ने पीयू के ग्रिवेंस सेल में काउंसिलिंग के लिए पीयू के ही साइकोलॉजी और एमएड (गाइडेंस एंड काउंसिलिंग) विद्यार्थियों को जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा।
पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए काउंसिलिंग सेल का काम कोर्स के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का हिस्सा होगा। ये विद्यार्थी दाखिले और परीक्षा के दिनों में विभाग और हॉस्टल में जाकर विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनेंगे।
वेटिंग लिस्ट होगी कम
पंजाब यूनिवर्सिटी में इस समय करीब 2 हजार से अधिक विद्यार्थी पीएचडी या एमफिल में शोध कर रहे हैं। पीयू हर साल अपने स्तर पर पीएचडी में दाखिले के लिए एंट्रेंस टेस्ट लेती है।
साथ ही यूजीसी नेट और जेआरएफ क्लीयर छात्रों की संख्या भी काफी होती है। जानकारी अनुसार पीयू में पीएचडी रजिस्ट्रेशन के लिए 300 से अधिक विद्यार्थियों की वेटिंग लिस्ट चल रही है।
पीयू द्वारा एफिलिएटेड कालेजों में रिसर्च सेंटर और कालेज शिक्षकों को पीएचडी गाइड बनने की अनुमति देने से पीएचडी वेटिंग लिस्ट में कमी आने की उम्मीद है।